लेख सामाजिक

बुढ़ापे तक होती है प्यार-तकरार

नहाय-खाय के साथ दिनांक 7 फ़रवरी से प्यार का पर्व ‘वैलेंटाइन-डे’ शुरू हो गई जो की वास्तविक रूप में 14 फ़रवरी को पूरे नशे में पूरी दुनिया में मनाई गई लेकिन ‘प्यार का पर्व’ यही खत्म नहीं हुआ– ‘मार्केटिंग’ को बढ़ावा देने के लिए ‘उच्च कोटि’ के कारोबारी ने प्यार के इस पर्व में ग्रीटिंग-कार्ड्स […]

लेख सामाजिक

यों नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते क्यों देवता ?

पूरी दुनिया 8 मार्च को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा को जारी रखे हुए हैं । पहले तो नहीं, परन्तु अब जब यह सोचता हूँ, तो मुझे ताज़्ज़ुब होती है कि वर्ष के 365 दिनों में सिर्फ 1 दिन ही महिलाओं के नाम क्यों ? क्या एक दिन ही उनके […]

सामाजिक

गरीबों का लक अनलॉक कैसे होता है साहब?

कोरोना काल में  दुनिया वाकई काफी बदल गई . लॉक डाउन अब अन लॉक की ओर अग्रसर है , लेकिन इस दुनिया में  एक दुनिया ऐसी भी है , जो लॉक डाउन और अनलॉक का कायदे से मतलब नहीं जानती . उसे बस इतना पता है कि लगातार बंदी से उसके  जीवन की  दुश्वारियां बहुत […]

लेख सामाजिक स्वास्थ्य

संस्कृति के साथ पाँच उदाहरण

1. ‘खुले में शौच से मुक्त’ (ODF) अभियान से सूअर हैं खफ़ा ! सदियों से ‘गू’ को चाव से खाने वाले सूअर इन दिनों खफ़ा हैं । मेरे गांव में लगभग 300 सूअर हैं, जो ‘गू’ (मानव मल) के अलावा अन्य किसी प्रकार के भोजन नहीं  करते हैं । सरकार पर पशुओं का आहार छिनने […]

सामाजिक

कर्त्तव्य परायणता से जियो और जीने दो की राह

कर्तव्य कई तरह के होते हैं लेकिन आज जिस कर्तव्य की बात हो रही वह है नागरिको के कर्तव्य की।देश के नागरिक होने के नाते आपके कर्तव्य क्या है ? क्या पालन हो रहे है? शायद नहीं और हो भी रहे दोनो ही स्थिति है। गलत कामो के प्रति आवाज उठाना, घूसखोरो से सावधान रहना,आपदा […]

सामाजिक

क्या ऑनलाइन क्लासें तमाशा हैं?

आजकल सुर्खियों पर है ” नो स्कूल  – नो फीस ” मानो सारी आपदा बच्चों की स्कूल फीस पर ही आई है। घर घर में पकवान बने,  शादियां हो रही हैं,  ऑनलाइन शॉपिंग हो रही है, ऑनलाइन फूड  आ रहे हैं, शराब पार्टी चल रही है और बाकी बहुत कुछ है जो मजे से चल […]

सामाजिक

जीवन का अंतिम सत्य

कभी किसी ने बैठकर सोचा ,नहीं सोचा होगा, क्योंकि हम अपने जीवन में इतने व्यस्त हैं, कि हमारे पास इस मानव जीवन के अंतिम सत्य के बारे में सोचने का समय नहीं है, हमारे पास केवल अपनी तृष्णाओं की पूर्ति का समय है ,हमें केवल धन एकत्रित करना है, हमें केवल भोग भोगने हैं, हमें […]

सामाजिक

क्या स्मृति अमर होती है ?

एक जानकारी के मुताबिक पलक झपकने से तीन गुना तेज याद आती है घटनाएँ के बारे में पढ़ा| स्मृतियाँ सिमेटिक -भाषा के तथ्य समझने पर व एपिसोडिक – व्यक्ति विशेष के लिए खास महत्व रखती है । रटंत क्रिया से भी याददाश्त मजबूत होती है।चिंतनीय प्रश्न यह उठता है कि क्या इंसान के मरने के […]

लेख सामाजिक

23 जून यानी अन्तरराष्ट्रीय विधवा दिवस

23 जून यानी ‘अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस’ है ! बड़े समाजविद राजा राम मोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर आदि ने विधवाओं के पुनर्विवाह कराकर ऐसी देवियों को उनकी नीरस हो चले जीवन को सुंदर और सुखद अहसास दिला पाए थे । मैं जिस समाज में रहता हूँ, यहां वैधव्य जीवन में आ चुकी ब्राह्मण कन्याओं के पुनर्विवाह […]

लेख सामाजिक

बेनामी संपत्ति : लालची मन

प्रायः गाँव व कसबों में ऐसी इमारते खड़ी हैं अथवा जमीन खाली पड़ी हैं, जिनके कोई देखनहार नहीं हैं जो न तो टैक्स चुकाते हैं, न ही जमीन की उर्वरता से फसल काटते हैं, न ही उनमें शाक-भाजी उगाते हैं। बड़े-बुजुर्ग भी ऐसे बेनामी-संपत्ति के बारे में नहीं बता पाते हैं । ऐसी संपत्ति का […]