Category : हास्य व्यंग्य


  • खूँटा और विकास

    खूँटा और विकास

    मेरी समस्या बड़ी अजीब है! वह यह कि विकास कराने और इसकी देखभाल करने वालों के हत्थे चढ़ चुके विकास को क्या कहूँ? मेरे लिए विकास अदृश्य टाइप की चीज नहीं है। कुछ लोग विकास को...





  • बाँध-संस्कृति

    बाँध-संस्कृति

    “बंधवा पर महवीर विराजै” बचपन में जब इसे सुना था तब तक बांध से परिचित भी नहीं हो पाया था! इसी दौरान उपमन्यु वाली कहानी जरूर पढ़ी थी और जाना था कि, छोटी सी कोई “बंधी”...



  • जॅानी जाॅनी यस पापा…

    जॅानी जाॅनी यस पापा…

    मुझे नई दिल्ली की सुबह नहीं सोहाती, न शाम, न रात.  हर समय गाड़ियों का झुंड, हर ओर कंक्रीट का जाल,  चिल्ल पों…पां पी… हर जगह लगे वो विज्ञापन का लंबा चौड़ा बोर्ड भी नहीं रिझाता,...