इतिहास

सृष्टि का काल चक्र

आधुनिक वैज्ञानिक अब कहते हैं कि हमारी सृष्टि में अनगिनत ग्रह प्रति दिन पैदा हो रहे है और कई ग्रह अपना समय पूरा कर के विलीन हो रहै हैं – लेकिन हिन्दूग्रंथ तो आधुनिक वैज्ञानिकों से हजारों वर्षों पहले से ही कहते आ रहै हैं कि सृष्टि अनादि है – उस का कोई आरम्भ नहीं, […]

इतिहास

प्रेरक यशस्वी सामाजिक जीवन: श्री भोपाल सिंह आर्य

आर्यत्व के गुणों के धनी और ऋषि दयानन्द में अगाध श्रद्धा व निष्ठा रखने वाले श्री भोपाल सिंह आर्य का जीवन उनकी प्ररेणादायक समाज सेवा के कारण धन्य है। श्री आर्य करनाल हरियाणा में निवास करते हैं और यहां की आर्य समाजों की सामाजिक गतिविधियों के प्रमुख स्तम्भ हैं। आपका  जन्म देहरादून के एक स्थान […]

इतिहास

भूत तथा भविष्य के द्रष्टा महर्षि दयानन्द

हमने लेख का यह शीर्षक इसलिए चुना है कि यह महर्षि दयानन्द पर सटीक बैठता है अर्थात् वह भूत व भविष्य के द्रष्टा थे। इसे हम आगामी पंक्तियों में बताने का प्रयास करते हैं। इससे पूर्व कि हम महर्षि दयानन्द के गुणों के बारे में बतायें उनका संक्षिप्त परिचय जान लेना आवश्यक है। महर्षि दयानन्द […]

इतिहास

श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-७

प्रत्येक मनुष्य, मनुष्य ही नहीं प्रत्येक जीवात्मा में ईश्वर का अंश है। प्रकृति की प्रत्येक कृति ईश्वर की उपस्थिति की अनुभूति कराती है। प्रत्येक मनुष्य ईश्वर का ही अवतार या रूप है, समस्या सिर्फ स्वयं को पहचानने की है। प्रत्येक मनुष्य में ईश्वरत्व प्राप्त करने की क्षमता होती है। गीता के माध्यम से श्रीकृष्ण ने […]

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श्रीमद्भगवद्गीता और छद्म धर्मनिरपेक्षवादी – चर्चा-६

छद्म धर्मनिरपेक्षवादियों का श्रीमद्भगवद्गीता पर एक आरोप यह भी है कि गीता जाति-व्यवस्था को न सिर्फ स्वीकृति देती है, वरन्‌ इसे ईश्वरीय भी मानती है। अपने समर्थन में वे गीता के अध्याय चार के निम्न श्लोक का उद्धरण देते हैं –       चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः।                         तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्‌॥       “चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं” […]

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स्वामी दयानंद एवं चित्तौड़

स्वामी दयानंद अपने चित्तौड़ भ्रमण के समय चित्तोड़ के प्रसिद्द किले को देखने गए। किले की हालत एवं राजपूत क्षत्राणियों के जौहर के स्थान को देखकर उनके मुख से निकला कि अगर ब्रह्मचर्य की मर्यादा का मान होता तो चित्तौड़ का यह हश्र नहीं होता। काश चित्तौड़ में गुरुकुल की स्थापना हो जिससे ब्रह्मचर्य धर्म का प्रचार हो […]

इतिहास लेख

करवा-चौथ के बारे में

पूरी दुनिया की पत्नियां इस व्रत को क्यों नहीं रखती यदि यह पति की जीवन रक्षा का सबसे बड़ा मसअला है? क्या वे पत्नियां जिन्होंने यह व्रत रखा है, विधवा नहीं होती। यानि पत्नी पहले मरती है और पति बाद में? माने यदि पत्नियां अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती है तो […]

इतिहास

स्वामी श्रद्धानंद बलिदान भवन

यह है दिल्ली का स्वामी श्रद्धानंद बलिदान भवन। पुरानी दिल्ली के नया बाजार में इस भवन की हालत देखकर आर्यसमाजियों को शर्म आनी चाहिए कि उनके महान नेता का स्मारक इतनी बदहाली में हैं। एक दूसरे से मतभेद के चलते अपनी प्राचीन विरासत को युवा पीढ़ी को सौपने में भी ये नाकाम हैं। मैंने यह […]

इतिहास

स्वामी श्रद्धानन्द एवं शुद्धि आंदोलन

आधुनिक भारत में “शुद्धि” के सर्वप्रथम प्रचारक स्वामी दयानंद थे तो उसे आंदोलन के रूप में स्थापित कर सम्पूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने वाले स्वामी श्रद्धानन्द थे। सबसे पहली शुद्धि स्वामी दयानंद ने अपने देहरादून प्रवास के समय एक मुस्लमान युवक की करी थी जिसका नाम अलखधारी रखा गया था। स्वामी जी के निधन […]

इतिहास

स्वदेशी आंदोलन के प्रथम शहीद बाबू गेनू

12 दिसम्बर1930 का दिन भारत के स्वदेशी आंदोलन का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और महात्मा गांधी केे स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन से प्रेरित होकर बाबू गेनू कांग्रेस को चार आने देने वाला सदस्य था। जो विदेशी वस्तुओं से भरी लारी को रोकते हुए शहीद हो गया और स्वदेशी आहावन के लिए […]