हास्य व्यंग्य

तरल पदार्थ

चुनाव की ऋतु थी, वैसे ही जैसे प्रेम करने की ऋतु होती है, गोलमाल करने की ऋतु होती है, रिश्वत लेने की ऋतु होती है और घी में डालडा और डालडा में चूना मिलाकर बेचने की ऋतु होती है I इसे आप मौसम भी कह सकते हैं I क्षेत्र के सर्वमान्य और सर्वव्यापी नेताजी कुमार […]

हास्य व्यंग्य

घोटाले का समाजशास्त्र

अपने देश में जब से घोटालों का धारावाहिक आरंभ हुआ है तब से रिश्वतजीवियों की बची – खुची अपराध भावना भी जाती रही है I कल की ही बात है , गुप्ता जी मिल गए I वे हमारे पुराने परिचित हैं , एक सरकारी विभाग में क्लर्क है I रिश्वत के बिना किसी फाइल को […]

हास्य व्यंग्य

भोग- विलास पार्टी का घोषणा पत्र

आजकल जिसे देखो सरकार को गाली देता रहता है जैसे सरकार न हुई, गाँव की भौजाई हो गई I ‘अहर्निशं घूसम प्रियम’ के प्रति अखंड निष्ठा रखनेवाले अधिकारी भी भ्रष्टाचार का रोना रोते हैं I बालू के पुल बनानेवाले ठेकेदार, कमीशनखोर आधुनिक विश्वकर्मा अभियंता, निर्दोष नागरिकों पर बेवजह डंडे बरसानेवाले पुलिस अधिकारी, फाइलों पर कुंडली […]

हास्य व्यंग्य

आत्मनिर्भरता की गाथा

आज आत्मनिर्भर शब्द सुनकर ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो धरती पर स्वर्ग का रचना होने वाला है। भारतीय नेताओं के मुंह आत्मनिर्भर सुनकर आज मन बहुत प्रसन्न हो रहा है, राजनीति आत्मनिर्भरता शब्द में आत्मा का नामोनिशान नहीं है। निर्भरता तो पूर्वजों की एक अमानत और संस्कृति है। हमारे समाज के लोग हमेशा नजर उठाए […]

हास्य व्यंग्य

फेसबुकिया वैराग्य

लॉकडाउन में फेसबुक लाइव का दौर जमकर चला। हमारे चन्द्रप्रकाश चंचल उर्फ चंदू भैया ने भी दिन के पन्द्रह घंटे किसी न किसी कवि या कवयित्री का लाइव देखा और प्रति मिनट किसी न किसी लाइन को कोड करके वाह और लाजवाब लिखा तो, कभी तालियों वाली इमोजी लगा कर अपने भी ऑनलाइन होने का […]

हास्य व्यंग्य

हास्य व्यंग्य- किसम किसम के लोग

इन दो महीनो में जितना ‘वाट्सएप’ चलाया है, उतना कभी नहीं चलाया था। इससे प्राप्त ज्ञान व अनुभव के आधार पर कुछ नए किस्म के लोगों से परिचय हुआ, इन लोगों में वे शामिल नहीं हैं जो बिना नागा,तीसों दिन अलसुबह “गुड माॅर्निंग” शुभ प्रभात के किसी उपदेशात्मक संदेश को वाट्सएप पर भेजते हैं…! या […]

हास्य व्यंग्य

सब धान बाईस पसेरी

बिहार के नियोजित शिक्षकों का विजन 2020 यानी उनकी सोच लिए एक बिल्कुल ही नई व डेब्यू सरकार के साथ नियोजित शिक्षक केंद्रित हो ! अगर परिवार में किसी को चपरासी की नौकरी है, तो उनके बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस नहीं होंगे क्या ? एक शिक्षक के चावल व आलू-प्याज चुराने से या छात्रा […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य- चलो, फुर्सत हो गई अब मर जाओ

एक समय था, जब आदमी कहता था कि मरने की फुर्सत नहीं है, आदमी का ये जुमला सुन कर ही लगाता है कि कोरोना आदमी के फुर्सत से मरने की व्यवस्था करने आया है। लॉकडाउन लगवाकर सबको फुर्सत करवा दी और कह रहा है- लो मरो, अब फुर्सत है। पर मारना कोई नहीं चाहता हर […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – मौसम शुरू हो गया है

सबका अपना एक मौसम होता है। बिना मौसम के कुछ भी अच्छा नहीं लगता।आज पर्यावरण दिवस से पर्यावरण मित्रों का भी मौसम शुरू हो गया है। बाकायदा हवन में खुशबूदार समिधा की गिनी हुई आहुतियाँ देने के बाद श्रीगणेश हो गया। वैसे साल भर गाहे -ब -गाहे कार्यक्रम चलते रहते हैं। लेकिन जैसे ही पाँच […]

हास्य व्यंग्य

लो वो चली गई……

बिजली रानी को निश्चित ही कोई दूसरा आशिक मिल गई होगी, अन्यथा वो इश्क-मिचौली नहीं करती ! इधर लगातार पन्द्रह दिनों से हर दिन बिजली 15 बार अवश्य ही कटती है । कभी 10 मिनट के बाद आ जाती है, तो कभी 10 घंटे बाद भी नहीं! जब से अपने गाँव में विद्युत सब ग्रिड […]