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शिक्षक से जुड़ा होता है, विद्यार्थी का बचपन का कोना |

शिक्षक से जुड़ा होता है, विद्यार्थी का बचपन का कोना | सपना का लड़का अयांश अब एक साल का हो गया था| उसके जन्मदिन का न्योता हमे भी मिला था| मैं और मेरी बेहन साक्षी हम दोनों अयांश के लिए कुछ तोहफा लेने दुकान गए थे| अब एक साल के बच्चे के लिए खिलौनें से […]

भाषा-साहित्य

पं. दीन दयाल उपाध्याय का भाषा चिंतन

पंडित दीन दयाल उपाध्याय भारतीय राजनीति में एक जाना-माना नाम है। उन्होंने अपना प्रारंभिक जीवन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में शुरू किया था। बाद में संघ के संगठनकर्ता के रूप में काम करने लगे। 1950 में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिल कर एक राजनीतिक दल भारतीय जनसंघ की स्थापना […]

भाषा-साहित्य

संक्रमणकाल में साहित्यिक गतिविधियाँ

कोरोनाकाल एक संक्रमणकाल है, एतदर्थ इस संक्रमण के दौर में मन के अंदर आस्था और श्रद्धा निहित होनी चाहिए, न कि बाह्यपूजा ! यज्ञ प्रयोजन और भूमि पूजन अभी के समय में नहीं हो तो बेहतर है ! भूमिपूजन को लेकर आपकी सहमति आशावादी हो सकती है, किन्तु यथार्थवादी सोच लिए नहीं। कोरोना से उबरने […]

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अग्नि के सापेक्ष राष्ट्रकवि दिनकर जी

दिनकर जी यानी स्वयं युगधर्म की हुँकार हूँ मैं ! क्रांतिधर्मी कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी का जन्म 23 सितंबर 1908 को बरौनी जंक्शन (बिहार) के पास के गाँव  सिमरिया में हुआ था। पटना विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद वे एक विद्यालय में अध्यापक हो गये। फिर 1934 से 1947 तक बिहार सरकार की […]

भाषा-साहित्य

गीतों में प्रयुक्त अभद्र शब्दों पर लगे बैन !

प्रो. शारदा सिन्हा के ‘छठ’ गीतों में प्रयुक्त ‘अभद्र’ शब्दों के गायन पर ‘बैन’ लगे ! विदित हो, सूर्योपासना और लोकआस्था का प्रकृति-पर्व ‘छठ’ के आते ही बिहार, झारखंड, पश्चिमी प. बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश, नेपाल इत्यादि अवस्थित श्रद्धालुओं द्वारा कैसेट, सीडी, मोबाइल, लाउडस्पीकर, साउंड बॉक्स इत्यादि के मार्फ़त ‘छठ’ गीत सुनने को मिलने लग […]

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अंग्रेजी हटाए बिना हिंदी कैसे लाएँगे ?

भारत सरकार को हिंदी दिवस मनाते-मनाते 70 साल हो गए लेकिन कोई हमें बताए कि सरकारी काम-काज या जन-जीवन में हिंदी क्या एक कदम भी आगे बढ़ी? इसका मूल कारण यह है कि हमारे नेता नौकरशाहों के नौकर हैं। वे दावा करते हैं कि वे जनता के नौकर हैं। चुनावों के दौरान जनता के आगे […]

भाषा-साहित्य लेख

भारत में हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति और आगे इसका भविष्य

हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, यह तो हर व्यक्ति जानता ही होगा! मध्यांतर में इसने अपना अस्तित्व ही खो दिया था। आज फिर से कुछ लोगों के अथक परिश्रम से इसको सर उठाकर चलने का मौक़ा मिला है। हिंदी अगर आगे बढ़ी है और बढ़ रही है तो वो साहित्य व लेखन के माध्यम से। इसको […]

भाषा-साहित्य

खरी-खोटी सुननेवाले खरे सर !

खरी-खोटी सुनानेवाले कवि-पत्रकार विष्णु खरे ! पत्रकार के रूप में विष्णु खरे ने शुरू किया कैरियर ! यह जो जरिया चुना था, उस समय यह इसके लिए नाकाफी रहा। जीवन भर हिन्दी साहित्य की सेवा में जुटे रहने वाले एक व्यक्ति की अपनी अलग पहचान है। विष्णु खरे की प्रतिष्ठा समकालीन सृजन परिदृश्य में एक […]

भाषा-साहित्य

बच्चों को प्रोत्साहन

मैं एक शिक्षिका हूँ काफी दिनों से बच्चों को कविता बनाकर बच्चों को पढ़ाने का शौक था पर वर्तमान में लॉक डाऊन के चलते मैं घर पर बहुत सी कविता लिख रही थी लेकिन मेरी कविताएँ बस मेरी डायरी तक सिमित रही फिर मुझे कवि अभिवक्ति ग्रुप से एक शक्स ने जय विजय मासिक पत्रिका […]

भाषा-साहित्य

क्या हिंदी अपना ही है या पराए की ?

‘आधुनिक हिंदी व्याकरण और रचना’ (23 वाँ संस्करण) में लिखा है कि हिंदी,हिन्दू और हिन्दुस्तान जैसे शब्दों को पारसियों ने लाया है, ये तीनों शब्द ‘जेंदावस्ता’ ग्रन्थ में संकलित हैं । अमीर ख़ुसरो और मालिक मुहम्मद जायसी ने इसे ‘हिन्दवी’ कहा । इस हिन्दवी के पहले की हिंदी को कोई आरंभिक हिंदी कहा, तो डॉ. […]