Category : सामाजिक

  • विचार शक्ति

    विचार शक्ति

    हमारा व्यक्तित्व विचार और चिन्तन से बनता है। यह जीवन भर के चिन्तन और समस्त विचारों का प्रतिफल होता है। हम विचारों के द्वारा ही उन्नति कर जीवन के उच्चतम लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। जीवन...


  • शिष्टाचार

    शिष्टाचार

    “ सत्य बोलना ही देवलोक असत्य बोलना ही मर्त्यलोक आचार ही स्वर्ग, अनाचार ही नरक ॥“ ये बातें आचार और शिष्टाचार के संदर्भ में बारहवीं शताब्दी के महामानव श्री बसवेश्वर की हैं। शिष्टाचार का अत्यंत महत्वपूर्ण...

  • साहित्य और समाज

    साहित्य और समाज

    “समाज नष्ट हो सकता है, राष्ट्र भी नष्ट हो सकता है, किन्तु साहित्य का नाश कभी नहीं हो सकता।“ ये उक्ति महान विद्वान योननागोची की है। जिससे हम साहित्य की महत्ता को जान सकते हैं। साहित्य...


  • पुरुषार्थ

    पुरुषार्थ

    जिन कार्यों को करने से हमारे प्रयोजन सिद्ध होते हैं वे पुरुषार्थ कहलाते हैं। वेदादि शास्त्रों में मनुष्य के करने योग्य चार पुरुषार्थ बताए गए हैं- धर्म अर्थ, काम और मोक्ष। धर्मपूर्वक धन प्राप्त करने हेतु...


  • महानता

    महानता

    किसी भी व्यक्ति की महानता को आंकने के लिए प्रत्येक समाज या विचारधारा के अलग-अलग पैमाने होते हैं। इन्हीं के आधार पर अशोक, अकबर और सिकन्दर आदि को महान कहा गया है। वेदों में महानता के...