सामाजिक

श्राद्ध की परंपरा को निभाते हुए इंसान: वर्तमान परिवेश में समीक्षा

कटु मगर सत्य है, सुनना चाहें तो सुन लीजिए और पढ़कर कुछ हृदय में जाग जाए तो सोचिएगा कि श्राद्ध का अर्थ क्या है ? अपने घर-परिवार के पितरों को प्रतिवर्ष श्रध्द्धांजली देना ! उनको ईश की तरह नमन कर ये बतलाना कि आप सब की कमी हमें बहुत खलती है या आपके आशीर्वाद से […]

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घातक साबित होती डेंगू के प्रकोप की अनदेखी

उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र इत्यादि कई राज्य इस समय वायरल बुखार और डेंगू के कहर से जूझ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में तो रहस्यमयी मानी जा रही बीमारी के अधिकांश मामलों में बहुत से मरीजों में डेंगू की पुष्टि भी हुई है। डेंगू और वायरल बुखार से विभिन्न राज्यों में सैंकड़ों […]

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स्त्री तन

कविताओं में नक्काशी सा तराशा गया स्त्री का तन हकीकत की धरातल पर वहशीपन की पहली पसंद बन जाता है। कहाँ उमा दुर्गा का दर्शन करती है मर्द की आँखें औरत में, उन्मादित होते आँखों की पुतली पल्लू को चीरकर आरपार बिंध जाती है। लज्जित सी समेटते खुद को बांध लेती है दायरे में, तकती […]

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बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण अवश्य करें

संस्कार वह क्रिया है जिसके संपन्न होने पर कोई भी योग्य बन जाता है । जिस प्रकार एक पौधे को खाद -पानी की अति आवश्यकता होती है, ठीक वैसे ही एक बच्चे के लिए संस्कारों की अति आवश्यकता होती है । भारतीय संस्कृति में संस्कारों पर बहुत अधिक बल दिया गया है । मनुष्य के […]

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संजा : प्रेम, एकता और सामंजस्य  का सृजन करती   

लोककलाओं की संस्थाए में बड़ी संख्या में लड़कियाँ एकत्रित होकर संजा बनाती है। छत्तीसगढ़ ,बुंदेलखंड क्षेत्र में लड़किया झाड़ की पत्तियाँ को विशेषकर नीबू को ओढ़नी उड़ाकर फूलों से सहेजने की प्रक्रिया को वे मामुलिया बोलते है पर्व मनाते है।लोक गीतों और कलाकृतियों को बचाने में कई स्थानों पर संजा उत्सव संस्थाए  पुनीत और प्रेरणादायी कार्य […]

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वर्तमान समाज

जैसा कि हम सभी जानते हैं “सामाजिकता” समाज शब्द से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है “समाज के भाव ” ! अगर हम वर्तमान समाज में “सामाजिकता” की बात करे तो  स्थित उतनी ठीक नहीं है लोगो की आपस में एकजुटता नहीं है, महिलाएं सुरक्षित नहीं है, समाज मे असामाजिक तत्वों का समावेश इतना ज्यादा […]

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क्यूँ पैदा होती है लड़कियां अपमानित होने के लिए

दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच गई पर कुछ लड़कीयों के लिए कुछ नहीं बदला, कुछ भी नहीं बदला। खून खौलता है जब मर्दानगी के पुतलों के हाथों रौंद दी जाती है बेटियाँ। कल कहीं पढ़ा की कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में जीन्स पहनने पर एक 17 साल की बच्ची को पीटकर […]

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पैरालम्पिक में दो पदक जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं अवनि

टोक्यो पैरालम्पिक में भारतीय खिलाडि़यों ने कमाल का प्रदर्शन किया और सबसे बड़ा कारनामा कर दिखाया भारत की पैरा शूटर अवनि लखेरा ने, जो 5 सितम्बर को पैरालम्पिक के समापन समारोह में भारतीय ध्वजवाहक बनी। दरअसल अवनि ने इस पैरालम्पिक में दो-दो पदक जीतकर ऐसा इतिहास रच डाला, जो अब तक ओलम्पिक या पैरालम्पिक के […]

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जीवन और समय तो चलते रहेंगे

कहते हैं समय और जीवन कभी ठहरता नहीं है, बस चलता रहता है।इसी पर मैंने कभी लिखा था कि -“समय समय के साथ यूँ भी चला जायेगा, समय ठहर कर भला क्या पायेगा?” मगर जीवन भी भला ठहर कर क्या हासिल कर लेगा। कुछ भी तो नहीं। जीवन और समय का तारतम्य कुछ ऐसा है […]

सामाजिक

साक्षर होने का अर्थ है खुद के सम्मान के प्रति जागरूक

(अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 08 सितम्बर विशेष)                 साक्षरता का अर्थ, मनुष्य के साक्षर अर्थात पढ़ने – लिखने की क्षमता से होता है किंतु, साक्षरता मनुष्य के पढ़े-लिखे होने के साथ-साथ सम्मान, अवसर और विकास से जुड़ा विषय है। जिससे व्यक्ति अपने साथ-साथ अपने परिवार, समाज और देश के […]