इतिहास

वैदिक धर्म व संस्कृति का उद्धारक, रक्षक व प्रचारक सत्यार्थ प्रकाश

ओ३म् विश्व प्रसिद्ध ‘सत्यार्थ प्रकाश’ ग्रन्थ की रचना वेदों के अपूर्व विद्वान और सभी मतों वा धर्मों के जानकार महर्षि दयानन्द सरस्वती ने सन् 1874 में की है। इसकी रचना का मुख्य कारण व उद्देश्य वेदों के विस्मृत ज्ञान का प्रकाशन व उसका संरक्षण है। महाभारत काल और महर्षि दयानन्द के काल में लगभग पांच […]

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युवाओं के प्रेरणास्रोत मिसाइलमैन डा. कलाम

हम सभी युवाओं व आम जनमानस के दिलों में राज करने वाले देश के महान कर्मयोगी भारतरत्न मिसाइलमैन के नाम से लोकप्रिय पूर्व राष्ट्रपति डा. ए पी जे अब्दुल कलाम अब हमारे बीच नहीे रहे। सुपुर्द ए खाक हो चुके दिवंगत राष्ट्रपति ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वे आज भी हम सबके बीच मौजूद […]

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इतिहास प्रदूषण और पं. लेखराम एवं वीर सावरकर के जीवन विषयक सत्य घटनाओं का प्रकाश

ओ३म् मनुष्य अल्पज्ञ है इसलिये उससे अज्ञानता व अनजाने में यदा-कदा भूल व त्रुटियां होती रहती है। इतिहास में भी बहुत कुछ जो लिखा होता है, उसके लेखक सर्वज्ञ न होने से उनसे भी न चाहकर भी कुछ त्रुटियां हो ही जाती हैं। अतः इतिहास विषयक घटनाओं की भी विवेचना व छानबीन होती रहनी चाहिये […]

इतिहास

अनगिनित यादों के झरोखे में कलाम

शिक्षाविद , दार्शनिक , वैज्ञानिक , आध्यात्मिक , संगीतज्ञ , राजनीतिज्ञ , कवि – लेखक और चिंतक भारत रत्न महामहिम राष्ट्रपति श्री अब्दुल कलाम को नमन ! मेरी उन्हें समर्पित कोटी कोटी श्रद्धांजलि …… अनगिनित यादों के झरोखे में कलाम ”बने धरती कैसे खुशहाल ” उस पल हुई सांसें बेहाल कह न पाई अपनी बात […]

इतिहास

भारतीय इतिहास की कुछ महत्वपूर्ण विस्मृत घटनाओं का प्रामाणिक उपदेश

ओ३म् प्राचीनकालीन परम्परा के अनुसार किसी व्यक्ति को ऋषि का पद तब ही प्राप्त होता था जो पूर्ण वेदज्ञानी, शास्त्रवेत्ता होने के साथ सत्य वक्ता, स्वार्थशून्य, निष्पक्ष, न्यायप्रिय व सिद्ध योगी होता था। आज इस श्रेणी के ही एक ऋषि द्वारा दिये गये भारत के इतिहास विषयक एक उपदेश का श्रवण व अध्ययन करते हैं। […]

इतिहास धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

राजा दशरथ की कूटनीति या माता कैकेयी की देशहित नीति

ओ३म् जय विजय साइट पर “दशरथ की कूटनीति” शीर्षक एक लेख प्रकाशित है। इसकी कुछ बातों पर हमें आपत्ति है। उनका वर्णन कर हम अपना निजी दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं। लेखकः-रामायण की के दो प्रमुख स्त्री पात्र है कैकयी और उसकी दासी मंथरा। रामभक्त इन दोनों पात्रो को रामायण की खलनायिका मानते हैं । […]

इतिहास

दशरथ की कूटनीति

रामायण की के दो प्रमुख स्त्री पात्र है कैकयी और उसकी दासी मंथरा , रामभक्त इन दोनों पात्रो को रामायण की खलनायिका मानते हैं । तुलसी दास जैसे भक्त तो इन से चिढ के यंहा तक लिख गए हैं ‘ बिधुहुँ न नारि हृदय गति जानी, सकल कपट अघ अवगुन खानी” । राम के कष्टो […]

अन्य लेख इतिहास

महर्षि दयानन्द, वेद प्रचार और देश को स्वतन्त्रता की प्राप्ति

ओ३म् आगामी स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त का दिन देश का स्वतन्त्रता दिवस है। सन् 1947 में इसी दिन भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति व स्वतन्त्रता मिली थी। यद्यपि यह स्वतन्त्रता है परन्तु हमें यह भी याद रखना चाहिये कि इस दिन से एक दिन पहले 14 अगस्त, 1947 को भारत का […]

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आर्यसमाज की महान विभूती- डॉ भवानी लाल भारतीय

स्वामी दयानंद कि वैदिक विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने में हज़ारों आर्यों ने अपने अपने सामर्थ्य के अनुसार योगदान दिया। साहित्य सेवा द्वारा श्रम करने वालो ने पंडित लेखराम की अंतिम इच्छा को पूरा करने का भरपूर प्रयास किया। डॉ भवानीलाल भारतीय आर्य जगत कि महान विभूति हैं जिनका सम्पूर्ण जीवन साहित्य सेवा द्वारा ऋषि […]

इतिहास

स्वतंत्र भारत के परतंत्र इतिहास का एक विलुप्त अध्याय

भारत देश के महान इतिहास में लाखों ऐसे वीर हुए हैं जिन्होंने देश,धर्म और जाति की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। खेद है कि स्वतंत्र भारत का इतिहास आज भी परतंत्र हैं कि उसमें गौरी और गजनी के आक्रमण के विषय में तो बताया जाता हैं मगर उसका प्रतिरोध करने वाले महान वीरों […]