Category : सामाजिक

  • पलाश के रंग

    पलाश के रंग

    ऋतुराज वसंत के आगमन से प्रकृति जब रंगीन होने लगती है और फाल्गुन के आते ही वासंती रंग की धानी चुनरिया ओढ़ चुपके से उसे फाल्गुनी बना देता है | तब प्रकृति होली की हुड़दंग और...

  • सच की होली और उसकी सार्थकता

    सच की होली और उसकी सार्थकता

    सच की होली और उसकी सार्थकता         शरद ऋतु समाप्त हुई।बसन्त ऋतु आ गई।यानी कि अब होली आ गई।चारों ओर का वातावरण त्यौहार का बन गया।गले मिलेंगे।पुराने वैर भाव भुलाएंगे।भाईचारा बनायेंगे।सभी के प्रति समान और सम्मान...


  • फटाक-फटाक- 2

    फटाक-फटाक- 2

    तेजी से बदलते इस युग में खबरें भी तेजी से बदलती रहती हैं. तेजी से बदलती इन खबरों को सहेजने के लिए प्रस्तुत है एक नवीन प्रयास फटाक-फटाक. फटाक-फटाक के इस दूसरे अंक में ढेर सारी...





  • ठक-ठक, ठक-ठक-9

    ठक-ठक, ठक-ठक-9

    ठक-ठक, ठक-ठक-1 ”ठक-ठक, ठक-ठक”. ”कौन है?” ”मैं हूं एलिसा हीली.” ”कौन एलिसा हीली?” ”अरे भाई, मैं ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम की क्रिकेटर एलिसा हीली हूं.” ”नमस्ते जी, आपकी उपलब्धि?” ”मैंने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर 80 मीटर ऊंचाई...