पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा – धनुष उठाओ हे अवधेश

संत कबीर की उक्ति “दु:ख में सुमिरन सब करै….” आज भी प्रयोजन युक्त है। दुखिया है कौन! कबीर बाबा बताते हैं कि, “…….दुखिया दास कबीर है…..”। अर्थात् जो समाज के बारे में सोचेगा, वह सामाजिक अवमूल्यन देखकर दुखी अवश्य होगा और एक सामाजिक प्राणी के नाते मनुष्य होने की यह निर्विवाद शर्त भी है। ऐसी […]

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“देवम बाल उपन्यास”

बन्धुवर, कुछ समय पूर्व खटीमा निवासी आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ जी ने मेरे बाल उपन्यास “देवम बाल उपन्यास” की समीक्षा की थी। मैं उसे आपके साथ साझा कर रहा हूँ। आशा है आपको पसंद आएगा। धन्यवाद। -आनन्द विश्वास पुस्तक समीक्षा-“देवम बाल उपन्यास” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) सीख का संगम है “देवम बाल-उपन्यास” लगभग दो माह […]

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“मिटने वाली रात नहीं” 

बन्धुवर, कुछ समय पूर्व खटीमा निवासी आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ जी ने मेरे काव्य-संकलन “मिटने वाली रात नहीं” की समीक्षा की थी। मैं उसे आपके साथ साझा कर रहा हूँ। आशा है आपको अच्छा लगेगा। धन्यवाद। -आनन्द विश्वास पुस्तक समीक्षा समीक्षा-कर्ता- आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ जी “मिटने वाली रात नहीं”  लगभग दो माह पूर्व […]

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लावारिस लाशें कहीं, और कहीं ताबूत

कोरोना काल का सदुपयोग करते हुए वरिष्ठ कवि तथा हिंदी के जाने-माने दोहाकार डॉ रामनिवास मानव ने ‘बदल गए दस्तूर’ शीर्षक दोहा संग्रह तैयार कर दिया है। यह डॉ मानव का चौथा दोहा-संग्रह और उनकी प्रकाशित होने वाली 54वीं पुस्तक है। जो विमोचन के उपरांत शीघ्र ही पाठकों के हाथों में होगी। पुस्तक की विषय […]

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छि: छि:

हरियाणा के रजिस्टर्ड सांड़ निरीह ‘बकरी’ का ‘ग्रुप रेप’ कर रहे ? शेम ! शेम ! हंस / मई 2018 पढ़ा. सम्पादक की लेखनी-धार पैनी होती जा रही है, किंतु हम भारतीय ‘पैनिक’ नहीं हो रहे हैं. ‘हंस’ की पहचान सम्पादकीय से है. प्रेमचंदीय ‘हंस’ में यह होती थी या नहीं, पता नहीं ! परंतु […]

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एक अद्भुत उपन्यास की समीक्षा

पहली बार ऐसी ‘नॉवेल’ लिखी गयी है, जिसकी शुरुआत ही बेहद अद्भुत है, परमपिता के यमदरबार और विचित्रगुप्त की लेखाजोखा बहीखाता से घटनाचक्र शुरू होकर कब सपने से निकल वास्तविकता में प्रवेश कर जाते हैं और भारत की ‘शिक्षा व्यवस्था’ पर कमेंट करती चली जाती है, पाठकों को भी पता चल नहीं पाता है । […]

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कविता-पुस्तक ‘ये उदास चेहरे’ की समीक्षा

‘ये उदास चेहरे’ के प्रकाशक ‘कविता कोसी, ग़ाज़ियाबाद’ है तथा प्रकाशन वर्ष  2011 है। साहित्य अकादमी के पूर्वी सचिव व वरिष्ठ समीक्षक डॉ. देवेन्द्र कुमार ‘देवेश’ ने इस संग्रह पर लिखा है । यथा- कवयित्री के विशिष्ट शब्द-प्रयोग तथा नारी अस्मिता की रक्षा के लिए उनकी चेतना और रोष तो संगृहीत कविताओं में बिम्बधर्मी प्रयोगों […]

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जय विजय, जून 2020 : एक समीक्षा

‘जय विजय’ (जून 2020) का अवलोकन किया। अन्य अंकों की भाँति प्रस्तुतांक की ‘संपादकीय’ पढ़कर उन व्यक्तियों के प्रति आक्रोश से भर उठा, जिन्होंने गर्भवती हथिनी को बारूद खिलाकर प्राणांत कर दिए, वह भी केरल जैसे 100% शिक्षित राज्य में ! मैं उस असंवेदित व्यक्तियों की कुंठाओं में जानना चाहूँगा, न कि उनके धर्म को […]

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परिश्रम पारसमणि और पुखराज है -हीरो वाधवानी

हीरो वाधवानी जी अजमेर राजस्थान में जन्मे देश के ख्यातिनाम सूक्तिकार के नाम से जाने जाते हैं। इनकी अदबी आइनो,प्रेरक अर्थपूर्ण कथन और सूक्तियाँ सकारात्मक सुविचार सकारात्मक अर्थपूर्ण सूक्तियाँ कृतियाँ प्रमुख है। आपकी कृतियाँ निराश ,हताश,अवसाद, तनाव से ग्रस्त व्यक्तियों को  जीवन जीने की नई राह बताती है। जीवन का सार छुपा होता है आपकी […]

पुस्तक समीक्षा भाषा-साहित्य लेख

‘उदास चेहरों’ के लिए बहुविध कविताएँ रचती हैं स्वर्णलता ‘विश्वफूल

“जो 10 दिनों के अंदर पाती प्रेषित करने का वायदा करके जाय और 100 दिनों के बाद भी उनका कोई अता-पता न हो, तो भी उनपर थोड़े-से ही सही भरोसा जरूर करनी चाहिए ।” कवयित्री स्वर्णलता ‘विश्वफूल’ के ये शब्द उदास चेहरे में भी मुस्कराहट की कुछ वजह तो बनती ही है । लेखक-समीक्षक टी. […]