पुस्तक समीक्षा

चिंतन जीवन में बहुल्य है

हमारे आस पास ऐसे बहुत से लोग हैं वे हमेशा जिंदगी की भागम भाग में  चिंता ग्रस्त रहते हैं लेकिन ऐसे में चिंतन जैसी पुस्तक हताशा से हारे हुए इंसान के अंदर  विश्वास पैदा करने का काम करने में सफल हो सकती है । मुझे चिंतन पुस्तक को पढ़ कर ऐसा लगता है मानो जैसे  […]

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आनन्द की सुखद अनुभूति : आनन्द मंजरी

हिन्दी कविता साहित्य में पहेलियों और मुकरियों का चलन आदिकाल से रहा है। बौध्दिक विकास के साथ स्वस्थ मनोरंजन इनका उद्देश्य होता है। स्वयं को भारत का तोता कहने वाले अमीर खुसरो से लेकर भारतेन्दु हरिश्चंद्र तक अनेक कवियों ने मुकरियों का लेखन किया है। समकालीन परिदृश्य में श्री त्रिलोक सिंह ठकुरेला द्वारा विरचित आनंद […]

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काव्य संग्रह-जिंदगी के साज पर

युवा कवि/साहित्यकार अनुरोध कुमार श्रीवास्तव जी के साहित्य के असीम आकाश में मेरी छोटी सी कोशिश-शायद पसंद आये के भाव उनकी सहजता को रेखांकित करने के लिए पर्याप्त है। विभिन्न विषयों पर गहन चिंतन और परिवार, समाज, राष्ट्र के साथ संबंधों, परिस्थिति और घटनाओं पर पैनी नजर रखने और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति समर्पित रहकर […]

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सफ़र हमारे : स्वप्न और यथार्थ से रूबरू कराते रोमांचक यात्रा वृत्तांत

“सूखा ताल नीचे गहरी खाई में था। उसके साथ-साथ ही पहाड़ की यह खड़ी दीवार थी, जिसके किनारे पर खड़े होने की हिम्मत नहीं की जा सकती थी। पहाड़ के टूटने की आवाजें दहशत भर देने वाली थीं। कच्चे पहाड़ में अटके हुए पत्थरों पर टिकी निगाहें..पत्थर अब गिरा कि तब। जहां चल रहे थे, […]

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छूटा पीछे पहाड़ : स्मृतियों के वातायन से आता शीतल पवन का झोंका

 साहित्य की विविध विधाओं में संस्मरण, यात्रावृत्त एवं आत्मकथाएं पाठकों को बहुत लुभाती रही हैं। कारण कि हर कोई अपने प्रिय लेखक के जीवन और तत्कालीन देश समाज के जीवन को देखना-समझना चाहता है। एक लेखक के पास ही वह हुनर एवं कला कौशल होता है कि वह पाठक को घर बैठे अतीत की यात्रा […]

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अपने काव्य संग्रह “कस्तूरी” से कस्तूरी की भांति सुगंध फैलाती : वसुधा गोयल

वसुधा गोयल का काव्य संग्रह “कस्तूरी” में एक सुंदर भावों से,सुंदर एहसासों से संजोया गया अनुभव से साहित्य संसार को मूर्त रूप देकर कस्तूरी की तरह सुगंध फैलाता है। अपनी मस्त मिजाज की कवयित्री वसुधा गोयल अपने सरल शब्दों में अनुभव के आकाश का आधार लिए अपने जीवन में संघर्ष,पीड़ा ,दु:ख ,दर्द की व्यथा – […]

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सजीवता और स्थानीयता लिए कहानियां

भारत दोसी का कहानी संग्रह ” महुडी  ” ग्रामीण जन जीवन पर लिखी गई 27 कहानियों का नायाब गुलदस्ता है  ।    दक्षिण राजस्थान का ग्रामीण जीवन  इस संग्रह की कथा वस्तु है  जो गरीब,  वंचित,  शोषित है  जिसमें तनाव,  द्वंद,  उलझन,  मानसिक भटकाव, दिशाहीनता आदि है इसका  पात्रों के माध्यम से सजीव चित्रण किया […]

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मैं किस किस का बालम

गुदगुदाने वाले संस्मरणों और “मैं किस किस का बालम” नाम वाले संस्मरण संग्रह में कुल छब्बीस संस्मरणों को समाहित कर पुस्तक रुपए में प्रकाशित संग्रह को वयोवृद्ध लेखक जगदीश खेतान जी ने अपने माता पिता स्व. जमुना देवी और स्व.छेदी लाल जी को समर्पित कर बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है। विभिन्न विषयों पर […]

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‘पेंटिंग अकेली है’ कहानी संग्रह पर एक सूक्ष्म दृष्टि

हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध कथाकार सामाजिक, आर्थिक और मानवीय अधिकारों के लिए संघर्षरत होकर विविध समुदायों को उनको अधिकारों को दिलाने में सहायक लेखिका चित्रा मुद्गल जी की कहानी संग्रह है– ‘पेंटिग अकेली हैं ‘ इसकी कथा भूमि महिलाओं, श्रमिकों, दलितों और आदि वासी , वंचित समाज वा उपेक्षित बुजुर्गों के संघर्षरत जीवन , द्वंद्व […]

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मानवीय संवेदनाओं की प्रहरी है डॉ. अंजु सक्सेना की कविताएं

श्रीमती डॉक्टर अंजु सक्सेना एक अनुभवी कवयित्री एवं सधी हुई साहित्यकार हैं। अपने काव्य संग्रह “गुबार” में हर तरह की रचनाओं से पाठकों का ध्यान अनेक पहलुओं पर आकर्षित किया है।इस काव्य संग्रह में 70 रचनाएं समाहित है । जिसमें  मानवता, नैतिकता, न्याय,अधिकार, पर्यावरण,सकारात्मक ऊर्जा, नीतिपरक,आशावादी दृष्टिकोण, रहस्यवाद, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज,अन्याय के प्रति आवाज, […]