Category : विविध



  • व्यंग्य – ऋतुराज का राज!

    व्यंग्य – ऋतुराज का राज!

    पधारो वसंत! तुम हर साल की तरह इस बार भी बिन बुलाए आ गए? बड़े बेशरम हो भाई!! तुम ऋतुराज हो! कुछ तो अपने मान-सम्मान और स्वाभिमान का ख्याल रखा करो? तुमसे अच्छी तो तुम्हारी ‘रानी-बरखा’...


  • पुस्तक-मेले में लेखक

    पुस्तक-मेले में लेखक

    इधर सोशल मीडिया पर किसी पुस्तक मेले की खूब चर्चा चली ! मैं भी यहीं से पुस्तक-मेले में हो रही गतिविधियों को वाच करता रहा। जहाँ लेखकों की गहमागहमी के साथ उनकी पुस्तकों के विमोचन की...