हास्य व्यंग्य

कोरोना और करूणा ….

भयावह रोग कोरोना से मैं भी बुरी तरह डरा हुआ हूं। लेकिन भला कर भी क्या सकता हूं। क्या घर से निकले बगैर मेरा काम चल सकता है।  क्या मैं बवंडर थमने तक घर पर आराम कर सकता हूं। जैसा समाज के स्रभांत लोग कर रहे हैं। जीविकोपार्जन की कश्मकश के दौरान क्या मैं  भीड़भाड़ […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – एक शानदार व्यापार

       “मैडम जी नमस्कार! क्या हाल है?सब ठीक है न? अच्छा आपके बेरोजगार बेटे के लिए एक बढ़िया काम लाया हूँ।”        एक ही सांस में रस्तोगी जी ने कहा।       उषा मैडम रस्तोगी जी  की बातों को सुनकर मुस्कुरा दीं। “लगता है आपके बेटे की कोई लाटरी लग […]

हास्य व्यंग्य

लिल्लीघोड़ी पर सवार कौवा

“आपके लेखन में साहित्यिकता नहीं है!” लेखकीय मन से जुड़ने की कोशिश में मेरे सामाजिक सरोकार वाले मन ने मुझसे कहा। “रात-दिन तुम्हारी चिंता में रहता हूँ और इसी कारण लेखकीय कर्म में निरत हूँ, फिर यह कैसे कह सकते हो?” मेरे अंदर का लेखक बोला। “इसलिए कि आपका लेखन मुझे मान्यता दिलाने में असफल […]

हास्य व्यंग्य

कांग्रेसी नमक का आत्मालाप

दंगाई देश के सम्मानित नागरिक होते हैं, वे भी देश का नमक खाते हैं, उनका भी घर है, परिवार है, समाज है I दंगाइयों की भी निजता होती है, उनका भी अपना निजी जीवन होता है, उनके पोस्टर सार्वजनिक स्थलों पर लगाकर उनकी निजता पर सरकार ने हमला किया है I सरकार जवाब दे कि […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : मेरे होते हुये तू दूसरा मुर्गा न फंसा।

इन दिनों शायर प्यारेलाल बड़े उदास से रहते हैं।मायूसी से भरे दिन एवं खोयी-खोयी रातें जैसे-तैसे कट रहीं हैं।लगातार आ रही नयी फिल्मों के दर्द भरे गीत उन्हें रोने पर विवश कर रहे हैं।दरसल ये सब शायर प्यारेलाल की जिंदगी में पहली बार हो रहा है।जिस कमनीय चतुर कन्या के ‘मोहब्बत नामक भ्रमजाल’ में शायर […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – हर्रा लगे न फ़िटकरी!

नकली सोना असली सोने से कुछ ज़्यादा ही चमक का स्वामी होता है।लेकिन जब नकली से असली पीछे छूटने लगे तो असली का क्या काम रह जाता है ? जो उपलब्धि असली से भी नहीं पाई जा सकी और नकली ने वह हासिल करा दी , तो कौन भला हज़ारों गुना कीमती असली को अपने […]

हास्य व्यंग्य

हमहूं त देशहित में इहाँ फंसा पड़ा अही !

सीट-बेल्ट बाँधकर एक्सीलेटर दबाने के लिए जैसे ही उसपर पैर रखा, चिहुँक उठा, “ये ल्यौ ! घिसइया तो कार का बोनट पीट रहा है!” और “अरे गुरू! एत्ता दिन बाद अइन मउके पर मिल्यो, जइसे कहूँ हेराई गै रह्यो!” उवाचते हुए मिलने की खुशी भी जाहिर करता सुनाई दिया| मेरी यह बात कि “ड्यूटी पर […]

हास्य व्यंग्य

ट्रेन और टॉयलट…!!

ट्रेन के टॉयलट्स और यात्रियों में बिल्कुल सास – बहू सा संबंध हैं। पता नहीं लोग कौन सा फ्रस्ट्रेशन इन टॉयलट्स पर निकालते हैं। आजादी के इतने सालों बाद भी देश में चुनाव शौचालय के मुद्दे पर लड़े जाते हैं। किसने कितने शौचालय बनवाए और किसने नहीं  बनवाए , इस पर सियासी रार छिड़ी रहती […]

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लघु – हास्य — जाती हुई वह

अच्छा तो तुम जा रही हो ?अब कैसे कहें कि जाओ।और कैसे कहें कि मत जाओ। हम कुछ भी तो नहीं कह सकते। क्योंकि न तो तुम हमारे कहने आती हो तो जाओगी भी क्यों? अब तुम्हें जाना है , तो जाना ही है। अपना कोई बस नहीं। कहते हुए अच्छा तो नहीं लग रहा […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग – बेंगलुरू में टच स्क्रीन वाले रेस्तराँ

बेंगलुरू में टच स्क्रीन वाले रेस्तराँ का शुभारंभ कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू ढ़ेर सारे सेल्फ सर्विस होटलों, बाग – बगीचों, पुराने विशाल पेड़ों के अलावा, शहर और गांव की मिली – जुली संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिलता है। यहां का मौसम 10 महिने सर्द, सुहाना, लुभावना रहता है। आईटी हब के अलावा इसकी […]