इतिहास

🌻व्यंग्यबाण 🌻

🌻व्यंग्यबाण 🌻 मुख पर सुरीले गीत ह्रिदय रसहीन वाणी झरे मेह मन करुणा विहीन सुहाता जिन्हें निज स्वार्थ ही केवल करें श्रृंगार किन्तु मुखड़ा श्री हीन आत्म मुग्ध ऐसे कोई भाता ना आप अपनी महिमा बताते प्रवीन दूजे को गिराते  अपनी जमाते आत्म प्रशंसा नित ही गढ़ते नवीन मिले यदि स्वयं से बली चुप लगाते […]

इतिहास लेख सामाजिक

चीमन का बाजार दर्शन

बाजार के दर्शन की इच्छा उसी को रखनी चाहिए जिसके पास क्रय शक्ति और आवश्यकता में तालमेल बनाए रखने का सामर्थ्य हो वरना बाजार में अर्थशास्त्र का शैतान चमक-दमक के साथ विराजमान है जो आपको लूटना चाहता है। बाजार का दर्शन करने और अर्थशास्त्र रूपी मायावीशास्त्र से लड़ने में सक्षम है ‘चीमनलाल जी ‘ ये […]

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कानून का फैसला

लघुकथा कानून का फैसला ************** रामधनी बहुत गरीब था।किसी तरह मेहनत मजदूरी कर अपना और अपनी पत्नी का जीवन यापन करता था।उसके पड़ोस के बाबू जी उसकी जमीन खरीदना चाहते थे,मगर राम धनी बेंचना नहीं चाहता था। आखिरकार बाबू जी ने इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया और रामधनी को उसके अपने ही घर से […]

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विनती

विनती ****** हे हमारे पूर्वजों, पित्तरों मैं कुछ कहना चाहता हू्ँ, परंतु आप लोगों के क्रोध से डरता हू्ँ। पर आज कह ही डालूँगा काहे का डर वैसे भी अब डरकर क्या होगा? जब डरना था तब डरा नहीं, आप लोगों के दिखाये मार्ग का कभी अनुसरण किया नहीं। तभी तो आज रोता हूँ जो […]

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मुझे कुछ कहना है

मुझे कुछ कहना है —–/—–/—–/—– बहुत दिनों से सोच रहा हूँ कि आप से कुछ बात करूँ।पर डरता था कि कहीं आप मेरी किसी भूल का गुस्सा न कर बैठें।वैसे तो आपको गुस्सा होने का पूरा अधिकार है।आखिर हम आपकी ही संतान हैं। आप कहा भी करते थे,डाँटते थे,समझाते भी थे, पर उस समय आपकी […]

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हाइकू

हाइकू ******** सुनहरा हो जीवन हर पल, सभी चाहते। ********** सब चाहते जीवन सुनहरा, हो हर पल। ********* जन जन की सुनहरे पलों की, ही चाहत है। ********* डर सबका ये सुनहरे पल, कब खो जायें। *********** विश्वास नहीं ये सुनहरा पल, चला भी गया। ************ भरोसा मुझे मेरा भी सुनहरा पल आयेगा। ********** खुशी […]

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भीख

लघुकथा भीख ★★★★ कहते हैं लाचारी इंसान को कितना बेबस बना देती है।कुछ ऐसा ही मि.शर्मा को अब महसूस हो रहा है। कहने को तो चार बेटे बहुएं नाती पोतों से भरा पूरा परिवार है।मगर सब अपने अपने में मस्त हैं। महल जैसे घर में मि.शर्मा अकेले तन्हाई में सिर्फ मौत की दुआ करते रहते […]

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कविता

कविता ——— मन के भावों को शब्दों में पिरोते अभिव्यक्ति को आयाम देते शब्दों की माला ही तो कविता है। कविता का कोई रूप रंग जात पात आकार नहीं है, कविता शब्दों का संसार लिए मगर कोई व्यापार नहीं है। कविता भाव है,संवेदना है कविता आह है, पीड़ा है,वीणा है कविता कलमकार की कलम से […]

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महाश्वेता देवी के प्रसंगश:

भारतीय ज्ञानपीठ विजेत्री महाश्वेता देवी ने अपने महान कालजयी उपन्यास ‘जंगल के दावेदार’ में लिखती हैं, ‘अगर उसे उसकी धरती पर दो वक़्त दो थाली घाटो, बरस में चार मोटे कपड़े, जाड़े में पुआल-भरे थैले का आराम, महाजन के हाथों छुटकारा, रौशनी करने के लिए महुआ का तेल, घाटो खाने के लिए काला नमक, जंगल […]

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मेरा सृजन

मेरा सृजन —//—//— सृजन शाश्वत सत्य है सृजन सृजक का प्राण है। सृजन कैसा भी हो! अच्छे से अच्छा या या कितना भी खराब, लेकिन उसमें समाहित होते हैं सृजक की भावना उसके भाव उसकी संवेदनाएं, सब कुछ झोंक देता है सृजक अपने सृजन में बड़ी तल्लीनता से गढ़ता है । उकेरता, बनाता,चित्रित करता शब्दमोतियों […]