सामाजिक

बात का बतंगड़ – तिल का ताड़ – राई का पहाड़

वैश्विक स्तरपर हज़ारों वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति सभ्यता तथा बड़े बुजुर्गों की कहावतें और मुहावरों का पीढ़ियों से बहुत गुणगान, नाम है। आज भी हम भारतवंशियों को जो कि दुनिया के किसी भी कोने में बसे हो उसमें भारतीय संस्कृति सभ्यता का अंश किसी न किसी रूप में ज़रूर दिखेगा और किसी न किसी रूप […]

सामाजिक

क्रोध धैर्य और साहस की कमी का परिचायक

आज के युग में हर व्यक्ति को जीवन के किसी न किसी पड़ाव में विपरीत परिस्थितियों का निर्माण होने के कारणों में कहीं ना कहीं एक कारण उसका गुस्सा या क्रोध भी होगा। अगर हम अत्यंत संवेदन शीलता और गहनता से उत्पन्न हुई उन परिस्थितियों की गहनता से जांच करेंगे तो हमें जरूर यह कारण […]

सामाजिक

नानक दुखिया सब संसार

वैश्विक स्तरपर भारत अपने अनमोल संस्कृति, सभ्यता, सशक्त मानवीय बौद्धिक क्षमता आध्यात्मिकता के लिए प्रतिष्ठित, प्रेरणा स्रोत और भविष्य का वैश्विक नेतृत्व करने वाले देश के रूप में तीव्रता से स्थापित होने की राह पर है, और हो भी क्यों ना? क्योंकि हर भारतीय नागरिक में एक ज़ज्बा जुनून और जांबाज़ी समाई हुई है, वह […]

सामाजिक

गृहस्थी – रिश्तों में सामंजस्य जरूरी है

संयुक्त परिवार में रहने वाले लोगों से घर स्वर्ग बन जाता है और इस घर में रहने वाले लोगों के आचरण से बनता है खुशनुमा माहौल। लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं जिसकी वजह से खुशनुमा माहौल गलतफहमी की वजह से और एक दूसरे को नीचा दिखाने की वजह से कलह पूर्ण […]

सामाजिक

स्पीड ब्रेकर और खड्डे लाते हैं दुर्भाग्य और अनिष्ट

राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर गांव-कस्बों और शहरों तक की सड़कों पर पिछले कुछ वर्षों से स्पीड़ ब्रेकरों का चलन बेतहाशा बढ़ा है। गति को रोकने और दुर्घटनाओं को टालने से मकसद से बनाये गए स्पीड ब्रेकरों से दुर्घटनाओं पर कितनी रोक लग पाती है यह अलग बात हैं, मगर यह भी सच है कि स्पीड […]

सामाजिक

क्या ये दुनिया स्त्रियों के लायक है

क्यूँ हंमेशा महिलाओं को दुनिया के लायक बनाने पर ज़ोर दिया जाता है? सवाल ये है कि, क्या दुनिया स्त्रियों के लायक है? अगर है! तो साहित्य कौनसे विमर्श की बातें कर रहा है? पेपर पत्रिकाओं में रोज़ छप रहे स्त्री दमन के किस्से कौन छपवा रहा है? नारिवाद का जन्म इसी समाज से उद्भव हुआ […]

सामाजिक

शिष्टाचार – बनें लोकप्रिय बनें सर्वप्रिय

यहां हर कोई चाहता है कि वह सबका प्रिय पात्र बना रहे, सभी उसकी बात माने। आपके मन में भी यह ख्याल आते होंगे कि इसमें कोई मुश्किल बात नहीं है जरूरत है तो बस शिष्टाचार के कुछ नियम को अपनाने की। यदि आप सबके सर्वप्रिय बनना चाहते हैं तो अपने व्यवहार को मृदुल बनाए। […]

सामाजिक

सोनपुर का मेला

सोनपुर का मेला जो कभी आजादी की योजना-स्थल के रूप में जाना जाता था, अब से आवाज दबाने के रूप में जाना जाएगा। जब कभी रिजनीति लड़खड़ाती है तो साहित्य आगे बढ़कर उसे थाम लेता है, वाला युग समाप्त हो रहा है। अब तो दोनों लड़खड़ा रहे हैं और दोनों एक-दूसरे से गुत्थम गुत्थ कर […]

सामाजिक

अनुशासनहीनता – बच्चों को सिखायें संस्कृति

भारतीय समाज में आने वाली पीढ़ियां ना जाने किस और जा रही है और आने वाला समय ना जाने किस मोड़ पर बच्चों को ले जाएगा। कई बार ऐसा होता है यदि बच्चे पढ़ाई लिखाई में कमजोर है और उनके रिपोर्ट कार्ड में अंक कम आते हैं तो माता-पिता गुस्से में अपने बच्चें को पीट […]

सामाजिक

सकारात्मक सोच

हमारे जीवन में हमेशा विचारों का आदान प्रदान चलता रहता है. जब हम नकारात्मक विचार अपने मन मे लाते है तो चीजे भी वैसी देखने लगती है.  यह हमारी सोच पर निर्भर करता है हम क्या सोचते है यही हमारी सोच का नतीजा होता है .जैसे हमारे विचार सकारात्मक है तो हमें सब कुछ अच्छा […]