भाषा-साहित्य

शिक्षा के माध्यम की भाषा – मातृभाषा

भाषा शिक्षण का क्षेत्र अनुप्रायोगिक है। इसमें विभिन्न विषयों के शिक्षण के लिए जिस भाषा का प्रयोग होता है, वह शिक्षा का माध्यम कहलाती है। शिक्षा का माध्यम अपनी मातृभाषा भी हो सकती है और दूसरी भाषा भी। इसलिए भाषा किसी-न-किसी उद्देश्य या प्रयोजन के संदर्भ में सीखी अथवा सिखाई जाती है, लेकिन मातृभाषा को […]

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तमिल भाषा का संस्कृत से सम्बन्ध

तमिल भाषा एक बार फिर से सुर्ख़ियों में है। कारण प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा छात्रों से वार्तालाप के समय एक वक्तव्य दिया गया कि तमिल भाषा संस्कृत से भी पुरानी है। प्रधानमंत्री जी ने जाने या अनजाने में जो बयान दिया है उसके कई मायने हैं। सभी जानते है कि तमिलनाडु आर्य-द्रविड़ की विभाजनकारी मानसिकता […]

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दोहा है रस-खान

दोहा विश्व साहित्य का सर्वाधिक पुरातन और प्रभावी छंद है​। यह अतिशयोक्ति नहीं सत्य है कि दोहा ने संभावित युध्दों को रोका है, संकटग्रस्त नारी की अस्मिता बचाई है, पथ-भटके जनों को राह दिखाई है, प्रेमियों को मिलाया है, दरिद्र पिता को बेटी ब्याहने की सामर्थ्य प्रदान की है और शत्रु के कैद में बंद […]

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अखबारों की भ्रष्ट भाषा

सुविख्यात वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक ने अखबारों में भ्रष्ट भाषा का जो मुद्दा उठाया है वह प्रासंगिक और सटीक है। इसमें दो राय नहीं कि पिछले कई सालों से हिन्दी की अखबारों में भ्रष्ट भाषा का प्रयोग हो रहा है। कई बार हिन्दी की व्याकरणिक संरचना गलत होती है और अब तो उसमें […]

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रोमन लिबास में कराहने को मजबूर हमारी हिन्दी

कभी सहिष्णुता को अपना मुद्दा बनाने वाले हमारे तथाकथित हिन्दी सिने कलाकारों ने आज भारतीय हिन्दी सेवियों को उनकी सहनशीलता की सीमाएं तोड़ने पर बाध्य कर दिया है। पिछले हफ्ते से हिन्दीसेवी सिनेस्तान डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड सिनेस्तान डॉट कॉम द्वारा शुरू की गई सिनेस्तान इंडियाज स्टोरीटेलर्स स्क्रिप्ट प्रतियोगिता में हिन्दी को रोमन लिपि में लिखे […]

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हिंदी अखबारों की भ्रष्ट भाषा

आजकल मैं मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों और गांवों में घूम रहा हूं। जहां भी रहता हूं, सारे अखबार मंगवाता हूं। मराठी के अखबारों में बहुत कम ऐसे हैं, जो अपनी भाषा में अंग्रेजी का प्रयोग धड़ल्ले से करते हों। उनके वाक्यों में कहीं-कहीं अंग्रेजी के शब्द आते जरुर हैं लेकिन वे ऐसे शब्द […]

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हिंदी का एक उपेक्षित क्षेत्र

हिंदी इस समय एक विचित्र दौर से गुज़र रही है। अनेक शताब्दियों से जो इस देश में अखिल भारतीय संपर्क भाषा थी, और इसीलिए संविधान सभा ने जिसे राजभाषा बनाने का निश्चय सर्वसम्मति से किया, उसे उस पद पर प्रतिष्ठित करना तो दूर, ‘आधुनिक शिक्षित ‘लोगों ने अखिल भारतीय संपर्क भाषा का रुतबा अंग्रेजी को […]

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नवयुग के विधायक आचार्य – महावीर प्रसाद द्विवेदी

हिंदी साहित्य के आचार्य को हम प्रतिवर्ष 21 दिसम्बर को याद करते हैं। द्विवेदी युग के कवि ,साहित्यकार महावीर प्रसाद द्विवेदी का जन्म रायबरेली उत्तरप्रदेश के दौलतपुर ग्राम में हुआ था। इनके पिता पंडित रामसहाय दुबे कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे। बचपन से ही घर मे धन का अभाव था। हिंदी साहित्य के युग विधायक एक महान […]

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इंटरनेट पर हिन्दी

इंटरनेट के माध्यम से आज कहानियां, कविता, उपन्यास, शो़ संवाद, ग्रंथ, न्यूज पत्रिकायें, ईबुक्स एवं ईपत्रिका ने अपनी जड़ें मजबूत करने के साथ साथ हिन्दी का प्रचार प्रसार बढ़ाया है, आप कविता या कहानी लिखने हो तो आज के कवि लेखक को इंटरनेट चलाना पहले ही चलाना सीखना होगा, क्योंकि अपनी रचनायें लोगों तक पहुंचाने […]

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हिंदी साहित्य के विलक्षण कवि – “रघुवीर सहाय”

दूसरा सप्तक के कवियों में प्रमुख नाम रघुवीर सहाय का आता है। हिंदी के विलक्षण कवि, लेखक, पत्रकार, संपादक, अनुवादक, कथाकार, आलोचक। रघुवीर सहाय का जन्म 9 दिसंबर1929 को लखनऊ उत्तर प्रदेश में हुआ था। इन्होंने 1951 में अंगेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया। 1946 से साहित्य सृजन करना प्रारंभ किया। इनका विवाह 1955 में विमलेश्वरी […]