इतिहास

भारतीय सभ्यता और संस्कृति

क्या मेगास्थनीज़, ह्वेनसांग, मेक्समूलर ! तो कामिल बुल्के, रस्किन बांड आदि तो यहीं के रह गए । अल्लामा इक़बाल ने तो कलमतोड़ प्रशंसा किये । जिसतरह से ताज़महल हमारी आन- बान- शान है, तो लता मंगेशकर, अमिताभ बच्चन, मुहम्मद रफ़ी भी तो देश के लिए आठवाँ आश्चर्य है । वह भारत रत्न डॉ. अब्दुल कलाम […]

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‘कटिहार’ का उदय में ‘पूर्णिया’ कनेक्शन

कटिहार का इतिहास जानने से पहले हम पूर्णिया (पूर्व नाम पुरैनियाँ) का इतिहास और भूगोल जानते हैं, क्योंकि एक विशाल क्षेत्रफल में फैले पूर्णिया जिला के अंतर्गत ही कटिहार शुरुआत में ब्लॉक व रेवेन्यू सर्किल थे, फिर अनुमंडल बने । पहली अक्टूबर 1973 की मध्यरात्रि तक कटिहार पूर्णिया जिला के अनुमंडल मात्र थे, जो कि […]

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भारतरत्न संत

संत बिनोवा भावे के जन्मदिवस ! मेरे पितामह के साथ ! भारतरत्न और भारत के पहले मैग्सेसे अवार्ड विजेता आचार्य बिनोवा भावे के जन्मदिवस (11 सितम्बर) पर उन्हें सादर नमन और विनम्र श्रद्धांजलि ! महान स्वतंत्रता सेनानी, भूदान आंदोलन के प्रणेता तथा ‘गीता प्रवचन’ नामक अद्भुत पुस्तक के रचयिता संत जी ने ‘आपातकाल’ को ‘अनुशासन […]

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शिकागो विश्व धर्म महासभा

शिकागो विश्व धर्म महासभा ! भारत तब भी विश्वगुरु था, अब भी है । तारीख 11 सितम्बर 1893 और 2019 में आज की तारीख अमेरिका के शिकागो शहर में पहलीबार संसारभर के प्रायश: धर्मों के विश्व सम्मेलन आयोजित हुए थे, जिनमें ईसाई, इस्लाम, यहूदी इत्यादि के धर्म-प्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने धर्म के पक्ष में जोरदार तरीके […]

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प्रथम आधुनिक शिक्षिका

‘नियोजित’ को सरकार नहीं मानते ‘शिक्षक’ ! फिर काहे को ‘शिक्षक दिवस’ । पाँच सितम्बर को ‘शिक्षक दिवस’ मनाए जाने का सरकारी स्तर पर कोई प्रमाण नहीं है ! दूसरी तरफ, जिसतरह से दोनों सरकारों ने ‘नियोजित’ शिक्षकों के प्रति घृणा और वैरभाव रखा है, इसे मनाने का कोई औचित्य नहीं रह गया है । […]

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भारतरत्न राधाकृष्णन

राजर्षि विश्वामित्र की ऋषि परंपरा में राधाकृष्ण के युगलरूप श्रद्धेय राधाकृष्णन का नाम महान राजर्षि के रूप में लिया जाता है, जो भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति थे । महान संत किसी काल देश या स्थान के नहीं होते हैं, बल्कि उनकी छवि विश्वस्तर पर होती है। अंग्रेजी का सितंबर माह आचार्य विनोबा […]

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वो जीते, वो जगन्नाथ !

पहली पुण्यतिथि पर डॉ. जगन्नाथ मिश्र याद आये । वर्ष 2019 में ‘जगन्नाथ’ चले गए, कई ‘मिश्रण’ सस्पेंस का छोड़ गए। डॉ. जगन्नाथ मिश्र का लम्बी बीमारी के बाद निधन 19 अगस्त 2019 को हो गया, तब वे 83 वर्ष के थे ! वे अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट थे। अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर डॉ. मिश्र की मृत्यु […]

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जनता के राष्ट्रपति प्रणब दा

जनता के राष्ट्रपति प्रणब दा भी हमें छोड़ चले गए। आमलोगों के पोलटू दा पश्चिम बंगाल के छोटे से गाँव में जन्मे और डाकघर के मुंशी से काम शुरू कर इंदिरा सरकार में प्रणब दा ‘वित्त मंत्री’ थे, किन्तु नरसिंहराव सरकार में डॉ. मनमोहन सिंह ‘वित्त मंत्री’ और जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने, तो […]

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अज्ज आखाँ वारिस शाह नूँ

पद्मविभूषण और ज्ञानपीठ सम्मान से सम्मानित अमृता प्रीतम मूलतः पंजाबी भाषा की कवयित्री व लेखिका थी । पंजाब के गुजराँवाला में 31 अगस्त 1919 को जन्मी अमृता जी ने सौ से अधिक पुस्तकें लिखी, जिनमें उनकी चर्चित आत्मकथा ‘रसीदी टिकट’ भी शामिल है। उनकी बाल्यावस्था लाहौर में बीती। कमोवेश शिक्षा भी वहीं पाई । अमृता […]

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बनफूल से बनफूल तक

हिंदी फ़िल्म ‘बनफूल’ 1971 में आई थी, इस फिल्म में एक गीत है- ‘मैं जहाँ चला जाऊं, बहार चली आए; महक जाए, राहों की धूल, मैं बनफूल….!’ यह फ़िल्म जब रिलीज हुई थी, तब बांग्ला के मशहूर कथाकार-उपन्यासकार ‘बनफूल’ जीवित थे, किन्तु इस फ़िल्म से ‘बनफूल’ जी का कोई सरोकार नहीं था । हाँ, नाम […]