इतिहास

रेल यात्रा और स्वामी दयानन्द

महर्षि दयानन्द ने सन् 1863 में वैदिक धर्म के प्रचार प्रसार के क्षेत्र में कदम रखा था। इसके बाद उन्होने अक्तूबर, 1883 तक सारे देश का भ्रमण कर प्रचार किया। देश के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में वह सड़़क मार्ग के अतिरिक्त रेल यात्रा का भी प्रयोग करते थे। यात्रा में उनके […]

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फर्रुखाबाद में सनातनी पण्डितों के प्रश्न और महर्षि दयानन्द के उत्तर

स्वामी दयानन्द द्वारा 1879 में सार्वजनिक रूप से पहली बार समलैगिंकता का विरोध स्वामी दयानन्द 25 सितम्बर से 9 अक्तूबर, 1879 तक में आकर रहे और यहां वैदिक धर्म का प्रचार किया। फर्रूखाबाद में पौराणिक पण्डितों ने पं. गौरीशंकर के निवास पर एक धर्म सभा कर 25 प्रश्न लिखकर तैयार किये। उन प्रश्नों को सभा […]

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चलो आज नव सूरज छूलें !

चलो आज नव सूरज छूलें ! बादल आँखों, भर सकते है चिड़ियों के दल उड़ सकते है जब नदी वृक्ष ले बहती है हम क्यों पीछे रह जाते है ? अपने ऊपर विश्वास करें चलो आज नव संकल्प करें । प्राची सूरज को लाती है संसार का तिमिर मिटाती है आशाएँ देती है हजार जीने […]

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मौलाना कैसे बने आर्य प्रचारक

        पंडित भोजदत्त आर्य मुसाफिर आगरा में पंडित लेखराम जी की स्मृति में आर्य मुसाफिर उपदेशक विद्यालय चलाते थे एवं ‘आर्य मुसाफ़िर’ के नाम से साप्ताहिक पत्र का संपादन भी करते थे। इस्लाम की मान्यताओं की तर्क पूर्ण समीक्षा इस पत्र में छपती रहती थी जिसे पढ़कर अनेक मुसलमान भाई बिना विचार […]

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महर्षि दयानन्द के जीवन के कुछ प्रेरक प्रसंग

आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती इतिहास में हुए ज्ञात वैदिक विद्वानों में अपूर्व विद्वान हुए हैं। वेद ईश्वरीय ज्ञान है और सब सत्य विद्याओं का पुस्तक है। वेदों का आविर्भाव सृष्टि की उत्पत्ति के आरम्भ में 1.96 अरब वर्ष पहले हुआ था। हमारे पूर्वजों ने इस ग्रन्थ रत्न की प्राणपण से रक्षा की। […]

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पांडव और कौरव

पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं – 1. युधिष्ठिर 2. भीम 3. अर्जुन 4. नकुल। 5. सहदेव ( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है ) पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन की माता कुन्ती […]

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संविधान निर्माता- भारतरत्न डा. अम्बेडकर

भारतीय संविधान के निर्माता डा. भीमराव रामजी अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू मध्यप्रदेश में हुआ था। इनके पिता श्री रामजी सकपाल व माता भीमाबाई धर्मप्रेमी दम्पति थे। अम्बेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था। जो उस समय अस्पृश्य मानी जाती थी। इस कारण उन्हें कदम-कदम पर असमानता और अपमान सहना पड़ा। […]

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महान विद्वान पं. शिवशंकर शर्मा काव्यतीर्थ का प्ररेणादायक साहित्य

महर्षि दयानन्द का स्वयं का जीवन स्वर्ण के समान प्रकाशमान व पवित्र था। वह सच्चे पारसमणि पत्थर भी सिद्ध हुए जिनको छूकर अनेक साधारण मनुष्य वेदों के बडें-बड़े विद्वान बन गये। ऐसे विद्वानों में हम पं. शिवशंकर शर्मा काव्यतीर्थ सहित पण्डित गुरूदत्त विद्याथी, स्वामी श्रद्धानन्द, पण्डित लेखराम, महात्मा हंसराज, दर्शनानन्द सरस्वती, स्वामी वेदानन्द, स्वामी विद्यानन्द […]

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मूर्तिपूजा, तीर्थ हर की पैड़ी, एकसाथ खानपान और महर्षि दयानन्द

महर्षि दयानन्द अपने जीवनकाल में देश के विभिन्न भागों में वेद प्रचारार्थ जाते थे और लोगों को उपदेश करते थे। वह प्रायः सभी स्थानों पर अपने कार्यक्रमों के विज्ञापन कराते थे जिसमें उपदेशों के अतिरिक्त शंका समाधान, वार्तालाप और शास्त्रार्थ करने का आमंत्रण हुआ करता था। उनके इन कार्यक्रमों में हिन्दूओं सहित सभी मुस्लिम व […]

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आर्यसमाज : एक वैश्विक धार्मिक सामाजिक संस्था

आज 10 अप्रैल, 2015 को 141 वें स्थापना दिवस पर  आर्य समाज की स्थापना आज से 140 वर्ष पूर्व 10 अप्रैल, 2015 को मुम्बई में महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने की थी। महर्षि दयानन्द महाभारत के बाद वेदों के प्रथम शीर्षस्थ ऐसे विद्वान थे जिनकों वेदों के सत्य अर्थ करने की योग्यता प्राप्त थी। महाभारत […]