Category : भाषा-साहित्य

  • कविता

    कविता

    कविता में संवेदना और प्रेम की नदियाँ बहती है. सच्चा कवि-रचनाकार वो है जो किसी भी स्थान या जगा की परवाह किये बिना कविता की रचना करने में ही रस होता है. कितने लोग कविता पढना...


  • हिंदी से नाता टूट सा गया है

    हिंदी से नाता टूट सा गया है

    राष्ट्रभाषा पर नूतन विचार पढ़ने और आगे बढने से पहले आप यह जानें कि राज्यभाषा, राजभाषा, राष्ट्रभाषा और मातृभाषा क्या हैं ? हममें से अभी 80 प्रतिशत लोग यह नहीं बता पायेंगें क्योंकिं हिंदी से नाता...

  • स्वभाषा का  महत्व

    स्वभाषा का महत्व

    स्वतंत्रता सैनानियों ने अपना बलिदान इसलिए दिया था कि उनका देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त होकर आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बने।  उसके लिए उनका मानना था कि भारतीय भाषाएँ हर क्षेत्र में प्रतिष्ठापित हों और हिंदी...

  • मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी में

    मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी में

    आजकल मैं इंदौर में हूं। यहां के अखबारों में छपी एक खबर ऐसी है कि जिस पर पूरे देश का ध्यान जाना चाहिए। केंद्र सरकार का भी और प्रांतीय सरकारों का भी। चिकित्सा के क्षेत्र में...

  • शिक्षा के माध्यम की भाषा – मातृभाषा

    शिक्षा के माध्यम की भाषा – मातृभाषा

    भाषा शिक्षण का क्षेत्र अनुप्रायोगिक है। इसमें विभिन्न विषयों के शिक्षण के लिए जिस भाषा का प्रयोग होता है, वह शिक्षा का माध्यम कहलाती है। शिक्षा का माध्यम अपनी मातृभाषा भी हो सकती है और दूसरी...


  • दोहा है रस-खान

    दोहा है रस-खान

    दोहा विश्व साहित्य का सर्वाधिक पुरातन और प्रभावी छंद है​। यह अतिशयोक्ति नहीं सत्य है कि दोहा ने संभावित युध्दों को रोका है, संकटग्रस्त नारी की अस्मिता बचाई है, पथ-भटके जनों को राह दिखाई है, प्रेमियों...

  • अखबारों की भ्रष्ट भाषा

    अखबारों की भ्रष्ट भाषा

    सुविख्यात वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक ने अखबारों में भ्रष्ट भाषा का जो मुद्दा उठाया है वह प्रासंगिक और सटीक है। इसमें दो राय नहीं कि पिछले कई सालों से हिन्दी की अखबारों में भ्रष्ट...