हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – आदमी का सरल होना !

कभी आपने इस बात पर विचार किया है कि ‘क्याआदमी कभी सरल भी हो सकता है?’ अपने अध्ययन काल में एक कहावत पढ़ी थी : ‘कुत्ते की पूँछ बारह साल तक घूरे में गाड़ कर रखा गया ,किंतु सीधी नहीं हुई।’ चूँकि यह कहावत किसी कुत्ते ,बिल्ली या चूहे ने नहीं बनाई ,इसलिए इसे अन्योक्तिपरक […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – मुड़-मुड़ के तो देख

हाँ ,हम तुम्हीं से कह रहे हैं।तुम अच्छी तरह से समझ तो गए ही होगे कि तुम्हें पीछे मुड़कर देखने का भी समय नहीं है।अब समय होगा भी क्यों ? क्योंकि तुम्हारे पास पीछे मुड़कर देखना ही शेष नहीं रह गया है। तुम तो बस आगे ही देखने वाले जीव हो।ठीक वैसे ही जैसे गैंडे […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – सब ते भले वे मूढ़ जन

संसार में जितने भी जीव देह धारण करते हैं;मुझे लगता है कि सबका एक ही उद्देश्य है। और वह है :आनंद प्राप्त करना। येन केन प्रकारेण उसकी सारी खोज ‘आंनद प्राप्ति’ की ही होती हैं।यह हर जीव की योनि पर निर्भर करता है कि उसे किस विधि से अधिक और लंबे समय तक आंनद प्राप्त […]

हास्य व्यंग्य

खेल महाराष्ट्र का : तीन पहियों वाली गाड़ी

“बहुत दिनों बाद आज कुछ सोचते सोचते अच्छी नींद आ गई। जब नींद अच्छी हो तो सपने का आना तो तय ही हैं। सपने में ही सही करोना के डर से बाहर जाने से डरने वाली मैं बाहर जाने के लिए तैयार होने लगी।अच्छी जींस और टॉप पहन सड़क के किनारे सवारी की खोज में […]

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ज्यों-ज्यों डूबे, स्याम रंग (व्यंग्य)

कुछ लोगों का जन्म विरोध की कोख से होता है। वे तलवार की धार पर गर्दन रखेंगे। कुल्हाड़ी पर पैर रखेंगे। जेठ मास की तपती दोपहरी में दीपक लेकर सड़कों पर भटकेंगे, और तो और गंजों की बस्ती में कंघों का व्यापार करेंगे। समझाने की कोशिश करने पर इसे अपना संवैधानिक और विरोध करने का […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – अथ श्री बुलडोजर कथा

इस समय हमारे देश सहित विदेशों में भी मोदी जी से भी ज्यादा लोकप्रियता बुलडोजर की है वैसे बुलडोजर को इतना फेमस यूपी वाले बाबा ने किया है। चहुंओर बुलडोजर का डंका बज रहा है। हालांकि मोदी सरकार ने बुलडोजर का ही नहीं, अपितु भांति-भांति की करनियों-अकरनियों, सब का डंका बजाया है। बुलडोजर के संग-संग हिजाब […]

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व्यंग्य – आजकल घर की कुल देवी और देवता

गर्मियों की छुट्टियों के उपलक्ष में घर में भांति भांति के मेहमान आए हुए थे।मैंने भी खूब शरबत आदि बना रखे थे,जिस का सब बड़े प्यार से मजे ले ले कर सेवन करतें थे।सुबह नाश्ते के बाद शाम चार बजे भी तो मैंने सोचा खाना तो जैसे तैसे गर्मी में बन ही जाता हैं किंतु […]

हास्य व्यंग्य

असत्याग्रह (व्यंग्य)

मैं बचपन से बहुत झूठ बोलता हूँ। लेकिन सत्याग्रह करने से कभी नहीं डरा। इस मामले श्रीकृष्ण मेरे आदर्श रहे। रंगे हाथों माखन चोरी करते पकड़े जाते लेकिन यशोदा मैया के सामने उनका सत्याग्रह सफल हो जाता। इसलिए सत्याग्रह करना भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। मुझे गर्व है कि मैं भारतीय हूँ । सतयुग […]

हास्य व्यंग्य

महँगाई सत्यं ब्रह्म मिथ्या

विद्वान कहते हैं कि इस जगत में सब नश्वर है।  गलत बात।  एक चीज़ और है जो शाश्वत, अजर, अमर और अविनाशी है। बताइए क्या?  आत्मा।  एकदम गलत जवाब। फिर वही घिसे-पिटे जवाब!!! किसी ने देखा है क्या इस आत्मा नाम के कीड़े को? कहाँ से आता है? कहाँ निकल जाता है? बस युगों से […]

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पाषाण – उत्सव (व्यंग्य)

देश पाषाण युग की ओर लौट रहा है। पाषाण उत्सव मना रहा है। पत्थर में भगवान तलाशे जा रहे हैं और पत्थरबाजी कर उसे बेइज़्जत होने से बचाया जा रहा है।।मानव की पहली खोज आग थी, जो उसने दो पत्थरों को रगड़कर प्राप्त किया था। आग लगाना सीख कर उसने सभ्य होने की दिशा में […]