Category : विविध


  • व्यंग्य- चेला चंटाल

    व्यंग्य- चेला चंटाल

    अक्सर गुरु घंटाल की चर्चा होती है. मैंने विचार किया कि अगर गुरु घंटाल हो सकता है तो चेला चंटाल क्यों नहीं. लखनऊ के सनकी जी ने लिखा है- गुरु-गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय बलिहारी...







  • खूबसूरत गुलदस्ता “क़ैफियत”

    खूबसूरत गुलदस्ता “क़ैफियत”

    साहित्याकाश में अत्यंत वेग से घूमता सुप्रसिद्ध.. खूबसूरत लेखनी की धनिका.. लेखिका रेणू वर्मा का प्रथम ग़ज़ल सन्ग्रह “कैफ़ियत” जिन्हें मैं दूसरा नाम दूंगा प्राणों का संगीत। लेखिका ने अपने जीवन के अनगिनत अनुभवों को सहेजकर…...