इतिहास धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आर्यसमाज ही ईश्वर प्रवृत्त ज्ञान चार वेदों का प्रतिनिधि व प्रचारक है

ओ३म् –आर्यसमाज स्थापना दिवस पर- आर्यसमाज की स्थापना वेदों के महान विद्वान ऋषि दयानन्द सरस्वती जी ने 10 अप्रैल, 1875 को मुम्बई में की थी। ऋषि दयानन्द के माध्यम से ही देश के अधिकांश लोगों को इस तथ्य का ज्ञान हुआ कि वेदों का ज्ञान सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर से प्राप्त हुआ। वेदों में […]

इतिहास कविता पद्य साहित्य

संभावना

जिस तरह दिनकर सुबह को निकलकर शाम को विलीन हो जाता है फिर दूसरे सुनहरे कल के लिए उसी तरह/ मुझे संभावना है कि इंसान भी आज नहीं तो कल अवश्य ही बदलेंगे अपने सुनहरे भविष्य के लिए।।     मनोज बाथरे चीचली

इतिहास कविता पद्य साहित्य

लहराते विचार

विचारों के अथाह सागर में लहराते हुए विचार अपने लिए कुछ अरमानों के संग संसार में सफ़र पर निकलते हैं वो सोचते हैं हमें कहीं ठहराव का महासागर मिल जाए।। मनोज बाथरे चीचली

इतिहास कविता पद्य साहित्य

पहचान

मैं क्या हूँ? मेरी पहचान क्या है अपने ज़हन में यह प्रश्न लिए घूमता हुआ इंसान इस/ प्रश्न का उत्तर दर-ब-दर तलाशता फिरता है लेकिन / उसका उत्तर उसको क्या पता जिससे वह पूछ रहा है उसका / उत्तर तो सिर्फ ये हैं कि / इंसान अपनी पहचान स्वयं बनायें।। मनोज बाथरे चीचली जिला नरसिंहपुर […]

इतिहास

“लक्ष्य”

मायूसी की चादर ओढ़ कर हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं पाने का प्रयास करते हैं तो ये उसके साथ नाइंसाफी होती है अगर हम अपने लक्ष्य को पाना है तो / दिल को मजबूत अपने संकल्प को कठोर और दृढ़ निश्चयी बनाना होगा फिर हम चले गए लक्ष्य को प्राप्त करना सफल होगा […]

इतिहास धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आर्य कौन हैं और इनका मूलस्थान?

ओ३म् मनुष्य श्रेष्ठ गुण, कर्म व स्वभाव को ग्रहण करने से बनता है। विश्व में अनेक मत, सम्प्रदाय आदि हैं। इन मतों के अनुयायी ईसाई, मुसलमान, हिन्दू, आर्य, बौद्ध, जैन, सिख, यहूदी आदि अनेक नामों से जाने जाते हैं। मनुष्य जाति को अंग्रेजी में Human कहा जाता है। यह जितने मत व सम्प्रदायों के लोग […]

इतिहास धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वैदिक संस्कृति के उज्जवल नक्षत्र हनुमान जी के कुछ गौरवपूर्ण कार्य

ओ३म् –हनुमान जी की जयन्ती पर- वैदिक वा पौराणिक मान्यता के अनुसार वीर हनुमान जी का जन्म त्रेतायुग के अंतिम चरण में और फलित ज्योतिष के आचार्यों की गणना के अनुसार 58 हजार 112 वर्ष  पहले चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 6.03 बजे भारत देश […]

इतिहास भजन/भावगीत

भजन

एक विनती है ईश्वर,एक बार तो आ जाना, दुख दर्द गरीबों का,तुम आकर मिटा जाना। दर छोड़ तेरे बंदे,जाएं तो कहां जाएं, तू प्यार का सागर है,एक ज्ञान की गागर है, तेरी बूंद के प्यासे हम,एक बूंद पिला जाना, दुख दर्द गरीबों का,तुम आकर मिटा जाना। मेरी डूब रही नैया,अब आकर बचा लो तुम, एक […]

इतिहास कविता

रात

चमकते जुगनूलगते चरागों सेकुछ फूल खिलकरकर रहे बाते रातों सेकैसे करे भँवरे मुहब्बत फूलों सेखुश्बुओं ने कर ली है बातेंतितलियों सेरात में खिले फूलों सेउडी खुशबुएँऔरचमकते हुए जुगनुओं कोदेखो ,टिमटिमाते हुएहैरान /मदमस्त हो जाओगेकुदरत की दस्तकारी परतभी समझ भी सकोगे किरात सुहानी क्यों हुआ करती। — संजय वर्मा ‘दृष्टि’

इतिहास

वर्द्धमान महावीर

करीब ढाई हजार वर्ष पूर्व, ईसा से 600 वर्ष पहले वैशाली गणतंत्र के कश्यप कुल में कुण्डलपुर में पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के यहाँ तीसरी संतान के रूप में चैत्र शुक्ल तेरस को वर्द्धमान का जन्म हुआ। यही वर्द्धमान बाद में स्वामी महावीर बने। जिस प्रकार प्रभु श्री राम ने राज पाट को त्यागकर […]