सामाजिक

छातीकूटिए अमर रहें

दुनिया की आबादी का काफी हिस्सा औरों के सुख से दुःखी तथा औरों के दुःख से सुखी रहने वाले लोगों से भरा पड़ा है। भगवान का दिया हुआ इनके पास सब कुछ है, कहीं किसी चीज की कोई कमी नहीं है फिर भी दुःखी हैं, हमेशा अपने दुःखों, पीड़ाओं और अनमनेपन का जिक्र करते हुए […]

सामाजिक

आजादी की निश्चित सीमा जरूरी

विवाह तय होने के बाद शादी पूर्व तक लड़के लड़कियों की आजादी की निश्चित सीमा इसलिए भी जरूरी है कि समय के बदलाव की बयार में ठहरना खतरनाक होता है ,परंतु उड़ना बहुत खतरनाक। आज के बदलते परिवेश में जब शिक्षा का स्तर बढ़़त ले रहा है। सोशल मीडिया की जरुरत और उपयोग प्रभावी होती […]

सामाजिक

निरंकुश अभिव्यक्ति की आपदा

अभिव्यक्ति और दस्तावेजीकरण अब उस युग में पहुंच चुके हैं जहाँ इनकी अपार संभावनाएं और प्रचुर माध्यम उपलब्ध हैं। इनका जी भर कर और जम कर उपयोग हो रहा है। बिना किसी रोक-टोक और सीमा के बोला भी जा रहा है, लिखा भी जा रहा है, और परोसा भी जा रहा है। अब सब तरफ […]

अन्य बाल साहित्य सामाजिक

सवाल-जवाब- 3

प्यारे बच्चो, आयुष्मान-बुद्धिमान-सेवामान, हमें जब भी आपके जानने योग्य सामग्री मिलती है, हम पत्र के द्वारा आपके लिए प्रस्तुत करते हैं. आज जानकारी प्रस्तुत है भारत के इन 10 गांव के बारे में, जो शहरों से भी बेहतर हैं, कहीं आमदनी तो कहीं का रिवाज इन्हें बनाता है खास– साल 2011 की जनगणना के मुताबिक़ […]

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राष्ट्र चेतना

“राष्ट्र चेतना” यानी राष्ट्रीय भावना की जागृति। हालंकि इसका फलक बहुत ही विस्तारित है।परंतु राष्ट्र चेतना कोई मंदिर की घंटी नहीं है जो जब जी में आया बजा के चले आये। सबसे पहले तो राष्ट्र की चेतना को थोड़ा दूर रखिए और स्वयं में चेतना की जागृति करिए। राष्ट्र चेतना की जागृति कोई खेल नहीं […]

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खिलंदड़ी की चुनाव सभा

खिलंदड़ी की चुनाव सभा का बैनर देखकर हम रुक गए. रुकने का एक कारण तो चुनाव सभा के इस अजीबोगरीब नाम का होना था, दूसरे एक पुरानी-सी कार की ड्राइविंग सीट से उतरती हुई खिलंदड़ी को देखकर भी रुकना पड़ा. आप यह न समझें, कि खिलंदड़ी से हमारी पुरानी जान-पहचान थी. असल में हमने न […]

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जैसे हैं, वैसे ही रहें भी, और दिखें भी

जो हम हैं वह हैं ही, यह हमारी मौलिकता ही है कि हम ‘हम’ हैं। परमात्मा ने जैसा शरीर, मन और बुद्धि प्रदान की है उसी के अनुरूप साँचे में ढले हुए हैं। जैसे भी हम हैं वैसे हैं क्योंकि दुनिया में भगवान ने हर व्यक्ति को अलग मौलिक स्वरूप और गुणधर्म प्रदान किया है। […]

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औरत सदा महान

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः । यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः। एक औरत जिसे मर्यादा , प्रतिष्ठा, गरिमा , महिमा , इज़्ज़त , आबरू , हया , लज्जा , शर्म यातना , आदि पूरी जिम्मेदारी एक औरत के खाते में ही डाली गयी है। यू भी औरत को भारतीय संस्कृति में औरत का दर्जा दिया […]

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औरत सदा महान

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः । यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः। एक औरत जिसे मर्यादा , प्रतिष्ठा, गरिमा , महिमा , इज़्ज़त , आबरू , हया , लज्जा , शर्म यातना , आदि पूरी जिम्मेदारी एक औरत के खाते में ही डाली गयी है। यू भी औरत को भारतीय संस्कृति में औरत का दर्जा दिया […]

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सम्मान का बोझ

 कहीं पढ़ा था की लड़कियों का आत्मसम्मान बढ़ाओ शादी की उम्र नहीं,सही बात हैं,लड़कियों को सम्मान मिलना बहुत जरूरी हैं जैसे हर एक को जरूरी हैं,चाहे वह मर्द हो,लड़की हो या बच्चा हो।आत्मसम्मान से मानसिक हौंसला बढ़ता हैं,अपने आप पर विश्वास का बढ़ जाता  हैं।जितना आत्मवश्वास हैं अपने में उतना ही विश्वास पूर्वक कार्य कर […]