भाषा-साहित्य

सच्ची रामायण की चाभी ?

‘रामायण’ की कथा या घटना कितने ऐतिहासिक है और कितने सही है ? हमेशा यह बहस के केंद्र में रहा ! इतिहास और कल्पना क्या साथ-साथ चल रही है ? आस्तिकता और नास्तिकता साथ-साथ चल रही होती है ! कई-कई रामायणों से निचोड़ निकालकर महान दार्शनिक व समाजशास्त्री ‘पेरियार’ ई. व्ही. रामास्वामी नायकर ने “सच्ची […]

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आ रही है ‘हिंदी दिवस’

भारतीय संविधान में हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप उल्लेख कहीं नहीं है । परंतु हिंदी के लिए देवनागरी लिपि का उल्लेख संवैधानिक अवस्था लिए है, किन्तु भारतीय संविधान में अँग्रेजी लिखने के लिए किसी लिपि का उल्लेख नहीं है । गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने भी एक RTI जवाब में अँग्रेजी की ऐसी स्थिति को […]

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हिन्दी का सफर कहाँ तक

कभी-कभी हम भयभीत से हो जाते हैं यह सोचकर कि बदलते हुए सामाकि परिवेश में हमारी हिन्दी कहीं पिछड़ तो नहीं रही? सम्भवतया इसमें आंग्ल भाषा का प्रभाव भी शामिल हो, किसी हद तक हिन्दी का स्वरूप बिगाड़ने का दायित्व आम बोल-चाल में इंग्लिश का दखल भी है जिसे हम आज हिंग्लिश कहने लगे हैं। […]

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आधुनिक परिवेश में सिसकती हिन्दी

आज के आधुनिक परिवेश में मानव जीवन पर आधुनिकता पूरी तरह से हावी होती जा रही है, लोग अंग्रेजी भाषा की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं । उन्हें लगता है कि अंग्रेजी भाषा से उनके व्यक्तित्व पर काफी प्रभावशाली प्रभाव पड़ता है, जिससे कि वह बहुत ही गर्व महसूस करते हैं । मानव जीवन […]

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हिंदी भाषा: कुछ शंकाएं और समाधान

आप यह तो अच्छी तरह जानते ही हैं, कि लेखक, पाठक और प्रतिक्रिया का चोली-दामन का साथ होता है. लेखक लिखता है, पाठक पढ़ता है और प्रतिक्रिया भी लिखता है. यह प्रतिक्रिया लेखक की लेखनी का आइना होती है. आप यह भी अच्छी तरह जानते हैं, कि हमारे लिए पाठक और उसकी प्रतिक्रिया कितना महत्त्व […]

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अमृता प्रीतम की चर्चित संकलित रचनाएँ

अमृता प्रीतम की चर्चित रचनाओं के संकलन:- उपन्यास:- डॉक्टर देव (1949) (हिन्दी, गुजराती, मलयालम और अंग्रेज़ी में अनूदित), पिंजर (1950) (हिन्दी, उर्दू, गुजराती, मलयालम, मराठी, अंग्रेज़ी और सर्बोकरोट में अनूदित), आह्लणा (1952) (हिन्दी, उर्दू और अंग्रेज़ी में अनूदित), आशू (1958) हिन्दी और उर्दू में अनूदित, इक सिनोही (1959) हिन्दी और उर्दू में अनूदित, बुलावा (1960) […]

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बारुदीय शब्दों के हिंदी संपादक

28 अगस्त ! उस शख़्सियत की जन्म-जयंती है, जिसे ‘राजेन्द्र यादव’  कहा जाता है, जिनके निधन हुए 7 साल हो गए, किन्तु बौद्धिक हॉरर वह अबतक बने हुए हैं । उनकी काफी रचनाएँ हैं, यहाँ तक की उन्होंने अपनी संतान का नाम ‘रचना’ ही रखा ! राजेन्द्र यादव से कईबार मुलाकातें हुई हैं, एक बार […]

भाषा-साहित्य

प्रधानमंत्री के पत्र पर बवाल और भाषाई राजनीति

हिंदी से जुड़े कई मंचों पर एक चर्चा हो रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महेंद्र सिंह धोनी को जो पत्र लिखा है वह अंग्रेजी में क्यों लिखा गया है, हिंदी में क्यों नही? यह इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि प्रधानमंत्री सामान्य वार्तालाप हिंदी में करते हैं, उनकी हिंदी भी अच्छी है, […]

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संस्कृत और उनकी दुहिता

‘राष्ट्रीय संस्कृत दिवस’ पर संसारख्यात भाषाविदों को शुभकामनाएं ! श्रावण पूर्णिमा को ‘राष्ट्रीय संस्कृत दिवस’ मनाई जाती है । भारत सरकार ने 1968 में ऐसा निर्णय लिया था और 1969 से यह दिवस निरंतर मनाई जा रही है । इसतरह से दिवस मनाए जाने के प्रसंगश: 1999 में संस्कृत दिवस की 50वीं वर्षगाँठ रही। संसार […]

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हिंदी दिवस विशेष

ओ हिंदी! हमारी पहली  वाणी तुम हो… हमारी जवानी  की  रवानी  तुम हो… बच्चों के शब्दों में अपनेपन को बुनती… सुंदर सी कहानी तुम हो  … हिंदी केवल एक भाषा ही नहीं हमारी मातृभाषा है,यह केवल भावों की अभिव्यक्ति मात्र न होकर हृदय स्थित सम्पूर्ण राष्ट्रभावों की अभिव्यक्ति है।हिंदी हमारे अस्मिता का परिचायक , संवाहक […]