सामाजिक

यदि दुनिया का हर स्कूल जाने वाला बच्चा हड़ताल कर दे तो ?  

स्कूल जाने का पहला दिन था। बस इतना ही याद है कि मेरा पहला शिक्षक एक अध्यापिका थी। बच्चे टाट-पट्टी पर बैठे हुए थे। मुझे भी वहीं बैठना था। अध्यापिका के माथे पर पूर्णमासी के चाँद सरीखी, बड़ी-सी लेकिन सूर्ख लाल बिन्दी चमक रही थी। सिर के बीचों-बीच लंबी माँग करीने से निकाली गई थी। […]

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बलात्कार कैसे रुकेंगे

आज 16 दिसंबर है।  निर्भया कांड की दूसरी पुण्यतिथि। मीडिया वालों को मसाला मिल गया। नारे लगाने वालो को काम मिल गया। मोमबत्ती वालो को इन्वर्टर के युग में मोमबत्ती याद आ गई।  धरना करने वाले बेरोजगार झोलेवालो को भी काम मिल गया। मगर दो साल में कुछ नहीं बदला।  आज भी लड़कियों के बलात्कार […]

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अब मलाला को मलाल नहीं, सत्यार्थी जैसा पिता जो मिला

हालाँकि पिछले साल ही मलाला युसुफजई को नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन सूची में नाम भेजा गया था, पर किसी कारण वश वह पिछले साल यह पुरस्कार नही पा सकी थी. पिछले साल शांति का नोबल पुरस्कार रासायनिक हथियारों के खिलाफ लड़ने वाली OPCW नाम की संस्था को पुरस्कार दिया गया था. पर इस साल […]

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स्वाध्याय क्यों करें?

वैदिक ग्रन्थों के स्वाध्याय से हमें अपने अस्तित्व व सत्ता का यथार्थ ज्ञान होता है। हमारे अतिरिक्त संसार में जो सृष्टि की रचना-पालन व संहार करने वाली सत्ता “ईश्वर” है उसका भी तर्क, युक्ति व प्राचीन ऋषि परम्परा से चला आ रहा सत्य ज्ञान प्राप्त होता है। यदि जीवात्मा, ईश्वर का ज्ञान होने के साथ […]

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आइये उखाड़ फेंके ईश्वर / अल्लाह के जाल को

विश्व में जितने भी देश उन्नति कर पायें हैं वे धर्म के जाल से मुक्त होके ही कर पाए हैं , धर्म के जाल से मुक्त होने की वैचारिक क्रांति उन देशो में पहले शुरू हो गई थी। जर्मनी में मार्टिन लूथर ने पोप और उसकी प्रतिनिधियों को चुनौती 16 शताब्दी में ही देनी शुरू […]

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एक सच्ची घटना

एक घटना किसी पत्रिका में पढ़ी थी शायद आप लोग भी पढ़े हों। यह घटना नहीं अपितु सच्चाई है। कुछ दिन पहले कहीं तुफान आया था जिसमें बहुत जान माल का नुकसान हुआ था। इस तूफान के कारण बहुत सारे बच्चे अनाथ हो गये थें। कुछ लड़कियों को एक अनाथालय में व्यवस्था की गई थी […]

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क्या ऐसे  होगा महिला सशक्तिकरण…

इस चित्र में आप जिसकी फोटो देख रहे हो वो कोई सामान्य अपराधी नही अपितु डेल्ही में इन्दर लोक रेप  काण्ड का मुख्य अभियुक्त है. रेप  और छेड़छाड़ की घटनाएं आम बात हो गयी ह. और यह घटना तो राजधानी दिल्ली की है. यह सब देखकर  बस एक हे बात कहने का मन करता है […]

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धर्मान्तरण से उठे प्रश्न

आगरा में कुछ मुसलमानों के हिन्दू बनने से धर्मान्तरण के बारे में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं. हिन्दू संगठन इसको घर वापसी बताते हैं, जो गलत भी नहीं है, क्योंकि इन सबके पूर्वज पहले हिन्दू ही थे. लेकिन जिन सेकुलर (शर्म-निरपेक्ष) दलों की राजनीति ही मुसलमानों के वोटों पर चलती है, उनको मिर्च लगना […]

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यह हत्या नहीं स्त्रियों का सामूहिक नरसंहार है

छत्तीसगढ़ में नसबंदी के दौरान 14 स्त्रियों की मौत ने एक बार फिर सोचने को मजबूर किया कि हमारे देश में आम स्त्रियों की कीमत क्या है। न उनकी ज़िन्दगी का कोई मोल है न उनकी मृत्यु का कोई अर्थ ! हम ज़बरदस्त गैरबराबरी से जूझ रहे ऐसे संवेदनहीन और असभ्य समाज का हिस्सा जा रहे […]

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पूँजीवादी शिक्षा

ज्ञान की खोज में लगे रहनेवाले तथा ज्ञान पिपासू हर किसी की संतुष्टि शिक्षा-प्राप्ति में ही है। शिक्षा; स्कूल, विश्वविद्यालय आदि विशेष संस्थानों पर केन्द्रित होने पर भी वह जन्म से लेकर मृत्यु तक आदमी के अंतःस्थल में निवास करनेवाली एक तीव्र इच्छा है। आदमी लेख-आलेखों,किताबों तथा विद्वानों के संपर्क में रहकर एवं नये-नये आयामों […]