हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य : आस्तीन के सांप

मुझे एक बात समझ में नहीं आई. ये जो आस्तीन के सांप होते हैं उनका आकार कितना होता है … ? ऐसा इसलिए पूछ रही हूँ क्योंकि आजकल आस्तीन बहुत छोटी- छोटी सी होती है, बल्कि नाम रह गया आस्तीनों का।आस्तीन के नाम पे अक्सर हम महिलाओं की पोशाकों पर एक छोटा सा छज्जा मिलता […]

हास्य व्यंग्य

खट्ठा-मीठा : ‘यादव’ सिंह ‘जाटव’

वे यादव भी हैं और जाटव भी। एक ही व्यक्ति में ये दो महान् योग्यतायें होना एक दुर्लभ बात है। इसलिए उनको मुलायम सिंह का भी प्यार मिला है और मायावती का भी। दो परस्पर विरोधियों का समान स्नेह पाना भी एक दुर्लभ गुण है और महापुरुष होने का लक्षण है। वे महानता के नायाब […]

हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य : पलकां में बंद कर राखूंली…

एक गाना अक्सर सुनने में आता है । थ्हांने काजलियौ बणाल्यूं… म्हारै नैणा में रमाल्यूं राज पलकां में बंद कर राखूंली ….. हो …. हो… बहुत ही ख़ूबसूरत गीत है। लता जी व मुकेश जी की आवाज़ में गाया हुआ मेरा पसंदीदा गीत होने के कारण मैं भी अक्सर गुनगुनाती रहती हूँ… एक दिन यूँ ही […]

हास्य व्यंग्य

नाम कुछ है और काम कुछ और है

आज का दौर यही है नाम कुछ है और काम कुछ और है – मिस्टर दानी ने एक फूटी कौडी दान में नहीं दी और दूल्हे जान ने जिंदगी भर शादी नहीं की एक घर में छोटूराम सबसे बड़े भाई हैं उनकी पत्नी का नाम छुट्टो है पर उसकी साढ़े छ्ह फुट लंबाई है “दर्शन […]

ब्लॉग/परिचर्चा विविध सामाजिक हास्य व्यंग्य

नव वर्ष के ‘नव’ पर शब्दों की बगावत !

नववर्ष ! -हर्ष ही हर्ष ! किस बात का ? -एक नए साल का ! क्या वाकई ? सबका नया साल है आज ?? नहीं बिलकुल नहीं ! सबका नया साल अपने अपने धर्म जाती तिथि और न जाने किस किस आधार पर अलग अलग दिन आता है ! फिर ३१ दिसम्बर की रात बारह […]

हास्य व्यंग्य

चाय की प्याली में

बाबू प्रेमलाल न सिर्फ नाम बल्कि काम से भी बाबू ही थे। वे अपने को आॅफिस का बाबू कम बापू ज्यादा मानते थे। उनके अनुसार परिवार में जो स्थिति बाप की होती है, वही आॅफिस में बाबू की। बाबू किसी भी दफ्तर की शोभा होता है। जिस प्रकार मूर्ति के बिना मंदिर की कल्पना अधूरी […]

विविध

पुस्तक समीक्षा : काव्य संग्रह – ‘हमिंग बर्ड’

‘हमिंग बर्ड’ रचनाकार मुकेशकुमार सिन्हा की साहित्य जगत के क्षेत्र में पहली उड़ान हैं ।बड़े अरमानों और हौसलों से उन्होंने इस सन्ग्रह को पाठको के सामने रखा है ।पुस्तक का नाम और कलेवर बहुत सार्थक है कवि की भावनाओं के अनुरूप । पुस्तक का हर पन्ना हमिंग बर्ड के नन्हे पंख के समान लग रहा […]

कविता सामाजिक हास्य व्यंग्य

डोलू में बैठा भगवान

नंगे पाँव, मैला जिस्म उस पर लटकता फटा कुर्ता और कमर से सरकती फटी निक्कर हाथ में छोटा डोलू और डोलू में बैठा भगवान तुतलाती आवाज़ बगवान के नाम कुछ दे दे अँकल हाथ में भगवान और भगवान की कीमत एक रुपया किसी ने दिया किसी ने दुदकारा कुछ बच्चों का य़ू बचपन है संवारा […]

विविध

बच्चों का खेल नहीं है बाल साहित्य

‘बाल साहित्य कैसा हो?’ यह प्रश्न आज भी नया है। यह प्रश्न बीते कल तक भी नया-सा था। बाल साहित्य कैसा होना चाहिए? यह प्रश्न आने वाले समय में भी नया ही रहेगा। इस प्रश्न का उत्तर न तो कल एक था, न ही आज है। दरअसल यह  प्रश्न  विविध उत्तर की मांग करता है। कारण सीधा-सा है। कल […]

अन्य लेख विविध

बाल साहित्य और भाषा शिक्षण

बाल साहित्य और भाषा शिक्षण -मनोहर चमोली ‘मनु’ बाल साहित्य से शिक्षण कार्य हो सकता है। यह भाषा का शिक्षक तो जानता भी है और अक्सर वह अपने वादन में पाठ्य पुस्तक से इतर के बाल साहित्य की चर्चा करता भी है। मैंने कक्षा सात और आठ के बच्चों को कुछ बाल कविताएँ पढ़ने को […]