सामाजिक

माँ का मातृत्व

जब मै छोटा था तो माँ से एक सवाल गर्मी के मौसम मे पूछा करता था|माँ.गौरेया इतनी ऊँचे छज्जे मे रह रहे उनकी छोटे -छोटे चूजो को इतनी भीषण गर्मी मे पानी कैसे पिलाती होगी? क्या उन्हे प्यास नहीं लगती होगी| आप हमें तो जरा-जरा सी देर मे प्यास लगाने पर पानी पिला देती हो |माँ ने कहा- हर […]

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खुद का निर्माण करें

मानव जीवन अनमोल है,इस बात से इंकार कोई नहीं करता।परंतु यह भी विडंबना ही है कि ईश्वर अंश रुपी शरीर का हम उतना मान सम्मान नहीं करते, जितना वास्तव में हमें करना चाहिए।यह सच है कि हम अपने मिट्टी के पुतले सरीखे शरीर के ऊपरी सौंदर्य की चिंता बहुत करते हैं,अनेकानेक सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग […]

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खुद पर खुद शासन करो

क्या शारीरिक अत्याचार ही घरेलू हिंसा कहलाता है ? मानसिक प्रताड़ना का क्या? लगता है कुछ स्त्रियाँ प्रताड़ना सहने के लिए ही पैदा हुई होती है, ऐसी स्त्रियों को पता भी नहीं होता घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के बहुत सारे प्रकार होते है। शारीरिक अत्याचार को ही हिंसा समझने वाली स्त्रियों को मौखिक अत्याचार, लैंगिक अत्याचार […]

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संवेदनशील रिश्तों को तराजू में कैसे तौलें

हर रिश्ते को कितनी आसानी से अपनी-अपनी सोच के अनुसार तोल देते हैं लोग.आज हम बात कर रहे हैं एक बेहद खूबसूरत रिश्ते की जिसकी गर्माहट हर किसी को सर्वाधिक भाती है जो रिश्ता हम स्वयं बनाते हैं हमें किसी वंश परम्परा के तहत नहीं मिलता,हर तरह के भेदभाव से परे ‘दोस्ती’ का रिश्ता.सबसे साफ़-सबसे […]

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व्यथा आम इंसान की

बड़े-बड़े महापुरुषों ने कहा है कि जब सपना देखना है तो बड़ी सपने देखो छोटे से सपने का ख्याल भी मत करो! फिलहाल एक सपने का वर्णन कर रहा हूं, पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद एक छोटी सी कंपनी में जॉब कर लिया, छोटी-छोटी खुशियों को बटोर कर जिंदगी का आनंद भी लिया जा […]

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हमारी आर्थिक तस्वीर को बदल सकते हैं मछली एवं पशु पालन

कृषि के साथ-साथ पशुधन पालन, डेयरी, मत्स्य पालन गतिविधियाँ सभ्यता के प्रारंभ से मानव जीवन का  एक अभिन्न अंग हैं. इन गतिविधियों से खाद्य व्यवस्था में सुधार हुआ और पशुधन को सहेजने में मदद जलवायु और स्थलाकृति के कारण पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्र ने  भारत की उन्नति में एक प्रमुख सामाजिक-आर्थिक भूमिका निभाई […]

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अब स्त्री विमर्श बंद हो

आज इक्कीसवीं सदी में भी कुछ स्त्रियों के प्रति कुछ मर्दों का नज़रिया अट्ठारहवीं सदी वाला ही होता है उनकी नज़रों में स्त्री कम अक्कल, हीनबुद्धी और भोगने की वस्तु मात्र है। क्यूँ आज भी लेखकों की कलम बार-बार स्त्री विमर्श में लिखने को मजबूर होती है। आज भी स्त्रियों के लिए पन्ने भर-भरकर लिखा […]

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महिला सशक्तिकरण

समझ नहीं आ रहा कहां से लिखना शुरू करूँ अक्सर लम्बा लिखने से जी चुराती रही हूं मैं, पर अगर अब न लिखी तो मेरा दिमाग कभी शांत नहीं होगा बार- बार उन्हीं बातों और परिस्थितियों में उलझा रहेगा हालांकि लिखकर हालात से निपटा नहीं जा सकता पर थोड़ा शायद मेरा मन हल्का हो जाए। […]

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२०२० ने धैर्य की परिभाषा सिखाई

वर्ष २०२०, तुम उन सबके लिए बहुत दयालु व उदार रहे, जो अगला वर्ष देखने वाले हैं। तुमने हमें धैर्य और दृढ़ता की परिभाषा सिखाई। परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने से लेकर घर का बना भोजन, बोर्ड गेम, सिरीज़ व फिल्में, अतिरिक्त नींद का समय, घर का सारा काम और विश्राम किया। इस […]

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समय बदला हम कब बदलेंगे

अनमना सबकी नफ़रत का मारा 2020 का साल भी चला गया, ओर भी कई साल आएंगे चले जाएंगे। वक्त का काम है बदलना दिन महीने साल बदलते रहते है, पुराना छूटता है नयापन सबको पसंद है परिवर्तन संसार का नियम है हर चीज़ में होता रहता है। पर क्या हम बदलते है ? हमारे वाणी, […]