इतिहास लेख सामाजिक

चीमन का बाजार दर्शन

बाजार के दर्शन की इच्छा उसी को रखनी चाहिए जिसके पास क्रय शक्ति और आवश्यकता में तालमेल बनाए रखने का सामर्थ्य हो वरना बाजार में अर्थशास्त्र का शैतान चमक-दमक के साथ विराजमान है जो आपको लूटना चाहता है। बाजार का दर्शन करने और अर्थशास्त्र रूपी मायावीशास्त्र से लड़ने में सक्षम है ‘चीमनलाल जी ‘ ये […]

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वाया बेबाकी

अगर आप में सेवा की भावना नहीं है, अगर आप दूसरे के प्रति मनभेद पालते हैं, तो यह कैसी आस्तिकता है ? भीतरघाती व्यक्तियों से बचकर ही रहना चाहिए, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष ! अगर मतभेद है तो ‘बेबाक़ीपन’ होंगे ही ! आप अपने हर कृत्य के लिए शाबासी नहीं पा सकते ! […]

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अपनी-अपनी आस्था

हमारे क्षेत्र में भाद्रपद शुक्ल एकादशी को लोक पर्व ‘करमा-धर्मा’ मनाए जाते हैं, जो कुंवारी संतान करते हैं, जिनमें बहन और भाई दोनों निर्जला उपवास रखते हैं और रात में ‘झूड़’ नामक पौधे की पूजा-अर्चना करते हैं । यह ब्राह्मण व पुरोहितविहीन पूजा है । पूजा में करम-धरम नामक दो भाइयों के आपसी प्रेम को […]

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यह कैसी सेवाभाव ?

मैंने ऐसी कथित मंगलव्रती और गुरुवारव्रती महिला को जानता हूँ, जो सास-ससुर को भूल रंगून से आये बैलून वाले पिया को और उनसे उत्पन्न संतान के सिवाय और किसी के बारे में नहीं सोचती है, वे भीखमंगे को दान नहीं करेगी, तो रिक्शेवाले से किराये देने में उलझेगी ! यह कैसी आस्तिकता है, भाई ! […]

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फ़ैशनेबल उपवास

यह कैसी आस्तिकता है, भाई ! सावन भर मुर्गी-मछली या लहसून-प्याज नहीं खाये, किन्तु जैसे ही सावन पूर्णिमा खत्म हुई कि अगले दिन लोग इनसब चीजों पर ऐसे टूट पड़ते हैं, जैसे- घाव को देखकर मक्खी व एक माह तक इन सब चीजों को  किसी तरह बर्दाश्त किए हुए थे ! हद हो गई, भाई […]

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कई-कई उधेड़बुन

जब हमारा संविधान इंग्लिश यानी अंग्रेजी में है, तो हिंदी को राष्ट्रभाषा समझना हमारा सनकपन है ! भारतीय संविधान में अंग्रेजी की लिपि का कोई उल्लेख नहीं है, जबकि हिंदी की लिपि देवनागरी का जिक्र है । एतदर्थ, हम अंग्रेजी को देवनागरी लिपि में भी लिख सकते हैं ! •••••• डॉ. अजय ! यह मेरी […]

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मणिपुर की कबुई जनजाति की जीवन शैली और धार्मिक विश्वास

कबुई मणिपुर के 29 आदिवासी समुदायों में से एक है I कबुई जनजाति ने अन्य समुदायों जैसे मीतै और मीतै पंगन (मणिपुरी मुसलमान) के साथ बहुत अच्छे संबंध स्थापित कर लिए हैं । मणिपुर की राजधानी इम्फाल के पूर्वी और पश्चिमी भाग में भी ये बसे हुए हैं। मिजोरम और मणिपुर की अन्य जनजातियों की […]

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दरकते रिश्ते

आज रिश्तों की नींव पैसों की चमक से दरकती जा रही है।अब तो नौ माह कोख में रखने वाली मां भी अपनी औलाद को पैसों के हिसाब से ही अपनत्व देने लगीं है।हर रिश्तों के बीच पैसे की चमक ने दरार पैदा कर दी है।माना की सभी ऐसे नहीं हैं पर अफसोस कि बहुतायत में […]

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नारी अंतर्मन

नारी एक घर को खूबसूरत बनाती है, उसे अपने ही ढंग से सजाती सँवारती है, लेकिन एक घर को और लाखों ज़िन्दगीयों को खूबसूरत बनाने वाली वाली नारी के खुद के अंतर्मन में क्या छिपा ये में डॉक्टर मिली भाटिया आर्टिस्ट अपनी सात पेंटिंग के माध्यम से नारी के अंतर्मन के भाव पेंटिंग में एक […]

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‘पंडित’ माने सिर्फ ‘ब्राह्मण’ नहीं !

‘पंडित’ से तात्पर्य ‘ब्राह्मण’ से नहीं है ! ‘पंडित’ का अर्थ ‘ज्ञाता’ से है और ज्ञाता सिर्फ़ ब्राह्मण नहीं होते !  संस्कृत का श्लोक पढ़ लिये या गढ़ लिये, तो आप ‘पंडित’ हो गए, ऐसे थोड़े ही पंडित कहाता है और न ही यह प्रसंग उद्धरणीय है ! पंडित तो ‘जुलाहे’ कबीर थे, जिसने कहा […]