भाषा-साहित्य

सजीवन साहित्य

साहित्य से सुसंचालित है समाज ! जिस जाति की सामाजिक अवस्था जैसी होती है, उसका साहित्य भी वैसा ही होता है । जातियों की क्षमता और सजीवता यदि कहीं प्रत्यक्ष देखने को मिल सकती है, तो उनके साहित्य -रूपी आईने ही में मिल सकती है। इस आईने के सामने जाते ही हमें तत्काल मालूम हो […]

भाषा-साहित्य

श्रद्धेय कवि बच्चन

श्रद्धेय कवि डॉ. हरिवंशराय बच्चन की पुण्यतिथि पर सादर श्रद्धांजलि…. मधुशाला, मधुकलश, निशा-निमंत्रण (कविता-संकलन), क्या भूलूँ क्या याद करूँ (आत्मकथा) इत्यादि अमर रचनाओं के रचनाकार डॉ. हरिवंशराय बच्चन कि पुण्यतिथि (18 जनवरी) पर सादर नमन और भावभीनी श्रद्धाजंलि…. वे दो सदी के महान अभिनेता पद्म विभूषण व दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित श्रीमान अमिताभ […]

भाषा-साहित्य

लेखन-सरल या जटिल

लेखन एक जटिल और अक्सर रहस्यमय प्रक्रिया है। हालाँकि हम इसे पृष्ठ पर अक्षरों और शब्दों को व्यवस्थित करने से बस थोड़ा अधिक सोचने जैसा लगता है, लेकिन कुछ क्षणों के प्रतिबिंब से पता चलता है कि यह इससे कहीं अधिक है। एक ओर, लेखन एक कला है – हम यह नहीं कहते कि शेक्सपियर […]

भाषा-साहित्य

ग़ज़ल विधा के फनकार

वर्त्तमान समय में सम्पूर्ण भारत में हिंदी ‘ग़ज़ल’ विधा के महत्त्वपूर्ण व सशक्त हस्ताक्षर तथा बहराइच, उत्तर प्रदेश के रहवासी “आयुर्वेद चिकित्साधिकारी” डॉ. अशोक गुलशन मेरे ‘अग्रजसम’ हैं; उनकी ग़ज़ल भारत सहित कई देशों में गुनगुनायी जाती हैं। उन्हें सबसे लघुतम और वृहदतम ‘ग़ज़ल’ लेखन के लिए 3 दर्जन से अधिक रिकॉर्ड्स बुक और वेबसाइट […]

भाषा-साहित्य

मातृभाषा से मुंह मत मोड़िए  

मातृभाषा मिश्री सी मीठी होती है। महाभारत की तरह मधुर, रामायण की तरह रसीली, गीता की तरह गुनगनाने योग्य होती है। मातृभाषा में बोलना – सोचना – लिखना – पढ़ना सब कुछ सरल लगता है। मातृभाषा के बारे में महात्मा गांधी जी ने कहा है, “ जैसे बच्चों के विकास के लिए मां का दूध […]

भाषा-साहित्य

एक हिंदी समालोचक और उनकी समालोचना

हिंदी समालोचक ‘खगेन्द्र ठाकुर’ का अवसान ! दिनांक- 13 जनवरी 2020 को हमने बिहार और झारखंड के रहवासी डॉ. खगेन्द्र ठाकुर को खोया, जो हिंदी के वरेण्य समालोचक थे । मुझसे उनके व्यक्तिगत संबंध था। उनसे कई-कई बार कई-कई मित्रों के साथ भेंट हुई है। जन्म 9 सितंबर 1937 को मालिनी, गोड्डा (अभी झारखंड में) […]

भाषा-साहित्य

10 जनवरी यानी विश्व हिंदी दिवस

आज़ादी से पहले हिंदी के लिए कोई समस्या नहीं थी, आज़ादी के बाद हिंदी की कमर पर वार उन प्रांतों ने ही किया, जिनके आग्रह पर वहाँ हिंदी प्रचारिणी सभा गया था – मद्रास हिंदी सोसाइटी, असम हिंदी प्रचार सभा, वर्धा हिंदी प्रचार समिति, बंगाल हिंदी एसोसिएशन, केरल हिंदी प्रचार सभा इत्यादि । मेरा मत […]

भाषा-साहित्य लेख

वैश्वीकरण के दौर में हिंदी

आज हम वैश्वीकरण की दुनिया में हैं। वैश्वीकरण शब्द अँग्रेजी के ग्लोबलैजेशन शब्द का पर्याय शब्द है। यह दो शब्दों से बना है विश्व + एकीकरण इसका अर्थ है एक छत के नीचे आकर एक दूसरे की मदद करना। देश की अर्थ व्यवस्था को विश्व की अर्थ व्यवस्था के साथ जोड़ना ही वैश्वीकरण या भूमंडलीकरण […]

भाषा-साहित्य

परचम लहरा रहे भारतीय साहित्यकार

युगों युगों से भारतीय साहित्यिक जगत का परचंम लहराता आया है और आज भी लहरा रहा है।आज भी साहित्य से जुड़े लाखों दीवाने हैं जो आज भी कविताऐं, लेख, कहानीयां, लघुकथा या उपन्यासों के ज़रिये अपनी अटल छाप दिलों पे छोड़ रहें हैं।यदि आज हम अपने पुराणों को उठा के देखें तो युगों पूर्व भी […]

भाषा-साहित्य

खड़ी बोली हिंदी के प्रथम साहित्यकार

भारतेंदु हरिश्चंद्र जी का जन्म 9 सितम्‍बर 1850 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में तथा मृत्यु बीमारी से 6 जनवरी 1885 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में ही हुई । तब राज्य का नाम उत्तर प्रदेश नहीं था । उनकी मृत्यु महज 34 वर्ष 4 माह की आयु में हो गयी । वे एकसाथ कवि, कथाकार, लेखक, […]