इतिहास

स्वामी दयानंद एवं चित्तौड़

स्वामी दयानंद अपने चित्तौड़ भ्रमण के समय चित्तोड़ के प्रसिद्द किले को देखने गए। किले की हालत एवं राजपूत क्षत्राणियों के जौहर के स्थान को देखकर उनके मुख से निकला कि अगर ब्रह्मचर्य की मर्यादा का मान होता तो चित्तौड़ का यह हश्र नहीं होता। काश चित्तौड़ में गुरुकुल की स्थापना हो जिससे ब्रह्मचर्य धर्म का प्रचार हो […]

इतिहास लेख

करवा-चौथ के बारे में

पूरी दुनिया की पत्नियां इस व्रत को क्यों नहीं रखती यदि यह पति की जीवन रक्षा का सबसे बड़ा मसअला है? क्या वे पत्नियां जिन्होंने यह व्रत रखा है, विधवा नहीं होती। यानि पत्नी पहले मरती है और पति बाद में? माने यदि पत्नियां अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती है तो […]

इतिहास

स्वामी श्रद्धानंद बलिदान भवन

यह है दिल्ली का स्वामी श्रद्धानंद बलिदान भवन। पुरानी दिल्ली के नया बाजार में इस भवन की हालत देखकर आर्यसमाजियों को शर्म आनी चाहिए कि उनके महान नेता का स्मारक इतनी बदहाली में हैं। एक दूसरे से मतभेद के चलते अपनी प्राचीन विरासत को युवा पीढ़ी को सौपने में भी ये नाकाम हैं। मैंने यह […]

इतिहास

स्वामी श्रद्धानन्द एवं शुद्धि आंदोलन

आधुनिक भारत में “शुद्धि” के सर्वप्रथम प्रचारक स्वामी दयानंद थे तो उसे आंदोलन के रूप में स्थापित कर सम्पूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने वाले स्वामी श्रद्धानन्द थे। सबसे पहली शुद्धि स्वामी दयानंद ने अपने देहरादून प्रवास के समय एक मुस्लमान युवक की करी थी जिसका नाम अलखधारी रखा गया था। स्वामी जी के निधन […]

इतिहास

स्वदेशी आंदोलन के प्रथम शहीद बाबू गेनू

12 दिसम्बर1930 का दिन भारत के स्वदेशी आंदोलन का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और महात्मा गांधी केे स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन से प्रेरित होकर बाबू गेनू कांग्रेस को चार आने देने वाला सदस्य था। जो विदेशी वस्तुओं से भरी लारी को रोकते हुए शहीद हो गया और स्वदेशी आहावन के लिए […]

इतिहास ब्लॉग/परिचर्चा

हमारा प्राचीन देश आर्यावर्त व भारत

हमारे देश का संविधान सम्मत नाम “भारत” है। अंग्रेजी में इसे इण्डिया कहते हैं। प्राचीन नाम जो भारत से भी पुराना है वह आर्यावर्त है। सृष्टि के आदि में आर्यों द्वारा इसे बसाये जाने और उनके यहां रहने के कारण इसका नाम आर्यावर्त था। आर्यावर्त से पूर्व इस देश का अन्य कोई नाम नहीं था […]

इतिहास

गैर हिन्दुओ का पुन: हिन्दू धर्म में वापसी – एक छलावा

हिन्दू दल उत्साहित हैं की उनके प्रयासों से कुछ गैर हिन्दू परिवार फिर से धर्म पतिवर्तन कर के हिन्दू बन गए। यह अच्छी बात है , संविधान ने सभी को यह अधिकार देता है की भारत का कोई भी नागरिक अपनी इच्छा अनुसार धर्म चुन सकता है। पर चुकी हिन्दू धर्म वर्ण/ जाति आधारित है […]

इतिहास

स्वामी दयानंद का इतिहास चिंतन

7 दिसंबर, हिंदुस्तान टाइम्स, दिल्ली संस्करण में RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) द्वारा इतिहास के पाठ्यकर्म में परिवर्तन को लेकर लेख छपा हैं। पाठक इस तथ्य से भली भांति परिचित हैं कि सरकार के इस कदम का वामपंथी विचारधारा से सम्बंधित लोग अलग अलग तर्क देकर विरोध कर रहे हैं। संघ का यह कदम स्वागतयोग्य हैं। […]

इतिहास

दिल्ली का शिव मंदिर सत्याग्रह

आज एक अपने आपको सनातनी कहने वाले अज्ञानी व्यक्ति सुरेंदर सिंह ने स्वामी दयानंद की तुलना मुहम्मद गजनवी से यह कहकर करी की दोनों ने शिवलिंग तोड़े थे। सबसे पहले तो स्वामी दयानंद ने हिन्दू समाज में फैली अन्धविश्वास रूपी गली सड़ी मानसिकता को छोड़ने का आवाहन किया था। दूसरे स्वामी जी ने मनुष्य की […]

इतिहास

डॉ राजेंद्र प्रसाद के विचारों को आत्मसात किया जाए

देश के प्रथम राष्ट्रपति डा- राजेंद्र प्रसाद राष्ट  के सर्वांगीण विकास के लिए अच्छे नागरिकों को अत्यावश्यक मानते थे। उनकी सोच यही थी कि किसी भी राष्टरू के लिए सबसे महत्वपूर्ण है चरित्र। आज जब देश में हर तरफ भ्रष्टाचार और घोटाले का अनुनाद सुनाई पड़ रहा है। ऐसे में डा राजेंद्र प्रसाद के विचार और भी प्रासंगिक नजर आते […]