पुस्तक समीक्षा

अभिन्न समीक्षा

कुछ देर पहले ही बाहर से घर आया हूँ ! बारिश में भींग गया हूँ ! ठंढक का बारिश शरीर को स्थिर कर देता है ! माँ ने मेरे लिए पूवे (पूआ) छाने ! एक महिला मित्र से सुखद-संदेश भी अभी-अभी प्राप्त हुई । इन सब चीजों से ठंढ मौसम में ऊष्मा लाने का प्रयास […]

पुस्तक समीक्षा

प्रेम का प्रणम्य रूप

कवि मिथिलेश राय की कविता तो पढ़िये कि कैसे एक उम्र व पड़ाव आने के बाद स्त्रियाँ मरद बन जाती हैं ? सत्यश:, इस कविता ने मुझे अबतक बाँधे रखी है, तो इसे आप भी पढ़ लीजिए ! अर्थात- “एक उम्र के बाद स्त्रियाँ मरद हो जाती है वे तनकर चलती हैं, तेज बोलती हैं […]

पुस्तक समीक्षा

जाने कितनी दफा ?

जाने कितनी दफा ही द्वार खुले होंगे, शायद हरिवंश राय बच्चन जी ने कहा– “याद मुझे है वह दिन पहले, जिसदिन तुझको प्यार किया; तेरा स्वागत करने को जब खोल हृदय का द्वार दिया !” ….तो यह भी कहा– “मन-मन्दिर में तुझे बिठाकर तेरा जब सत्कार किया; झुक-झुक तेरे चरणों को जब चुम्बन बारम्बार किया […]

पुस्तक समीक्षा

एक कप ‘चा’ !

लेखक श्री मनोज अभिज्ञान के अनुसार- यह सोचना मूर्खता होगी कि आने वाली हर पीढ़ी बाबा साहब का अंधानुकरण ही करें या मान्यवर कांशीराम के मार्ग पर ही चले! समाज के विकास की सतत प्रक्रिया होती है, इसलिए नए तथ्यों के आलोक में हमेशा नई रणनीति के साथ ही कुछ नया करना पड़ता है। बाबा […]

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सेल्फी विथ 2 बुक्स

सेल्फ़ी विथ 2 बुक्स ••• ये दोनों पुस्तक [1. पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद (शोध), 2. लव इन डार्विन (नाट्य पटकथा)] दूसरी बार भारतीय रेलवे के पास पहुँची है । भारतीय रेलवे में कार्यरत श्री ललित कुमार सिंह की कर्मभूमि सम्पूर्ण भारत है, उनके हाथों दोनों पुस्तकों को देख अतिप्रसन्न हूँ । मेरे अनुजसम ‘ललित’ मनिहारी […]

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मानवीय संवेदनाओं का आईना लघु फिल्म “अंटू की अम्मा” रिलीज़

समाज के बदलते सरोकार और मर्यादाओं की असामयिक मौत आज के युग की भयावह त्रासदी है।सुकेत संस्कृति साहित्य एवं जन कल्याण मंच के अध्यक्ष डाक्टर हिमेन्द्र बाली हिम का कहना है कि दृष्टि में बसे स्वहित की शूद्र सोच को बेनकाब करती फिल्म अंट्टू की अम्मा में गाय जैसे निरीह व मूक जीव के प्रति […]

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विभिन्न भावों से अलंकृत रचनाओ का समावेश – “लम्हो की खामोशियाँ”

‘लम्हों की खामोशियाँ’ शाहाना परवीन का प्रथम काव्य संग्रह है । शाहाना जी को बचपन से ही साहित्य में विशेष रूचि थी ।उनके पिताजी सदैव ही उनके लिए प्रेरणा स्रोत रहे। जो अब इस दुनिया में नहीं है। किंतु अपने विचारों और व्यक्तित्व की छाप और प्रभाव शाहाना जी पर छोड़ गए हैं ।शाहाना जी […]

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नीरज नीर

देश के चर्चित कवि और कथाकार श्री नीरज नीर सर केंद्रीय सरकार में वरेण्य अधिकारी हैं । वे राँची विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र स्नातक हैं । कई साझा काव्य-संग्रह और कथा-संग्रह में उनकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं, तथापि ‘जंगल में पागल हाथी और ढोल’ शीर्षक पुस्तक से तो नीर जी काफी चर्चा में आये। अब भी […]

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जिंदगी का पासवर्ड

‘तुम मेरी ज़िंदगी का पासवर्ड हो’ शीर्षक -पुस्तक गिफ़्ट की है, मेरे ज़िन्दगी के अनन्यतम दिलरुबा -पासवर्ड ‘आशु’ जी ने ! उनसे मुलाकात के 5 वर्ष से अधिक हो गए…. हर दिन हमदोनों के बीच नए-नए अनुभव लेकर आते हैं, खट्टी भी, मीठी भी ! वे खुद शिक्षक हैं तथा अनुजतुल्य हैं…. कहानी तो विराट […]

पुस्तक समीक्षा

पेशे से सम्मान तक

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर, किन्तु देश के सुयोग्य फ़ोटोग्राफ़र श्री सौरभ दूबे ‘शरद’, जो मूलतः गोरखपुर निवासी हैं, परंतु अभी बंगलोर रह रहे हैं…. के हाथों पुस्तकद्वय ‘पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद (शोध)’ और ‘लव इन डार्विन (नाट्य पटकथा)’ अर्थात् दोनों पुस्तक ‘चंद्रयान-2’ की भाँति यात्रा कर दक्षिण भारत व बंगलोर व कर्नाटक भी पहुँच गयी […]