इतिहास

प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ बलराज मधोक के पिता श्री जगन्नाथ जी का आर्यसमाज विषयक प्रेरणादायक संस्मरण

ओ३म् आर्यजगत के उच्च कोटि के विद्वान व ऋषिभक्त पंडित इन्द्रजित् देव, यमुनानगर के गुरुकुल पौंधा देहरादून के उत्सव के अवसर पर दर्शन करने और उनसे वार्तालाप करने का हमें सुअवसर मिला। उन्होंने आर्यसमाजी विचारधारा के संवाहक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ प्रोफेसर बलराज मधोक के पिता श्री जगन्नाथ जी का एक संस्करण सुनाया जिसे हम अपने सभी […]

इतिहास

मौरवी नरेश श्री वाघजी ठाकोर द्वारा ऋषि दयानन्द की प्रशंसा

ओ३म्   श्री वाघजी ठाकोर मौरवी राज्य वा रियासत के 17 फरवरी 1870 से 11 जून 1922 तक नरेश वा राजा रहे। महाराजा साहब अप्रैल, 1910 में लाहौर पधारे थे। वहां महाराजा से सनातन धर्म सभा का एक डेपुटेशन मिला और प्रार्थना की कि वे सतातनधर्मी होने के कारण दयानन्द के मत अर्थात् आर्यसमाज से […]

इतिहास

सद्धर्म प्रचारक वैदिक विद्वान महाशय चिरंजीलाल ‘प्रेम’

ओ३म् महर्षि दयानन्द की जीवन ज्योति ने देश में अनेक नये जीवन दीपों को प्रज्जवलित किया था जिसका परिणाम धार्मिक और सामाजिक क्रान्ति सहित देश की परतन्त्रता के निवारण के रूप में सामने आया। अन्य अनेक कार्य भी महर्षि दयानन्द द्वारा वेदों के ज्ञान के प्रचार से देश में सम्पन्न हुए जिससे वैदिक धर्म संसार […]

इतिहास धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

विदेशों में भारतीयों की स्थिति और आर्यसमाज

ओ३म् ———————————————————————– यह लेख आर्यजगत के विद्वान स्व. श्री क्षितीज वेदालंकार जी का है जो उन्होंने 19 अक्तूबर 1980 को प्रकाशित साप्ताहिक आर्यजगत, दिल्ली के ‘विदेश प्रचार और लन्दन आर्य महासम्मेलन विशेषांक’ में सम्पादकीय के रूप में लिखा था। इस लेख की अनेक बातें ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण एवं जानने योग्य है। इसकी महत्ता के […]

इतिहास

पं. विष्णुलाल शर्मा द्वारा ऋषि दयानन्द के दर्शन का वृतान्त

ओ३म् पं. विष्णुलाल शर्मा उत्तर प्रदेश में अवकाश प्राप्त सब जज रहे। स्वामी दयानन्द जब बरेली आये तब 11 वर्ष की अवस्था में पं. विष्णुलाल शर्मा जी ने वहां उनके दर्शन किए थे। उन्होंने इसका जो प्रमाणित विवरण स्वस्मृति से लेखबद्ध किया उसका वर्णन कर रहे हैं। वह लिखते हैं कि श्री स्वामी दयानन्द जी […]

इतिहास सामाजिक

शहीद भगत सिंह के दादा सरदार अर्जुन सिंह और ऋषि दयानन्द

ओ३म्   देश की गुलामी को दूर कर उसे स्वतन्त्र कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद भगत सिंह के पिता का नाम सरदार किशन सिंह और दादा का नाम सरदार अर्जुन सिंह था। सरदार अर्जुन सिंह जी ने महर्षि दयानन्द के साक्षात दर्शन किये थे और उनके श्रीमुख से अनेक उपदेशों […]

इतिहास

कोहिनूर हीरा पुरी जगन्नाथ जी की सम्पत्ति है

ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार गोलकुंडा की खान से निकला विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा काकतीय राजाओं की सम्पत्ति हुआ करता था। अलाउद्दीन खिलजी ने इसे लूट लिया था और कालांतर में यह मुगलों से होते हुए आक्रांता नादिरशाह के पास पहुंचा। पर्सिया के नादिरशाह ने मयूर सिंहासन के साथ कोहिनूर हीरा भी लूट लिया था। नादिरशाह की मृत्यु के बाद महाराजा रणजीत […]

इतिहास

महर्षि दयानन्द के योग शिष्य स्वामी लक्ष्मणानन्द

ओ३म् विस्मृत व्यक्तित्व स्वामी लक्ष्मणानन्द जी ने स्वामी दयानन्द की अमृतसर यात्रा में उनसे योग सीखा था और उसके बाद उन्होंने योगाभ्यास व इसकी शिक्षा को ही अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाया प्रतीत होता है।  आप आर्यजगत के विख्यात विद्वान पं. भगवद्दत्त रिसर्चस्कालर के भी गुरू रहे। ‘ध्यान योग प्रकाश’ आपकी योग पर महत्वपूर्ण […]

इतिहास

वैदिक विद्वान पं. भगवदत्त रिसर्चस्कालर और उनकी ग्रन्थ सम्पदा

ओ३म् पण्डित भगवद्दत्त रिसर्चस्कालर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से वर्तमान पीढ़ी के मित्रों को परिचत कराने का विचार आया जिसका परिणाम  आज का हमारा यह संक्षिप्त विवरण व लेख है। पं. भगवद्दत्त जी आर्यसमाज में वेद एवं वैदिक विषयों पर आधुनिक विज्ञान की सहायता से शोध के प्रवर्तक थे। आपका जन्म वर्तमान पंजाब के अमृतसर में […]

इतिहास

पं. लोकनाथ तर्कवाचस्पति की ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज भक्ति

ओ३म् आर्यसमाज के भूले बिसरे विद्वान आर्यसमाज की दूसरी पीढ़ी के प्रचारकों में अद्वितीय शास्त्रार्थ महारथी, तर्कपटु तथा वाग्मी पं. लोकनाथ तर्कवाचस्पति का नाम  अन्यतम है। आर्यसमाज की 10 अप्रैल, सन् 1875 को स्थापना के कुछ वर्ष बाद आपका जन्म कोट अद्दे जिला मुजफ्फरगढ़ (पाकिस्तान) में हुआ था। आपका अध्ययन मुलतान (पाकिस्तान) तथा उसके बाद […]