इतिहास

दशरथ की कूटनीति

रामायण की के दो प्रमुख स्त्री पात्र है कैकयी और उसकी दासी मंथरा , रामभक्त इन दोनों पात्रो को रामायण की खलनायिका मानते हैं । तुलसी दास जैसे भक्त तो इन से चिढ के यंहा तक लिख गए हैं ‘ बिधुहुँ न नारि हृदय गति जानी, सकल कपट अघ अवगुन खानी” । राम के कष्टो […]

अन्य लेख इतिहास

महर्षि दयानन्द, वेद प्रचार और देश को स्वतन्त्रता की प्राप्ति

ओ३म् आगामी स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त का दिन देश का स्वतन्त्रता दिवस है। सन् 1947 में इसी दिन भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति व स्वतन्त्रता मिली थी। यद्यपि यह स्वतन्त्रता है परन्तु हमें यह भी याद रखना चाहिये कि इस दिन से एक दिन पहले 14 अगस्त, 1947 को भारत का […]

इतिहास

आर्यसमाज की महान विभूती- डॉ भवानी लाल भारतीय

स्वामी दयानंद कि वैदिक विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने में हज़ारों आर्यों ने अपने अपने सामर्थ्य के अनुसार योगदान दिया। साहित्य सेवा द्वारा श्रम करने वालो ने पंडित लेखराम की अंतिम इच्छा को पूरा करने का भरपूर प्रयास किया। डॉ भवानीलाल भारतीय आर्य जगत कि महान विभूति हैं जिनका सम्पूर्ण जीवन साहित्य सेवा द्वारा ऋषि […]

इतिहास

स्वतंत्र भारत के परतंत्र इतिहास का एक विलुप्त अध्याय

भारत देश के महान इतिहास में लाखों ऐसे वीर हुए हैं जिन्होंने देश,धर्म और जाति की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। खेद है कि स्वतंत्र भारत का इतिहास आज भी परतंत्र हैं कि उसमें गौरी और गजनी के आक्रमण के विषय में तो बताया जाता हैं मगर उसका प्रतिरोध करने वाले महान वीरों […]

इतिहास धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

महर्षि दयानन्द ने समाज सुधार का कार्य क्यों चुना?

ओ३म् महर्षि दयानन्द का व्यक्तित्व सर्वांगीण था। वह मनुष्योचित सभी गुणों से सम्पन्न आदर्श महापुरूष थे। उन्होंने परतन्त्र व अज्ञानग्रस्त भारत में समाज सुधार का अविस्मरणीय एवं अपूर्व कार्य किया है। उन पर अध्ययन करते हुए हमारे मन में यह प्रश्न उत्पन्न हुआ कि उनके समाज सुधार कार्यों में प्रवृत्त होने के पीछे मुख्य कारण […]

इतिहास

अल्मोड़ा प्रकार की जनजातीय मुद्राएँ

शुंग काल में उत्तर भारत के हिमालयीय क्षेत्रों में अनेक स्थानीय शासकों का आविर्भाव होने लगा था जो अपने कबीलाई भागों के स्वतंत्र शासन का निर्भीक होकर सत्ता-सञ्चालन करने लगे| उन्होंने अपनी जनतान्त्रिक शासन–प्रणाली स्थापित करके मुद्राएँ प्रचलित कीं| इनमें राजन्य, शिवि, त्रिगर्त, औदुम्बर, यौधेय व अल्मोड़ा के शासक प्रमुख थे जिनके इतिहास का मुख्य […]

इतिहास

 टिहरी गढ़वाल से प्राप्त कुषाण कालीन स्वर्णिम मुद्राएँ

भारतीय इतिहास में सर्वप्रथम स्वर्णिम मुद्राएँ प्रचलित करने का श्रेय कुषाण शासक विम कद्फिसेज़ को है| कालान्तर में उसके उत्तराधिकारियो ने भी स्वर्णिम मुद्राओं के प्रचलन की परम्परा को अक्षुण्ण रखा| कुषाणों का साम्राज्य पश्चिमोत्तर में अफगानिस्तान से लेकर पूर्व में बिहार, उड़ीसा राज्यों तक तथा उत्तर में चीन से लेकर दक्षिण में गुजरात व […]

इतिहास

चिकित्सा में क्रांति के जनक का अन्त

सुश्रुत और चरक के बाद भारतीय चिकित्सा विज्ञान में नयी क्रांति के प्रणेता और पोषक ऊर्जा विज्ञान के जनक प्रोफेसर शिवाशंकर त्रिवेदी का विगत दिनों वाराणसी में निधन हो गया। प्रचार प्रसार से दूर इनका सारा जीवन एक कर्मयोगी की भांति सतातन आयुर्वेद के लिये पूरी तरह समर्पित था। उन्होंने मनुष्य के लिए असाध्य समझी […]

इतिहास

अपना सर्वस्व भारतमाता को समर्पित करने वाले देशभक्त वीर सावरकर

ओ३म् 132 वीं जयन्ती 28 मई पर जब हम देशभक्त महापुरूषों को याद करते हैं तो उनमें से एक अग्रणीय नाम वीर विनायक दामोदर सावरकर जी का आता है। सावरकर जी ने देश भक्ति के एक नहीं अनेको ऐसे कार्य किये जिससे यह देश हमेशा के लिए उनका ऋणी है। उनकी माता राधा बाई धन्य […]

इतिहास

भारतीय क्रांति के महानायक – वीर सावरकर

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महानायक विनायक दामोदर सावरकर का जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर ग्राम में 28 मई 1883 को हुआ था। विनायक के पिता का नाम दामोदर पन्त तथा माता का नाम राधाबाई था। सावरकर जी चार भाई – बहन थे।  वीर सावरकर न केवल स्वाधीनता संग्राम सेनानी थे अपितु वे एक […]