Category : विविध




  • गलतिओ का  इनाम

    गलतिओ का इनाम

    साल भर का काम, काम ना आया.. मैंने अपने गलतिओ का इनाम है पाया .. इतनी गलतिओ के बाद भी कंपनी ने तरक्की पाई है पर मेरी तरक्की किसी को भी याद नहीं आई है मर...

  • जो है, सो है

    जो है, सो है

    पूरे घर में गन्दगी का अम्बार था, घर की तिजोरी पर हर कोई हाथ साफ़ कर रहा था, जेवर-सोना-चांदी सब लूट चुका था, सारे तालें टूटे पड़े थे, हर कोई बाप का माल समझ कर मलाई...

  • माया महा ठगनी हम जानी

    माया महा ठगनी हम जानी

    व्यंग्य साहित्य की एक विधा है जो उपहास, मजाक और ताने का मिलाजुला स्वरुप है। हिन्दी में हरिशंकर परसाई और श्रीलाल शुक्ल व्यंग्य  विधा के प्रमुख हस्ताक्षर हैं।  हर किसी पर इस अस्त्र का उपयोग नहीं...