Category : लेख




  • मैं आस्तिक क्यों हूँ? (भाग – २)

           धर्म और मत/मजहब में अंतर क्या हैं? यह समझने की आवश्यकता हैं। मज़हब अथवा मत-मतान्तर के अनेक अर्थ हैं। मत का अर्थ हैं वह रास्ता जो स्वर्ग और ईश्वर प्राप्ति का हैं जोकि उस मत अथवा...



  • मैं आस्तिक क्यों हूँ? (भाग – १)

    एक नया नया फैशन चला हैं अपने आपको नास्तिक यानि की atheist कहलाने का जिसका अर्थ हैं की मैं ईश्वर की सत्ता, ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं रखता। अलग अलग तर्क प्रस्तुत  किये जाते हैं जैसे अगर ईश्वर हैं...