हास्य व्यंग्य

माफलर लूट लिया पैसे वाला शराबी

रात के दस बजे थे। मैं रात्रि भ्रमण पर था। निश्चित था। कोई डर नहीं थी। क्योंकि क्षेत्र तो अपना ही था। ऐसे भी दिल्ली के मुख्य क्षेत्रों में सुरक्षा तो सक्रिय ही रहती है। मुझे यह उम्मीद तक नहीं थी कि मैं एक फ्रेंडली लूट का शिकार हो जाउंगा। पर घटनाएं तो अचानक ही […]

हास्य व्यंग्य

चोर – चोर मौसेरे भाई

जहाँ तक मेरी जानकारी की दूरदृष्टि जाती है,चोरी एक सदाबहार कला के रूप में विख्यात रही है। चोरियों के भी तो अनेक प्रकार हैं। केवल धन की चोरी ही चोरी नहीं होती। और भी चोरियों के विविध रूप हैं।धन की चोरी से पहले भी अनेक प्रकार की चोरियाँ होना एक साधारण – सी बात मानी […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – दुम हिलाइए, पुरस्कार पाइए

लंबे समय से कागज काला करता आ रहा हूं।लेकिन एक भी वैसा पुरस्कार,जिसमें सम्मानजनक राशि,प्रशस्ति पत्र व आकर्षक मोमेंटो शामिल हो, ऐसा अवसरआज तक नहीं मिला कंबख्त।छोटे-मोटे पुरस्कार तो अक्सर स्थानीय स्तर पर मिल ही जाते हैं जिससे क्षेत्र में जहां लंबे समय से सांप की तरह कुंडली मारकर बैठे आए हो वहां इस तरह […]

हास्य व्यंग्य

दो कानों की भी सुन लें

आपके साथ हर समय रहने वाले ,सबकी अच्छी – बुरी सुनने वाले ;हम आपके ही दो कान हैं। आप ये मत समझें कि हम आपके मेहमान हैं।लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं कि हमारा नहीं कोई मान – सम्मान है!हमारी भी अपनी एक पहचान है।हम आपके दिमाग़ के पड़ौसी भी हैं ,इसलिए हमें भी तो […]

हास्य व्यंग्य

ऊँची दुकान-फीका पकवान

दुकान और पकवान दोनों मानव से जुड़ी अति प्राचीन काल से सतत चलने वाली आवश्यकताएँ हैं। दुकान पर माँग – पूर्ति द्वारा कई तरह के पकवान खरीदे जा सकते हैं। पकवान द्वारा उदरभरण के साथ-साथ रसना भी तृप्ति के कई सोपान तय करती है। प्रायः यही धारणा बलवती पायी जाती है कि ऊँची दुकान हो […]

हास्य व्यंग्य

खट्टा-मीठा : ठग को महाठग

“सेर को सवा सेर” यह लोकोक्ति अब पुरानी हो गयी है। अब एक नयी कहावत बनी है- “ठग को महाठग”। जो कोई अपनी बातों के जाल में फँसाकर भोले-भाले लोगों का माल हड़प लेता है, उसे ठग कहते हैं, परन्तु जो ठगों को भी ठग लेता है, उसे महाठग कहा जाता है। जी हाँ, आप […]

हास्य व्यंग्य

यह नोटतंत्र है

जिस दिन पार्थ चटर्जी के घर से करोड़ों रुपए बरामद हुए उस दिन से मेरे घर में महाभारत छिड़ा हुआ है I पत्नी ने मुझे कौरव दल में खड़ा कर दिया और खुद पांडव पक्ष में खड़ी होकर कलियुगी गीता का पाठ कर रही है I उसने मुझे दुनिया का सबसे निकम्मा और नालायक पति […]

हास्य व्यंग्य

अंधेर नगरी, चौपट राजा

बचपन में एक कहानी पढ़ी थी।एक नगर का नाम था अंधेर नगरी और राजा का नाम था चौपट । हर वस्तु टके सेर मिलती थी। शासन व्यवस्था धूर्त,चापलूसों, और कान भरने वालों के हाथों में थी। राजा केवल मंत्रियों की हाँ में हाँ मिलाता था। कहानी का मतलब तो उस समय समझ नहीं आया पर कहानी अच्छी लगती […]

हास्य व्यंग्य

मेरी सलाह

  बड़े ओवैसी का अभी अभी हैदराबाद से फोन आया बड़े सम्मान से फरमाया हम इतने शरीफ हैं कि नवाज शहनवाज भी हमारी शराफत से शरमाते हैं पर जाने क्या खुन्नस है हमारे देश के होनहार कवियों की कि सब मिल कर ही हम दोनों भाइयों के पीछे पड़े हैं? अरे भाई हम भी इस […]

हास्य व्यंग्य

बड़ा नाम होगा

अभी अभी बारिश के बीच सुरक्षित ठांव ढूंढ़ते ढूंढ़ते अभी अभी यमराज से मुलाकात हो गई मुझे देख यमराज की जेसे लाटरी लग गई दूर से ही उन्होंने मुझे देखकर पुकारा प्रभु । इस धरा पर आप के सिवा न कोई और सहारा बह आप से ही है उम्मीद है इंदद्रके कोप से बचने का […]