भाषा-साहित्य

परचम लहरा रहे भारतीय साहित्यकार

युगों युगों से भारतीय साहित्यिक जगत का परचंम लहराता आया है और आज भी लहरा रहा है।आज भी साहित्य से जुड़े लाखों दीवाने हैं जो आज भी कविताऐं, लेख, कहानीयां, लघुकथा या उपन्यासों के ज़रिये अपनी अटल छाप दिलों पे छोड़ रहें हैं।यदि आज हम अपने पुराणों को उठा के देखें तो युगों पूर्व भी […]

भाषा-साहित्य

खड़ी बोली हिंदी के प्रथम साहित्यकार

भारतेंदु हरिश्चंद्र जी का जन्म 9 सितम्‍बर 1850 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में तथा मृत्यु बीमारी से 6 जनवरी 1885 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में ही हुई । तब राज्य का नाम उत्तर प्रदेश नहीं था । उनकी मृत्यु महज 34 वर्ष 4 माह की आयु में हो गयी । वे एकसाथ कवि, कथाकार, लेखक, […]

भाषा-साहित्य

याद आएंगे हमेशा, प्रथम प्यार की चितवन की तरह

हिंदी में नई कहानियों के सर्ज़क -त्रय में श्री मोहन राकेश, श्री कमलेश्वर और श्री राजेन्द्र यादव जाने जाते हैं, अब तीनों में कोई जीवित नहीं हैं । हाँ, 47 वर्ष भी पूर्ण नहीं कर सके श्री राकेश की पुण्यतिथि 3 जनवरी को रही, वैसे उनके जन्मदिवस 8 जनवरी को है । गीतकार श्री गोपालदास […]

भाषा-साहित्य

अप्रासंगिक दिवस

राष्ट्रभाषा तो बना नहीं, अब सिर्फ ‘हिंदी दिवस’ का संरक्षण ! हर साल श्रावण पूर्णिमा को ‘राष्ट्रीय संस्कृत दिवस’ मनाया जाता है । भारत सरकार ने 1968 में ऐसा निर्णय लिया था और 1969 से यह दिवस निरंतर मनाई जा रही है । इसतरह से दिवस मनाए जाने के प्रसंगश: यह संस्कृत दिवस, 2020 की […]

भाषा-साहित्य

जीवन में ‘साहित्य’ का योगदान

जीवन जन्म से लेकर अंतिम सांस तक चलता ही रहता है , लेकिन यह जीवन कैसा है, सम्मानित है, सुखी है शिष्ट है, श्रेष्ठ है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि जीवन भर आपने क्या सीखा क्या शिक्षा पायी, कैसा आचरण रखा और आपका जन जन से कैसा संपर्क रहा, हर व्यक्ति का […]

भाषा-साहित्य

बिहार से विरार तक

बिहार (मनिहारी) से विरार (मुम्बई) तक का सफ़र ! हिंदी फ़िल्मों में पहचान बनाने के सोद्देश्य हाईस्कूली मित्र श्री प्रभाष कवि; जो दो दशक पहले ही अच्छी और सच्ची कद-काठी लिए मनिहारी से अभिनेता गोविंदा के ‘विरार’ पहुँच गए हैं, फिर उनकी फ़िल्माई संघर्ष-गाथा शुरू ! कई फ़िल्मों के लिए प्रभाष जी ने गीत-लेखन कार्य […]

भाषा-साहित्य

एक सदाबहार अभिनेता

हिंदी अभिनेता व पूर्व सांसद गोविंद वल्लभ आहूजा उर्फ़ गोविंदा ! सन 1977 में जब वे सिर्फ 14 वर्ष के थे, तो उनकी पहली फ़िल्म आयी थी, फिर पीछे मुड़े नहीं ! अब तो फ़िल्म अभिनेता गोविंदा के फिल्मों की संख्या 175 से अधिक हो गई है, जिनमें हिंदी सहित कई भाषाओं के फ़िल्म शामिल […]

भाषा-साहित्य

मदनोत्सव चरमोत्सव

माघ और फागुन मास वसंत महोत्सव और मदनोत्सव लिए हैं । विद्या के साथ-साथ कामदेव का माह भी है यह । वसंत की शुरुआत माघ शुक्ल पक्ष के प्रथम दिवस से शुरू होती है और फागुन पूर्णिमा यानी होली की रंगोत्सव के साथ खत्म होती है । इसी बीच वसंत शुक्ल पंचमी यानी श्री पंचमी […]

भाषा-साहित्य

श्री की देवी

उनकी पहली फ़िल्म बाल कलाकार के रूप में ‘जूली’ थी तथा अंतिम हिंदी फ़िल्म ‘मॉम’ थी, जिनके लिए उन्हें मरणोपरांत सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुई। दुबई के एक होटल में स्वस्थचित्त दिखनेवाली ‘श्री’ की अचानक मौत (24.02.2018) ने उनकी ही फ़िल्म ‘सदमा’ लिए सभी प्रशंसकों को जोरदार सदमा दे गयी। ‘जुदाई’, ‘हिम्मतवाला’, ‘मिस्टर […]

भाषा-साहित्य

मेरा भाई

  कदै भी पड्या मैं तनै ठाया भाई हर एक जिम्मा तनै निभाया भाई मै तो जिब कसूता ऐ डरया करदा साईकल पै पहली तनै चलाया भाई मै तो कतई धूल तेरे स्नेह का फूल नूये खिलेगा सच बताऊँ तेरे बरगा भाई नहीं मिलेगा कदै तै दिलखोल कै जिणियां सै किसे तै बी कोनी डरदा […]