भाषा-साहित्य

नीरद चौधुरी से नायपॉल तक

नीरद सी. चौधुरी का देहावसान हुआ था, तब इसे अंतिम भारतीय अंग्रेज कहा गया था, वी. एस. नायपॉल भी अपने को अंग्रेज समझते थे, क्योंकि 2001 में जब उसे साहित्य का ‘नोबेल पुरस्कार’ मिला, तो भारतीय मीडिया ने सूचना प्रसारित किया, “भारतीय मूल के विख्यात लेखक विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल (V. S. Naipaul) को वर्ष 2001 […]

भाषा-साहित्य

बिंदास कवयित्री

स्वर्णलता विश्वफूल एक सदाबहार लेखिका, कवयित्री और बिंदास कलाकार हैं. स्वतंत्रता सेनानी की पौत्री और पोस्टमैन की पुत्री स्वर्णलता भी भारत की सबसे युवा पोस्टवुमन रही हैं. पहली कविता मात्र 9 वर्ष की आयु में प्रकाशित हुई थी. नारीवादी और दलित समस्याओं के समर्पित कवयित्री भी. विश्वफूल की प्रकाशित कृतियाँ हैं- ये उदास चेहरे. हिंदी […]

भाषा-साहित्य

जातिवादी कविताएँ

श्री पंकज चौधरी की कविताएँ व्यंग्यबाण छोड़ती है । एक कविता है, शीर्षक ‘जाति भी एक संगठन है’ बड़धांसू है । कविता पढ़िए, यह और भी धांसू है, यथा- “ब्राह्मण…. ब्राह्मण के नाम पर, हत्यारे को नायक कह देता है । भूमिहार…. भूमिहार के नाम पर बूचर को गाँधी कह देता है । राजपूत…. राजपूत […]

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मुसाफिर जी और साहित्य का पोस्टमार्टम

डॉ. मुसाफ़िर बैठा मेरे वरेण्य मित्र हैं, अग्रज भी । कई विषयों में एम.ए. हैं, उर्दू में भी । मेरी दृष्टि में हिंदी भाषाई, शैलीगत- नवचेष्टा, सुलेख और व्याकरणीय लिहाज़ से उस जैसा अभी सम्पूर्ण भारत में हिंदी के ज्ञाता नहीं हैं , हर मुलाक़ात पर उस अद्भुत जीव से मैं कुछ न कुछ सीखता […]

भाषा-साहित्य

पंकज चौधरी और कवि-पत्रकारीय अंदाज़

कवि और पत्रकार मित्र श्री मुसाफ़िर बैठा और श्री पंकज चौधरी के प्रसंगश: मैंने अपनी ज़िन्दगी के कई-कई वसंत-पतझड़ ‘पटना’ में बिताये हैं, लगभग 2 दशक की अवधि कतई कम नहीं होती ! पटना-प्रवास के दौरान मेरे कई साहित्यिक मित्र हुए , जिनमें अभी दो के बारे मे ही यहाँ इसलिए उल्लेख कर रहा हूँ […]

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लेखक के कर्तव्य

लेखक /साहित्यकार का अपना कुछ नहीं होता, वो सारे संसार का होता है। ऐसे में उसकी भूमिका बड़ी नहीं विस्तृत होती है। उसके कर्तव्य बढ़ जाते हैं।उसकी सोच,चिंतन संकुचित नहीं विस्तृत होनी चाहिए।सच्चे कलमकार का कर्तव्य यही होना चाहिए कि वो संसार को अपना समझे और अपने शब्दभावों से संसार भर में सुंदर, सकारात्मक, प्रेरक […]

भाषा-साहित्य

अदालतों में अंग्रेजी की गुलामी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारत की न्याय-प्रणाली के बारे में ऐसी बातें कह दी हैं, जो आज तक किसी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ने नहीं कही। वे जबलपुर में न्यायाधीशों के एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कानून, न्याय और अदालतों के बारे में इतने पते की बातें यों ही नहीं कह दी हैं। […]

भाषा-साहित्य

प्रेम में सनकपन

कात्यायनी जी की लेखनी से, यथा- सच-सच बताना, तनु ! शादी के पहले तुम्हारी किसी से प्रेम सम्बंध थी या नहीं ।” पति ने मनुहार के साथ टोका। “ये क्या उटपटांग पूछ रहे हैं, जी !” नई नवेली तनु शर्माते हुये। “अरे बताओ न ! पति-पत्नी के बीच कैसा पर्दा ? मेरे तो कई प्रेम-संबंध […]

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रेणु को जानने-समझने की कोशिश

ग्राम संवेदना के कथा शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु की 100वीं जयन्‍ती मनाने के लिए गुरुवार(4मार्च2021) को भादर के कुरंग गाँव में एक समारोह आयोजित हुआ । समारोह में मौजूद साहित्यकारों ने रेणु को युगपुरुष बताया । वर्तमान समय में जब साहित्य नगरीय/ महानगरीय हो गया है, गाँव वहाँ आमतौर पर अनुपस्थित है या छौंक की तरह […]

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फणीश्वरनाथ रेणु जन्मशताब्दी

4 मार्च को रेणुजी के जन्मदिवस पर सादर नमन । वर्ष 2021 रेणुजी का जन्म शताब्दी वर्ष है। ….तो वहीं 5 मार्च को मेरा है, इस दृष्टि से मैं रेणुजी के अनुज होने के नाते अपनी पीठ स्वयं थपथपा लेता हूँ ! देश के, हिंदी के, किन्तु खासकर बिहार, कोसी और अररिया के साहित्यरत्न, साहित्य […]