Category : हास्य व्यंग्य

  • क्या करे आदमी…

    क्या करे आदमी…

    कहां राजपथों पर कुलांचे भरने वाले हाई प्रोफोइल राजनेता और कहां बाल विवाह की विभीषिका का शिकार बना बेबस – असहाय मासूम। दूर – दूर तक कोई तुलना ही नहीं। लेकिन यथार्थ की पथरीली जमीन दोनों को...



  • व्यंग्य – झाड़ू की व्यथा

    व्यंग्य – झाड़ू की व्यथा

    हिन्दी दिवस पर एक प्रचलित कहावत दिमाग में उँगली कर रही है- घूरे के दिन फिरना, यानि “अच्छे दिन आना।” देखिए ना आजकल ‘उस’ मुहावरे का अर्थ भी ‘यह’ मुहावरा बन गया है। इसी को कहते...

  • मुस्कुराने का कोई मोल नहीं

    मुस्कुराने का कोई मोल नहीं

    यह तो आप भी जानते हैं, कि मुस्कुराने का कोई मोल नहीं लगता. हमारा भी कहना-मानना है- मुस्कुराओ कि मुस्कुराने पर कोई मोल नहीं लगता, गुनगुनाओ कि गुनगुनाने का कोई टोल नहीं लगता हंसने-हंसाने को ही...


  • रूपए का गिरना

    रूपए का गिरना

    पेट्रोल पंप की ओर कार मोड़ते ही मुझे घिसई दिखाई पड़ गया। देखते ही मैंने उसे जोर से पुकारा, “का हो घिसई का हालचाल बा?” हालचाल पूँछने से खुश हुआ घिसई मेरे पास आकर बोला, “सब...