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वैदिक कालीन हमारे प्राचीन सभी ऋषि-मुनि-आचार्य वैज्ञानिक थे

भारत का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी की हमारी इस पृथिवी की आयु व इस पर प्राणी जीवन है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार पृथिवी का निर्माण होकर इस पर आज से 1,96,08,53,115 वर्ष पहले मनुष्यों की उत्पत्ति वा उनका आविर्भाव हुआ था। सृष्टि की उत्पत्ति के पहले ही दिन ईश्वर ने बड़ी संख्या में […]

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आधुनिक कथा साहित्य और जीवन की वास्तविकता

कहा जाता है कि ’यथार्थ को संजोते हुए जीवन की वास्तविकता का चित्रण कर समाज की गतिशीलता को बनाये रखने का मर्म ही कहानी है।’ लेकिन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है आधुनिक कथा साहित्य, क्योंकि जीवन की वास्तविक तत्यों से कुछ हटकर ही आधुनिक कथा साहित्य ने रुप धारण कर लिया है। […]

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कर्नाटक में हिन्दी की स्थितिगति

कर्नाटक राज्य दक्षिण भारत का एक बडा राज्य है। इसका भू विस्तार 1,91,756 च.कि.मी. है। यहाँ की आबादी लगभग 6 करोड से भी ज्यादा है, और साक्षरता का प्रमाण 75 प्रतिशत से भी ज्यादा है। जनसंख्या की दृष्टि से भारत में नौवा स्थान और भौगोलिक दृष्टि से सातवाँ स्थान प्राप्त है। औअर कर्नाटक चंदन एवं […]

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सर्वोच्च न्यायालय का अहंकार

चेन्नई उच्च न्यायालय के कुछ अवैध निर्माणों को ढहाने के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। मामला सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे की पीठ में आया। न्यायमूर्ति दवे ने अपने फ़ैसले में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर चेन्नई उच्च न्यायालय के निर्णय पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि […]

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जनम दिन तुमारा प्रेम पत्तर हमारा

(२५ दसंबर को मेरी अर्धांग्नी का जनम दिन था . यह तोहफा मैं ने उस दिन अपनी अर्धांग्नी को दिया था ) पियारी बीवी , 25 दिसंबर को क्रिसमस डे भी है और तुम्हारा जन्मदिन भी. तुम 68 साल की हो जाओगी और मैं भी अप्रैल में 72 वर्ष का हो जाऊंगा. तुम सोचोगी, कि […]

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स्वामी श्रद्धानन्द द्वारा रचित “हिन्दू संगठन”

स्वामी श्रद्धानन्द द्वारा रचित “हिन्दू संगठन” अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तक हैं जिसे पढ़ कर हिन्दू समाज को संगठन की क्यों आवश्यकता है यह ज्ञात होता है। 1920 के दशक में मज़हबी उन्माद के चलते देश में अनेक स्थानों पर दंगे हुए जिनमें हिन्दू समाज का बहुत नुक्सान हुआ। महात्मा गांधी ऐसे विकट समय में मुसलमानों की […]

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खाँसी का सरल इलाज

हमारी दादी प्रायः एक कहावत सुनाया करती थी- ‘लड़ाई कौ घर हाँसी, रोग कौ घर खाँसी’ अर्थात् “हँसी-मजाक करना लड़ाई-झगड़े का मूल होता है और खाँसी रोगों का मूल होता है।” यह कहावत सवा सोलह आने सत्य है। यदि हमें लड़ाई-झगड़े से बचे रहना है, तो लोगों का मजाक उड़ाने से बचना चाहिए और यदि […]

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बाल साहित्य और भाषा शिक्षण

बाल साहित्य और भाषा शिक्षण -मनोहर चमोली ‘मनु’ बाल साहित्य से शिक्षण कार्य हो सकता है। यह भाषा का शिक्षक तो जानता भी है और अक्सर वह अपने वादन में पाठ्य पुस्तक से इतर के बाल साहित्य की चर्चा करता भी है। मैंने कक्षा सात और आठ के बच्चों को कुछ बाल कविताएँ पढ़ने को […]

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बालसाहित्य : यथार्थ एवं कल्पना

आपकी ही तरह मैंने भी बचपन में सैकड़ों कहानियाँ सुनी हैं। यह याद तो नहीं कि मैंने कैसे पढ़ना-लिखना सीखा। हाँ इतना याद है कि जब पढ़ना-लिखना सीख लिया तो अनगिनत कहानियाँ पढ़ने को मिली। मुझे अच्छी तरह से याद है कि बचपन में ही मैंने रेल, समुद्र, गिलहरी, हाथी और जहाज के दर्शन कहानियों […]

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कब्ज की सरल चिकित्सा

आकस्मिक दुर्घटनाओं को छोड़कर सभी रोगों की माता पेट की खराबी कब्ज है। इसमें मलनिष्कासक अंग कमजोर हो जाने के कारण शरीर से मल पूरी तरह नहीं निकलता और आँतों में चिपककर एकत्र होता रहता है। अधिक दिनों तक पड़े रहने से वह सड़ता रहता है और तरह-तरह की शिकायतें पैदा करता है तथा बड़ी […]