इतिहास

आर्य भारत के मूल निवासी थे

अभी हाल में ही समाचारों में कुछ वक्तव्य पढ़कर कि अगडी जातियां आर्य हैं जो भारत में बाहर से आये, मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि हम आज़ादी के इतने वर्ष बाद तक एवं इतने विकास के पश्चात भी वहीं के वहीं हैं एवं अभी तक अज्ञान जनित पुरातन योरोपीय ज्ञान एवं भ्रांत अवधारणाओं में जी […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मैं और मेरा परमात्मा

एक शाश्वत प्रश्न है कि मैं कौन हूं। माता पिता जन्म के बाद से अपने शिशु को उसकी बौद्धिक क्षमता के अनुसार ज्ञान कराना आरम्भ कर देते हैं। जन्म के कुछ समय बाद से आरम्भ होकर ज्ञान प्राप्ति का यह क्रम  विद्यालय, महाविद्यालय आदि से होकर चलता रहता है और इसके बाद भी नाना प्रकार […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति

बाल दिवस और चाचा नेहरू

(उनकी १२५ वीं जन्मोत्सव पर विशेष) अपने देशवासियों से मुझे इतना प्यार और आदर मिला कि मैं इसका अंश मात्र भी लौटा नहीं सकता और वास्तव में इस अनमोल प्रेम के बदले कुछ लौटाया जा भी नहीं सकता… इससे मैं भाव-विभोर हो गया हूँ| – पंडित जवाहर लाल नेहरू की आखिरी वसीयत से पंडित जवाहर […]

राजनीति

नेहरुजी को श्रद्धांजलि

आज (14 नवम्बर को) भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्व. जवाहर लाल नेहरू की १२५वीं जयन्ती है। भारत सरकार अधिकृत रूप से इसे आज मना रही है और नेहरूजी की विरासत पर अपना एकाधिकार माननेवाली सोनिया कांग्रेस ने इसे एक दिन पहले ही मना लिया। लोक-परंपरा का निर्वाह करते हुए मैं भी सोच रहा हूं कि […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा

नास्तिकता बनाम् आस्तिकता

हमारे देश व समाज में कुछ बन्धु स्वयं को नास्तिक कहते हैं। उनसे पूछिये कि नास्तिक का क्या अर्थ होता है तो वह कहते हैं कि हम ईश्वर और जीवात्मा के अस्तित्व को नहीं मानते। यदि उनसे पूछा जाये कि क्या आपने ईश्वर व जीवात्मा से सम्बन्धित उपलब्ध सभी साहित्य का अनुसंधानात्मक अध्ययन किया है […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा

मनुस्मृति का सर्वग्राह्य शुद्ध स्वरूप

समस्त वैदिक साहित्य में मनुस्मृति का प्रमुख स्थान है। जैसा कि नाम है मनुस्मृति मनु नाम से विख्यात महर्षि मनु की रचना है। यह रचना महाभारत काल से पूर्व की है। यदि महाभारत काल के बाद की होती तो हमें उनका जीवन परिचय कुछ या पूरा पता होता जिस प्रकार विगत 5,000 वर्षों में हुए […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आयुष्काम (महामृत्युंजय) यज्ञ और हम

सभी प्राणियों को ईश्वर ने बनाया है। ईश्वर सत्य, चेतन, निराकार, सर्वव्यापक, सर्वान्तरयामी, सर्वातिसूक्ष्म, नित्य, अनादि, अजन्मा, अमर, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान है। जीवात्मा सत्य, चेतन, अल्पज्ञ, एकदेशी, आकार रहित, सूक्ष्म, जन्म व मरण धर्मा, कर्मों को करने वाला व उनके फलों को भोगने वाला आदि स्वरूप वाला है। संसार में एक तीसरा एवं अन्तिम पदार्थ प्रकृति […]

राजनीति

योजना आयोग की समाप्ति

श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने विगत दिनों दो ऐतिहासिक निर्णय लिए | सरकार बनने के तुरंत बाद उन्होंने योजना आयोग को समाप्त करने का फैसला किया | उसी कड़ी में पिछले सप्ताह केन्द्रीय सरकार के सचिवालय में संयुक्त सचिव तथा अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारियों की संविदा नियुक्ति का निर्णय किया | निश्चित रूप […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वेदों जैसा कोई ग्रन्थ नहीं

वेदों के सामने अन्य मजहबी ग्रन्थ तुच्छ हैं—- (1.) डार्विन नामक ईसाई ने कहा :—- दूसरों के अनाज को खाकर जिओ । हक्सले व भगवान महावीर ने कहा :— जीओ और जीने दो । परंतु वैदिक साहित्य ने कहा :— सबको सुखी बनाने के लिए जीओ, सर्वे भवन्तु सुखिनः (2.) बाइबिल ने कहा :—- जिसका […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर व जीवात्मा के अस्तित्व के प्रमाण

बच्चा जब संसार में जन्म लेता है तो वह न तो अपनी भावना को बोल कर कह सकता है और न अपने आप उठ-बैठ सकता है, चलना फिरना तो उसका कई महीनों व एक वर्ष का हो जाने पर आरम्भ होता है। माता-पिता बच्चे को बोलना सिखाते हैं, उठना-बैठना व चलना-फिरना सिखाते हैं। इस परम्परा […]