भाषा-साहित्य

जनपदीय भाषाओं का हिंदी साहित्य में योगदान

साहित्य सामाजिक अनुभूतियों का प्रतिविम्ब है। विचार विनिमय का माध्यम भाषा होती है। मानवीय प्रकृति है सरलोन्मुखी होना, यही कारण है कि भाषा के दो रूप प्रचलित हुए-एक साहित्यिक भाषा एवं दूसरा लोकभाषा। लोकभाषा को जनभाषा, जनपदीय भाषा, आम भाषा, बोली भी कहते हैं। लोक भाषा में लोक साहित्य की सर्जना की जाती है। लोक साहित्य जन जीवन का दर्पण है। इसमें जनता के हृदय का उद्गार होता है।सर्व-साधारण लोग जो कुछ सोचते हैं और जिस विषय की अनुभूति […]

भाषा-साहित्य

पुस्तक प्रोन्नयन : समस्याएँ एवं संभावनाएँ

“पुस्तकें जहाँ भी होंगी, वह स्वर्ग बन जाएगा।” यह उक्ति  बालगंगाधर तिलक की है जो सत्य को प्रकट करती है। पुस्तक का महत्व ही इस एक उक्ति से हम समझ पाते हैं। पुस्तक मानव जीवन में हमसफर, गुरु एवं मार्गदर्शक का पात्र बखूबी निभाते हैं। जब भी अवसर मिलता है तो पुस्तकों से बढकर कोई […]

भाषा-साहित्य

कमल किशोर गोयनका से साक्षात्कार

प्र॰:- हिन्दी भाषा को वर्तमान समय में किस स्थिति में देखते हैं आप? उ॰:- हिन्दी भाषा की स्थिति के बारे में अब इतनी चिन्ता क्यों कर रहे हैं? अब तो हिन्दी का विस्तार हो रहा है, देश में ही नहीं, विदेशों में भी हो रहा है। देश में जितने अखबार हैं, उनमें सबसे ज्यादा हिन्दी के ही […]

भाषा-साहित्य

प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार महावीर प्रसाद द्विवेदी की महर्षि दयानन्द को श्रद्धांजलि

ओ३म् महर्षि दयानन्द समस्त विश्व के गुरू वा आचार्य थे। उन्होंने पक्षपात रहित होकर संसार के सभी मनुष्यों के प्रति भ्रातृभाव रखते हुए उनके कल्याण की भावना से वेदों के ज्ञान से उनका शुभ करने के लिए वेद प्रचार का प्रशंसनीय व अपूर्व कार्य किया था। बहुत से मताग्रही लोगों ने उनके यथार्थ अभिप्राय को […]

भाषा-साहित्य

कह-मुकरनी

‘कह-मुकरनी’ का अर्थ है ‘कहकर मुकर जाना’ यानी अपनी बात से पलट जाना। ये लघु कविताएँ लिखने की एक विशेष शैली है। इसमें एक महिला अपनी सखी से कुछ बातें कहती हैं, जो पति के बारे में भी हो सकती हैं और एक अन्य वस्तु के बारे में भी। जब उसकी सखी कहती है कि […]

भाषा-साहित्य

न्यू मीडिया: मौजूद हैं चुनौतियां एवं संभावनायें

सूचना प्रौद्योगिकी के युग में न्यू मीडिया का विस्तार दिनोंदिन निरन्तर बढता जा रहा है, जिसके कारण इसके आयामों में भी वृद्धि हो रही हैं। न्यू मीडिया ने पारम्परिक संचार माध्यमों को पीछे छोड़कर उस पर अपना अधिकार पूर्णत भले ही न कर पाया हो‚ लेकिन अपनी जमीन भविष्य के लिए पुख्ता जरूर कर ली […]

भाषा-साहित्य

विश्व हिन्दी सम्मेलन और हम

यह प्रसन्नता की बात है कि दसवां विश्व हिन्दी सम्मेलन आगामी 10-12 सितम्बर को मध्यप्रदेश की भोपाल में होने जा रहा है। सरकार की ओर से इसे एक यादगार अवसर बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किये जा रहे हैं। विश्व सम्मेलन है तो स्वाभाविक है कि दुनिया भर के प्रतिनिधि भी आएगे। ऐसे में हमें […]

भाषा-साहित्य

आर्यसमाज के यशस्वी साहित्यकार प्रा. राजेन्द्र जिज्ञासु

ओ३म् आज चिन्तन करते समय हमारा ध्यान आर्य साहित्य के लेखन, सम्पादन, उर्दू से हिन्दी अनुवाद व प्रकाशन में क्रान्ति करने वाले आर्यजगत के वयोवृद्ध विद्वान प्रा. राजेन्द्र जिज्ञासु जी की ओर गया तो ध्यान आया कि वर्तमान में उर्दू, अरबी व फारसी का ज्ञान रखने वाले विद्वानों में प्रा. राजेन्द्र जिज्ञासु जी न केवल […]

भाषा-साहित्य

छांदसिक शिल्प के कलश में आचार्य संजीव सलिल के नवगीत….

आचार्य संजीव सलिल आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ नें नागरिक अभियंत्रण में त्रिवर्षीय डिप्लोमा, बी.ई., एम.आई.ई., अर्थशास्त्र तथा दर्शनशास्त्र में एम.ए., एल.एल.बी., विशारद, पत्रकारिता में डिप्लोमा व कंप्यूटर ऍप्लिकेशन में डिप्लोमा किया है। आपकी प्रथम प्रकाशित कृति ‘कलम के देव’ भक्ति गीत संग्रह है। ‘लोकतंत्र का मकबरा’ तथा ‘मीत मेरे’ आपकी छंद मुक्त कविताओं के संग्रह […]

भाषा-साहित्य समाचार

बल,संगीत और रंगो का संगम है बाहुबली – सुधीर मौर्य

दस जुलाई को रिलीस हुई एस एस राजमौली निर्देशित फिल्म बाहुबली एपिक ऐतहासिक गल्प पे आधारित एक नया कीर्तमान है। फिल्म के मुख्य कलाकार प्रभास (शिवद्दु) तमन्ना भाटिया (अवन्तिका) और अनुश्का (रानी देवसेना) हे । फ़िल्म की शुरआत राजकीय षडयन्त्र से होती हे और एक स्त्री अपनी बाँहों में एक छोटे बच्चे को लेकर झरना […]