इतिहास

क्या वेद आर्य-द्रविड़ युद्ध का वर्णन करते है?

वेदों के विषय में एक अन्य भ्रान्ति फैलाई जा रही रही है कि आर्य लोग विदेशी (संभवत मध्य एशिया) थे और वे भारत भूमि पर आक्रमणकारी के रूप में आये। यहाँ के मूल निवासी काले रंग के लोगों पर जो द्रविड़ (दास) थे और जिन्हें आर्यों ने दास और दस्युओं का नाम दिया था पर […]

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महर्षि दयानन्द के बहुप्रतिभावान् अद्वितीय शिष्य स्वामी श्रद्धानन्द

ओ३म् महर्षि दयानन्द (1825-1883) ईश्वर के सच्चे स्वरुप के जिज्ञासु तथा उसकी प्राप्ति के उपायों के अनुसंधानकर्त्ता थे। बाइसवें वर्ष में उन्होंने टंकारा जनपद मोरवी, गुजरात स्थित अपने सुखी व सम्पन्न परिवार का त्याग कर दिया था और देश भर में घूम कर सच्चे धार्मिक विद्वानों व योगियों की तलाश की।  जो विद्वान व योगी […]

इतिहास

देश के लिए मर मिटने वाले देशभक्त मृत्युंजय भाई परमानन्द

ओ३म् आज 4 नवम्बर 140 वीं जयन्ती पर स्वतन्त्रता आन्दोलन के इतिहास में भाई परमानन्द जी का त्याग, बलिदान व योगदान अविस्मरणीय है। लाहौर षड्यन्त्र केस में आपको फांसी की सजा दी गई थी। आर्यसमाज के  अन्तर्गत आपने विदेशों में वैदिक धर्म का प्रचार किया। इतिहास के आप प्रोफैसर रहे एवं भारत, यूरोप, महाराष्ट्र तथा […]

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लाखामंडल की ईश्वरा प्रशस्ति

नगाधिराज हिमालय की यमुना घाटी मंदिर स्थापत्य कला की दृष्टि से अत्यंत वैभवशाली व सम्पन्न रही है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के जौनसार-बावर क्षेत्र में स्थित लाखामंडल स्थान पुरातात्विक धरोहर के रूप में विश्व विख्यात है। यह स्थान जनपद मुख्यालय से मसूरी होकर जाने वाले राजमार्ग पर लगभग ११०कि०मी० दूर मध्य हिमालय उपत्यका में अवस्थित […]

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भारत के लौह पुरुष सरदार पटेल का कृतज्ञ हमारा भारत

ओ३म् – देशवासियों के आदर्श एवं प्रेरणास्रोत- ‘माता भूमि पुत्रो अहं पृथिव्या’ इस वेद की सूक्ति में निहित मातृभूमि की सेवा व रक्षा की भावना से सराबोर देश की आजादी के अविस्मरणीय योद्धा, देश के प्रथम गृहमंत्री एवं उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने देश की आजादी और और उसकी उन्नति के लिए जो सेवा […]

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देश को अणुशक्ति की राह दिखाने वाले वैज्ञानिक डा. भाभा

भारत में परमाणु शक्ति का विकास करने वाले महान् वैज्ञानिक डा. होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुम्बई के एक पारसी परिवार में हुआ था। वे न सिर्फ एक महान वैज्ञानिक थे अपितु चित्रकार और संगीतज्ञ भी थे। उनके पिता जे एच भाभा तत्कालीन बम्बई के प्रसिद्ध वकील थे । बाद में […]

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कलकत्ता, तेरी जिन गलियों से वो मुसाफिर गुजरा था, उनकी मिट्टी से तिलक लगाने जरूर आऊंगा

कोलकाता को मैं हमेशा कलकत्ता ही बोलता हूं। अभी तक मैंने यह शहर सिर्फ अखबार, टीवी, तस्वीरों और इंटरनेट के जरिए ही देखा है, कभी जाने का मौका नहीं मिला। कलकत्ता से सिर्फ बंगाल का ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान का बहुत गहरा रिश्ता है। कभी इसी शहर की स्याही कागज पर उतर कर गीतांजलि […]

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भारतीय इतिहास की भयंकर भूलें

काला पहाड़  बांग्लादेश। यह नाम स्मरण होते ही भारत के पूर्व में एक बड़े भूखंड का नाम स्मरण हो उठता है। जो कभी हमारे देश का ही भाग था। जहाँ कभी बंकिम के ओजस्वी आनंद मठ, कभी टैगोर की हृद्यम्य कवितायेँ, कभी अरविन्द का दर्शन, कभी वीर सुभाष की क्रांति ज्वलित होती थी। आज बंगाल […]

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हमारे पुराने साथी दयानन्दभक्त श्री शिवनाथ आर्य

ओ३म् श्री शिवनाथ आर्य हमारी युवावस्था के दिनों के निकटस्थ मित्र थे। उनसे हमारा परिचय आर्यसमाज धामावाला देहरादून में सन् 1970 से 1975 के बीच हुआ था। दोनों की उम्र में अधिक अन्तर नहीं था। वह अद्भुत प्रकृति वाले आर्यसमाजी थे। उनके विलक्षण व्यक्तित्व के कारण मैं उनकी ओर खिंचा और हम दोनों में मैत्रीपूर्ण […]

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दयानन्द भक्त और क्रान्तिकारियों के प्रथम गुरू पं. श्यामजी कृष्ण वर्म्मा

ओ३म् आज 159 वीं जयन्ती पर गुजरात की भूमि में महर्षि दयानन्द के बाद जो दूसरे प्रसिद्ध क्रान्तिकारी देशभक्त महापुरूष उत्पन्न हुए, वह ‘पं. श्यामजी  कृष्ण वर्म्मा’ के नाम से विख्यात हैं। पं. श्यामजी कृष्ण वर्म्मा ने देश से बाहर इंग्लैण्ड, पेरिस और जेनेवा में रहकर देश को अंग्रेजों की दासता से पूर्ण स्वतन्त्र कराने […]