राजनीति हास्य व्यंग्य

केजरीवाल जी, नो उल्लू बनाविंग…

कालीबाड़ी में हुए मोहल्ला सभा में केजरीवाल ने स्वीकार किया की उन्हें लगा की वो सरकार पूर्ण बहुत से बना लेंगे इसलिए इस्तीफा दिया. केजरीवाल राजनीति को अपने “लगने”और “न लगने” के चश्मे से ही तय करते है. उन्हें “लगता है” की गडकरी भ्रष्ट है, उन्हें  “लगता है की” संविधान भ्रष्ट है, उन्हें लगता है […]

हास्य व्यंग्य

ईमानदारों का ध्रुवीकरण कब होगा जी ?

वैसे तो इस लेख के शीर्षक से समझने वाले सब समझ जायेंगे ! इसीलिए इसमे आगे कुछ लिखने की गुंजाइश है भी या नहीं इस सोच में मैं भी था !! लेकिन फिर याद आया की शीर्षक के अंत में लगे “जी” से खुद के साथ साथ  खुद के उठाये मुद्दों और “राज” की “नैतिक” […]

ब्लॉग/परिचर्चा हास्य व्यंग्य

स्वर्ग में धरना

स्वर्ग के विश्वसनीय एकाउंटेन्ट चित्रगुप्त व्हाट्स एप पर इंद्र से कुछ निर्देश ले रहे थे, तभी मैं नारायण-नारायण करते हुए प्रकट हुआ. “कैसे आना हुआ मुनिवर? इस बार के पृथ्वी लोक का टूर कैसा रहा? क्या क्या किया? कहाँ कहाँ घूमे? अब आगे का क्या प्लान है और ये आपके सर पे टोपी कैसी है? […]