Category : हास्य व्यंग्य



  • गलतिओ का  इनाम

    गलतिओ का इनाम

    साल भर का काम, काम ना आया.. मैंने अपने गलतिओ का इनाम है पाया .. इतनी गलतिओ के बाद भी कंपनी ने तरक्की पाई है पर मेरी तरक्की किसी को भी याद नहीं आई है मर...

  • जो है, सो है

    जो है, सो है

    पूरे घर में गन्दगी का अम्बार था, घर की तिजोरी पर हर कोई हाथ साफ़ कर रहा था, जेवर-सोना-चांदी सब लूट चुका था, सारे तालें टूटे पड़े थे, हर कोई बाप का माल समझ कर मलाई...

  • माया महा ठगनी हम जानी

    माया महा ठगनी हम जानी

    व्यंग्य साहित्य की एक विधा है जो उपहास, मजाक और ताने का मिलाजुला स्वरुप है। हिन्दी में हरिशंकर परसाई और श्रीलाल शुक्ल व्यंग्य  विधा के प्रमुख हस्ताक्षर हैं।  हर किसी पर इस अस्त्र का उपयोग नहीं...



  • गधे और बंदर

    गधे और बंदर

    इस वर्ष गर्मी कहर की थी। जालंधर की गर्मी और मच्छरों से मुकाबला, कोई करे भी तो किया करे। दफ्तर में लोगों से सर खपाना और ऊपर से बिजली की आँख मिचोली,सोचा, कुछ दिन के लिए...

  • हवाई-चप्पल की घिसाई

    हवाई-चप्पल की घिसाई

    “आप लोग, लोगों को चप्पल घिसवाने से बाज आईए” एक शिकायत-समाधान-प्रकोष्ठ में सुना गया था यह वक्तव्य! सुनकर हवाई-चप्पल पर भी व्यंग्यनुमा कुछ लिखने का क्लू सा मिल गया। वैसे इस बात पर मैं इतना तो...

  • गधे तो वाकई गधे होते हैं

    गधे तो वाकई गधे होते हैं

    गधे तो वाकई गधे होते हैं। एकदम सीधे-सादे, मेहनती और संतोषी। गधे के यही तीन गुण उसको महान बना देते हैं। सीधा इतना कि मालिक बात-बेबात दो लट्ठ लगा भी दे, तो बिलबिलाकर ‘ढेंचू-ढेंच’ कर लेगा...