भाषा-साहित्य लेख

पॉकेट बुक्स, जासूसी उपन्यास और वेदप्रकाश शर्मा

हिंदी जासूसी उपन्यासकारों में प्रमुख स्तम्भ वेदप्रकाश शर्मा नहीं रहे। हालाँकि वे पॉकेट बुक्स व लुगदी साहित्य के पुरोधा थे, तथापि उनके उपन्यास ‘वर्दी वाला गुंडा’ की लगभग 10 करोड़ प्रतियाँ बिकी थी, जो किसी भी भारतीय नामवरी-साहित्यकारों की कृतियों के लिए संभव नहीं रहा है। पाठकों में रोचकता लाने के मामले में उनके उपन्यास […]

भाषा-साहित्य लेख

समान नागरिक संहिता की भाँति भारत में ‘समान भाषा संहिता’ हो !

समान नागरिक संहिता की भाँति भारत में ‘समान भाषा संहिता’ हो ! ये लिङ्ग, ये वचन, ये संज्ञा, ये सर्वनाम, ये क्रिया-कर्म, संधि-कारक (अलंकार और समास की बात छोड़िये ) ने तो हिंदी के विकास को और चौपट किया है, इनमें संस्कृतनिष्ठ शब्द उसी भाँति से पैठित है, जिस भाँति से जो-जो आक्रमणकारी भारत आये, […]

भाषा-साहित्य

प्रेमचन्द के हंस का संजय

सांस्कृतिक पतन के दौर में पूर्वजों को नाकाम, असफल, अयोग्य, अकर्मण्य, अप्रगतिशील और न जाने क्या- क्या कहने का चलन बढ़ गया है। वेदव्यास, कबीर और तुलसी को गरियाने की परम्परा में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और प्रेमचन्द को भी घसीटा जाने लगा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कुकर्म में तथाकथित इनके अपने ही […]

भाषा-साहित्य लेख

बुझती जा रही भारतीय भाषाएँ

नष्ट होती जा रही कई भारतीय भाषाएं, जैसे- प्राकृत, कैथी, अवहट्ट, अपभ्रंश, पालि इत्यादि । भारत की बहुसंख्यक आबादी हिंदी भाषा जानती है और हिंदी भाषा से ही संबंध रखती है। ‘भारतीय भाषा की अनदेखी का सिलसिला’ शीर्षक आलेख में Mr. प्रेमपाल शर्मा ने यह बताया है कि अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय भाषा है, किंतु देश के […]

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हाटे-बाज़ारे एक्सप्रेस

तारीख 22 नवंबर 1999 को तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने बनफूल की प्रसिद्ध कहानी ‘हाटे बजारे’ के नाम पर कटिहार से सियालदह (कोलकाता) के बीच उनकी एक कृति के नाम पर ‘हाटेबजारे एक्सप्रेस’ ट्रेन चलवाई थी। अब यह ट्रेन उसी नाम से सहरसा- सियालदह (कोलकाता) वाया कटिहार होकर चलती है। भारत सरकार द्वारा ‘पद्मभूषण’ […]

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दोहा गजल : हिन्दी साहित्य में चमकती नई विधा

भारत के कई हिन्दी राज्यों में हमने आपने हिन्दी साहित्य के अनगिनत रंग यानी कि विधा रूप देखे हैं,भाषा के विद्वानों,कवियों द्वारा हिन्दी साहित्य में समय समय पर कई कठिन काम किए गए, हिन्दी व्याकरण बना उसके सांचे में काव्य को कस छंद के मानक तय किए, जो कि समय के साथ -साथ बड़ते भी […]

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हिंदी लेखकों को खुलकर लिखने नहीं दिए जाते !

मुझे आश्चर्य इस बात की है कि लेखकों से हिंदी और देवनागरी लिपि की अपेक्षा रखनेवाली एक पत्रिका ने मुझे जो मेल भेजे हैं, वो अंग्रेजी और रोमन लिपि में है ! डॉ. गुणाकर मुळे ने कहा है कि हिन्दी भाषा का विकास सिर्फ कविता और कहानियाँ लिखने से ही नहीं होगी, हिंदी माध्यम से […]

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दिनकर जी के चार अध्याय

उनकी पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के लिये उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा काव्यकृति ‘उर्वशी’ के लिये भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुए । अपनी लेखनी के माध्यम से वह सदा अमर रहेंगे। द्वापर युग की ऐतिहासिक घटना पर आधारित महाभारत के प्रसंगार्थ उनके प्रबन्ध काव्य ‘कुरुक्षेत्र’ को विश्व के 100 सर्वश्रेष्ठ काव्यों में 74वाँ स्थान […]

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2,05,00,912 तरीके से हिंदी का एक शब्द लिखा जाना

2000-2001ई. में जब मैंने हिंदी शब्द ‘श्री’ को 2,05,00,912 तरीके से लिखा । मूलरूप से उनमें 30,736 (कैलीग्राफी सहित) शब्दों को 666 चिह्नों/प्रतीकों से जोड़ते हुए उनके ध्वन्यात्मक-अर्थ के साथ ‘श्री’ का सार्थक उच्चारण कराया, तो ‘ध्वनि-व्याकरण’ की प्रत्यर्थ अवधारणा मानस – पटल पर आयी, जिनके विन्यसत: संलग्न-दस्तावेज़ में 16 (‘श्री’ के लिए लिखा) संकेत-विस्तार […]

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हिंदी साहित्य में ‘चालीसा’ की परिभाषा ?

हिंदी साहित्य में ‘चालीसा’ की क्या परिभाषा है ? ‘चालीसा’ साहित्यिक विधा है और ‘पैरोडी’ एक साहित्यिक प्रवृत्तियाँ है, जो कि नकल नहीं है । गिनती के 40 चौपाई के सम्मिलित रूप को चालीसा कहा जाता है, जिनमें दोहाएं तो उन चौपाइयों के परिचय व दो शब्द या प्रार्थना-मात्र हैं। कवि मनोरंजन प्रसाद सिंह की […]