राजनीति

कांग्रेस के क्या लगते हैं राबर्ट वाड्रा

सत्ता चली गई लेकिन नशा नहीं गया। राबर्ट वाड्रा ने एक सवाल के जवाब में पत्रकार के साथ बदसलूकी की, उसका कैमरा फेंक दिया। जो भी हुआ, उसपर माफ़ी मांगने की नैतिक जिम्मेदारी स्वयं वाड्रा की थी। उसके बाद यह जिम्मेदारी क्रमवार प्रियंका, सोनिया और राहुल की बनती है क्योंकि वाड्रा उनके परिवार के अंग […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति

एकता की दौड़ और फडणवीस की ताजपोशी

३१ अक्टूबर सरदार वल्लभ भाई पटेल की १३९ वीं जयंती पर प्रधान मंत्री द्वरा घोषित एकता की दौड़ (रन फॉर यूनिटी) की शुरुआत हुई. पूरा देश एकता के लिए दौड़ा. प्रतीकात्मक शुरुआत दिल्ली में विजय चौक से इंडिया गेट तक प्रधान मंत्री के साथ हुई जिसे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी झंडा दिखाकर औपचारिकता पूरी […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

शारीरिक हाव भाव और मानव का स्वभाव और प्रवृत्ति

अक्सर कहा जाता है कि  सच या झूठ इन्सान के चेहरे से नहीं पहचाना  जा सकता है।  किसी के चेहरे पर तो लिखा नहीं होता कि वह कैसा इन्सान है। लेकिन मशहूर ज्योतिष पवन सिन्हा के अनुसार हर इन्सान को थोड़ा ज्योतिष , थोड़ा आयुर्वेद और थोड़ा मनोविज्ञान तो आना ही चाहिए। मेरे विचार में […]

लेख सामाजिक

सुपरसितारों की छवि और सामान्य जनमानस…

वास्तव में आपकी जो छवि मीडिया पेश करती है, लोगों की नजरों में आप वैसे ही बन जाते हैं! अधिकतर सुपरसितारों की हमारे देश में यही दशा रही है कि उनकी जो छवि सामाजिक जीवन में रही है, असल में वो आगे चलकर खोखली ही निकली है, शाहरुख़ खान हो या अमिताभ बच्चन इनकी कोई […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा

स्वामी दयानंद और मेक्समुलर के वेद भाष्यों का तुलनात्मक अध्ययन

शंका- जब मेक्समूलर आदि पश्चिमी विद्वानों के वेद भाष्य उपलब्ध थे तो स्वामी दयानंद द्वारा नवीन वेद भाष्य करने जैसा श्रमसाध्य कार्य क्यों किया गया? समाधान- इस शंका का समाधान स्वामी दयानंद और मेक्समुलर के वेद भाष्यों का तुल्नात्मक अध्ययन से भली भांति होता हैं। वेद शब्द का वर्णन होते ही आज के नौजवान या […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वेदाविर्भाव और वेदाध्ययन की परम्परा पर विचार

सृष्टिकाल के आरम्भ से देश में अनेक ऋषि व महर्षि उत्पन्न हुए हैं। इन सबकी श्रद्धा व पूरी निष्ठा ईश्वरीय ज्ञान वेदों में रही है। यह वेद सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर द्वारा हमारे अमैथुनी सृष्टि में उत्पन्न चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य व अंगिरा को उनकी आत्मा में अपने आत्मस्थ स्वरूप से प्रेरणा द्वारा […]

सामाजिक

और अभिशाप को वरदान मानकर लपक लिया हमने  

हमारे यहां बचपन से ही बच्चों को अपने से बड़ों के अभिवादनस्वरूप चरणस्पर्श या हाथ जोड़कर नमस्कार करने के संस्कार देने का चलन रहा है I चरणस्पर्श या झुकने से भीतर क्या क्या परिवर्तन होते हैं या हाथ जोड़ने से शरीर के ऊर्जा प्रवाह में क्या परिवर्तन होता है तथा हाथ मिलाने से दूसरे व्यक्ति […]

इतिहास

करोड़ो देशवासियों के आदर्श एवं प्रेरणास्रोत सरदार पटेल

“माता भूमि पुत्रो अहं पृथिव्या” इस वेद की सूक्ति में निहित मातृभूमि की सेवा व रक्षा की भावना से सराबोर देश की आजादी के अविस्मरणीय योद्धा, देश के प्रथम गृहमंत्री एवं उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने देश की आजादी और और उसकी उन्नति के लिए जो सेवा की है, वह इतिहास में स्वर्णाक्षरों में […]

इतिहास

महात्मा नारायण स्वामी का आदर्श जीवन : प्रेरणाप्रद एवं अनुकरणीय

महर्षि दयानन्द द्वारा प्रस्तुत आर्य विचारधारा में वह प्रभाव व शक्ति है जिसका अनुकरण व अनुसरण करने पर एक सामान्य व्यक्ति दूसरों के लिए आदर्श प्रस्तुत कर देश, धर्म एवं समाज की सर्वोत्तम सेवा करने के साथ उनका प्ररेणास्रोत बनकर स्वयं के जीवन को धन्य बना सकता है। यह शब्द महात्मा नारायण स्वामी के जीवन […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

श्रेष्ठ मानव जीवन का आधार : वैदिक संस्कार

संस्कार की चर्चा तो सभी करते व सुनते हैं परन्तु संस्कार का शब्दार्थ व भावार्थ क्या है? संस्कार किसी अपूर्ण, संस्काररहित या संस्कारहीन वस्तु या मनुष्य को संस्कारित कर उसका इच्छित लाभ लेने के लिए गुणवर्धन या अधिकतम मूल्यवर्धन value addition करना है। यह गुणवर्धन व मूल्यवर्धन भौतिक वस्तुओं का किया जाये तो वैल्यू एडीसन […]