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मन की स्वच्छंदता

प्राचीन उपवास में उपवासवाले दिन से एक दिन पहले ‘अरवा’ यानी बिना नमक के ‘अरवा’ भोजन ही किये जाते थे, फिर उपवासवाले दिन ‘सूर्यास्त’ तक जल तक ग्रहण किए बिना उपवास रहते थे यानी निर्जला, फिर उपवास फलाहार से तोड़ते थे ! अब डिजिटल उपवास हो गया है… स्त्रियाँ घर में काम के डर से […]

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एक ठो लाइफबॉय साबुन !

क्या यह सोचना उचित होगा कि आने वाली हर पीढ़ी बाबा साहब का अंधानुकरण ही करें या मान्यवर कांशीराम के मार्ग पर ही चले ? समाज के विकास की सतत प्रक्रिया होती है, इसलिए नए तथ्यों के आलोक में हमेशा नई रणनीति के साथ ही कुछ नया करना पड़ता है। बाबा साहब ने महामना ज्योतिबा […]

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अनुत्तरित अंतर्द्वंद्व !

भूदाता के नाम हटाकर इसतरह के नामकरण उचित नहीं है! महान शहीद और उनके परिवार को सादर नमन करते हुए ‘उच्च विद्यालय, मिर्जापुर-बघार’ का नामकरण उनके नाम से हो, तो श्रेयस्कर होगा! क्या ‘रामेश्वर यादव मनिहारी महाविद्यालय’ पर भूदाता मानेंगे? सादर नमन! ×××× महात्मा गाँधी सदैव ‘प्रासंगिक’ है, किन्तु इसका मतलब यह नहीं है कि […]

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अल्बर्ट आइंस्टीन और मेरी ‘आजुक’ डायरी

विश्व धरोहर दिवस (वर्ल्ड हेरिटेज डे) की शुभमंगलकामनाएँ ! ×××× 2020 के लॉकडाउन में पूर्व PM और पूर्व CM के द्वारा शादी-समारोह का आयोजन हुआ ! [साभार : दै. जागरण/18.04.’20] शादी की इतनी जल्दबाजी क्यों ? जब लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग (वर्ष 2020) है, तब पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री ने इसका उल्लंघन कर ‘कोरोना’ […]

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असत्यक समाज के फ़रेब में

“असत्यक, भ्रष्टक, हिंसक, फरेबी जैसे बेटे –  बेटियों के लिए अनशन करते – करते थक जाते, किन्तु समस्या जस की तस लगी और बनी रहती और आप पल – पल परेशान हो उठते ! ….तो कहिये, क्या दूँ मैं ? सिर्फ मैं अपनी हताशा का चिरागभर जलाने के सिवाय !” वाकई में जो सरकारी सौजन्य […]

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मन की बात में स्वदेशी सकोरे

‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाइनीज खिलौने व पुतलों पर अप्रत्यक्ष तरीके से रोक लगाते हुए स्वदेशी खिलौने बनाने पर जोर दिए हैं । फिर तो कुम्हारगिरी से तैयार मिट्टी के खिलौने, सकोरे, बत्तखें, मोर, वकील, ढोलकिया, गुड़िया, डांसर इत्यादि की भी मार्केटिंग हो, क्योंकि यह कला तो भारत की देन है। […]

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शुभो नबो बरसो

बांग्ला नववर्ष की शुभमंगलकामनायें…. बंग संस्कृति में साल के अंतिम चैत्र ‘संक्रांति’ के बाद 15 अप्रैल को वैशाख माह आरम्भ है और इस अनुसार से वैशाख ही साल का प्रथम माह है, आज पहला दिन है। हमारा गाँव है तो बिहार में, किन्तु ‘बांग्ला – कीर्त्तन’ का यहाँ प्रभाव है । आज नववर्ष का प्रथम […]

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बाधक शत्रु हमारे कल्याणकारी मार्ग से दूर हों

ओ३म् आचार्य डा. रामनाथ वेदालंकार जी वेदों को समर्पित अत्यन्त उच्च कोटि के विद्वान थे। उन्होंने जीवन भर वेद सेवा की है। अपने वेदों के प्रौढ़ ज्ञान से उन्होंने वेदों पर बड़ी संख्या में उच्च कोटि के ग्रन्थ लिखे हैं। उन्होंने सामवेद का संस्कृति व हिन्दी सर्वोत्तम भाष्य किया है जो वैदिक विद्वानों में समादृत […]

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हरदेव बाहरी और रोजनामचे

डॉ. हरदेव बाहरी की पुण्यतिथि (31 मार्च) पर सादर श्रद्धांजलि ! डॉ. बाहरी का जन्म अटक जिला (अब पाकिस्तान) में हुआ था, जिनकी लगभग 40 पुस्तकें हैं। वे एकसाथ कई भाषाएँ जानते थे तथा कई उच्च डिग्रियाँ हासिल की और कई विश्वविद्यालयों में अध्यापन किया । हिंदी भाषा के वैज्ञानिक  डॉ. हरदेव बाहरी की पुण्यतिथि […]

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होली खेलिए, होली को जलाइये मत ! 

एक पतिभक्तिन नारी को देवी मान उनके प्रति सम्मान और आदर्श दिखा सकते हैं, किन्तु एक अन्य भ्रातृभक्तिन नारी (होलिका) को प्रतिवर्ष जलाते हैं और उसे पीड़ा देकर खुशियों के रंगों का महापर्व ‘होली’ मनाने लग जाते हैं, क्यों ? होली के स्मरण में होली मनाइये, न कि प्रतिवर्ष होली को जलाकर। होली में प्रयोग होनेवाले दो महत्वपूर्ण […]