पुस्तक समीक्षा

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हरियाणा के रजिस्टर्ड सांड़ निरीह ‘बकरी’ का ‘ग्रुप रेप’ कर रहे ? शेम ! शेम ! हंस / मई 2018 पढ़ा. सम्पादक की लेखनी-धार पैनी होती जा रही है, किंतु हम भारतीय ‘पैनिक’ नहीं हो रहे हैं. ‘हंस’ की पहचान सम्पादकीय से है. प्रेमचंदीय ‘हंस’ में यह होती थी या नहीं, पता नहीं ! परंतु […]

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एक अद्भुत उपन्यास की समीक्षा

पहली बार ऐसी ‘नॉवेल’ लिखी गयी है, जिसकी शुरुआत ही बेहद अद्भुत है, परमपिता के यमदरबार और विचित्रगुप्त की लेखाजोखा बहीखाता से घटनाचक्र शुरू होकर कब सपने से निकल वास्तविकता में प्रवेश कर जाते हैं और भारत की ‘शिक्षा व्यवस्था’ पर कमेंट करती चली जाती है, पाठकों को भी पता चल नहीं पाता है । […]

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कविता-पुस्तक ‘ये उदास चेहरे’ की समीक्षा

‘ये उदास चेहरे’ के प्रकाशक ‘कविता कोसी, ग़ाज़ियाबाद’ है तथा प्रकाशन वर्ष  2011 है। साहित्य अकादमी के पूर्वी सचिव व वरिष्ठ समीक्षक डॉ. देवेन्द्र कुमार ‘देवेश’ ने इस संग्रह पर लिखा है । यथा- कवयित्री के विशिष्ट शब्द-प्रयोग तथा नारी अस्मिता की रक्षा के लिए उनकी चेतना और रोष तो संगृहीत कविताओं में बिम्बधर्मी प्रयोगों […]

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जय विजय, जून 2020 : एक समीक्षा

‘जय विजय’ (जून 2020) का अवलोकन किया। अन्य अंकों की भाँति प्रस्तुतांक की ‘संपादकीय’ पढ़कर उन व्यक्तियों के प्रति आक्रोश से भर उठा, जिन्होंने गर्भवती हथिनी को बारूद खिलाकर प्राणांत कर दिए, वह भी केरल जैसे 100% शिक्षित राज्य में ! मैं उस असंवेदित व्यक्तियों की कुंठाओं में जानना चाहूँगा, न कि उनके धर्म को […]

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परिश्रम पारसमणि और पुखराज है -हीरो वाधवानी

हीरो वाधवानी जी अजमेर राजस्थान में जन्मे देश के ख्यातिनाम सूक्तिकार के नाम से जाने जाते हैं। इनकी अदबी आइनो,प्रेरक अर्थपूर्ण कथन और सूक्तियाँ सकारात्मक सुविचार सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ कृतियाँ प्रमुख है। आपकी कृतियाँ निराश ,हताश,अवसाद, तनाव से ग्रस्त व्यक्तियों को  जीवन जीने की नई राह बताती है। जीवन का सार छुपा होता है आपकी […]

पुस्तक समीक्षा भाषा-साहित्य लेख

‘उदास चेहरों’ के लिए बहुविध कविताएँ रचती हैं स्वर्णलता ‘विश्वफूल

“जो 10 दिनों के अंदर पाती प्रेषित करने का वायदा करके जाय और 100 दिनों के बाद भी उनका कोई अता-पता न हो, तो भी उनपर थोड़े-से ही सही भरोसा जरूर करनी चाहिए ।” कवयित्री स्वर्णलता ‘विश्वफूल’ के ये शब्द उदास चेहरे में भी मुस्कराहट की कुछ वजह तो बनती ही है । लेखक-समीक्षक टी. […]

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बांसुरी : एक जोड़ी आँखें

कवि स्वर्गीय सुरेंद्र कुमार चौधरी की काव्य रचना “बांसुरी ” एक जोड़ी आँखे जीवन के सभी रंगो को समाहित किये हुए है ,जैसे श्री कृष्ण १६ कलाओं में निपुण थे उसी तरह काव्य रचना :बांसुरी ” १६ कलाओं का मिश्रण है ।काव्य रचना में शव्दों का जैसा चयन है वो उनकी गहराई को प्रदर्शित कर […]

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दगैल : प्राध्यापकों की काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा

आज श्री रूप सिंह चंदेल का उपन्यास “दगैल” पढ़कर समाप्त किया I इसके पात्र कई दिनों तक मेरी नींद में भी आते- जाते और मन को आंदोलित करते रहे I इस उपन्यास में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों की काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा प्रस्तुत किया गया है I नारी मुक्ति और नारी स्वतंत्रता की वकालत करनेवाले […]

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“पाथर टीला” : ग्राम्य जीवन के बदलते मिज़ाज का दस्तावेज

जब से गांव में शहरीकरण की प्रवृत्ति बढ़ी है और शिक्षा का प्रसार व व्यापारीकरण हुआ है तब से एकता की जगह अनेकता, निर्माण की जगह संहार और जोड़ने की जगह तोड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है I अब हर जाति के अलग -अलग खूंटे हैं और अपनी-अपनी पंचायत I सामाजिक न्याय के सुनहरे […]

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“उत्तर – पूर्वी भारत के आदिवासी” पुस्तक

मेरी पुस्तक “उत्तर – पूर्वी भारत के आदिवासी” प्रकाशित हो चुकी है I यह अमेज़न पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है I पुस्तक की विषय सूची इस प्रकार है: 1.परिचय : भूमि और लोग – पूर्वोत्तर भारत का परिचयात्मक वर्णन, बंगलादेशी घुसपैठ, पूर्वोत्तर की पौराणिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पूर्वोत्तर के पर्यटन स्थल, पूर्वोत्तर की भाषाएँ, धर्म, […]