Category : विविध




  • व्यंग – राजनीति घर की

    व्यंग – राजनीति घर की

    भाई भरोसे लाल कई दिन जब मुझ से मिलने आये तो बड़े झुंझलाये हुए थे। मैंने उनकी  झुंझलाहट का  जानना  चाहा  तो  वे  मुझ पर ही  भड़क  उठे और बोले कि तुम भी क्या सच में...


  • सिरफिरों के हाथों में…….

    सिरफिरों के हाथों में…….

    लोग बोलते रहते हैं कि वह तो सिरफिरा है और उससे बहुत परेशान हैं। सिरफिरा सोचता है कि उसकी स्थिति सिरफिरे लोगों ने बनाई है।बहरहाल सिरफिरापन नियति है सिरफिरों की।अब सिरफिरों से आप परेशान होते हैं...