हास्य व्यंग्य

व्यंग्य और बाजार में जुगलबंदी

उस दिन खाने की टेबल पर बैठा ही था कि मोबाइल की रिंगटोन बजी। कॉल अननोन नंबर से था। अपन की प्रवृत्ति जिज्ञासु हैं, इसलिए हाथ में लिया कौर मुँह में ढकेला और उसे गटककर दूसरे हाथ से मोबाइल कान से सटाकर ‘हलो’ कहा। उधर से परिचयात्मक स्वर उभरा कि वह किसी प्रकाशन संस्था से […]

हास्य व्यंग्य

झूठा पुराण बनाम जैसी बहे बयार

अथ ‘झूठा पुराणम’ प्रारभ्यते । हमारी हिंदी में एक प्रसिद्ध कहावत है :’जैसी बहे बयार पीठ तब तैसी दीजै’।इस छोटी – सी कहावत में बड़े – बड़े सत्य छिपे हुए हैं। आज के युग में इसकी प्रासंगिकता में कई गुणा वृद्धि हुई है और निरंतर गुणात्मक रूप से अनवरत वृद्धि का स्तर ऊपर चढ़ता जा […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – रे हरजाई पितृ-पक्ष !

पितृपक्ष प्रारंभ हुए कई दिन बीत गए थे पर स्व. बनवारी लाल को नर्क में पितरों वाली खीर-पूड़ी नहीं मिल रही थी। पहले तो कभी ऐसा नहीं हुआ था। पहले पितृ-पक्ष शुरू होते ही बिला नागा स्वादिष्ट भोजन आने लगता था और बनवारी लाल की आत्मा तृप्त होती रहती थी। लेकिन अबकी बार दूर दूर […]

हास्य व्यंग्य

खट्ठा-मीठा : फिर तुनक गये सिद्धू पा’जी

भारत की क्रिकेट टीम के उस इंग्लैंड दौरे को याद कीजिए, जिसमें से एक खिलाड़ी केवल इस बात पर तुनककर लौट आया था कि उसे एक मैच के अन्तिम एकादश में शामिल नहीं किया गया था। उसके लौटने से भारतीय टीम पर तो कोई प्रभाव नहीं हुआ, लेकिन उस खिलाड़ी का क्रिकेट करियर वहीं पर […]

हास्य व्यंग्य

हे आकाश के बादल

कई जिलों में अल्प वर्षा से सूखे की स्थिति निर्मित वर्तमान में होगई है ।बादलों की राह ताकते की कब बादल पानी बरसेंगे।कई जगह किसान बोनी की फिक्र,पशुओं की हरी घास की चाहत में राह निहार रहे है।मेघ बरसे तो भजिए की कढ़ाई चढे।बिना बरसे खाने का मजा वैसे ही कम हो गया।तेल के भाव […]

हास्य व्यंग्य

सिस्टमपंथी

देश-भक्त ही देश की चिंता कर सकते हैं। मेरे इस कथन पर मुझे दक्षिणपंथी घोषित करते हुए उन्होंने कहा, “देशभक्त हुए बिना भी देशहित की चिंता की जा सकती है।” और फिर यह कहते हुए, “अरे हां भा‌ई! ये तंत्र-मंत्र शक्तिधारी ही देश-भक्त हैं…बाकी हमां-सुमां तो रियाया हैं..हम डाइरेक्ट देश के काम थोड़े ही न […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – बिना अखाड़े सेहरा पाया

अखाड़ा बना , न नगाड़ा बजा न मैदान में प्रतिद्वंद्वी का मजा, न कोई किसी से लड़ा या भिड़ा, पर माथे पर जीत का सेहरा खूब सजा। फ़ोटो भी खिंचा, लड्डू भी चखा, माला की महक की अपनी ही धजा, अखबारों में ख़बर का कहना भी क्या ! खुश हैं शिक्षक खुश है सब प्रजा! […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – हमें किसी का डर नहीं

वे जमाने चले गए ,जब हम डर -डर कर जीते थे।अब हम पूरी तरह से निडर हो गए हैं। अब हमें पाप से डर है ,न पुण्य की चिंता।जो करते हैं ,मन की करते हैं। हमें क्या?कोई जिए या मरे! हम तो अपने और अपनों के लिए ही सब कुछ कर्म करते हैं। क्या सुकर्म, […]

हास्य व्यंग्य

गुलजार के गीत

12 घंटे से बिजली गायब कि सुबह से बिजली गायब है, माँ ने संझा-बत्ती दे दी है, अभी भी बिजली नदारद है ! दिनभर तार बदलने के चक्कर में न हवा मिल रही है, न प्रकाश मिल रही है ! मोटर नही चला, तो पानी नहीं मिल रही है । बारिश के कारण सड़क पर […]

हास्य व्यंग्य

पप्पू पास हो गया

आज कॉलोनी में सुबह-सुबह जैसे ही एक प्रश्न गूँजा- “पप्पू पास हो गया?” प्रत्युत्तर में मानो कॉलोनी में कोरस सा छा गया- ‘हमारा भी पप्पू पास हो गया। हमारा भी पप्पू पास हो गया।’ बाद में  पता चला ये मेरी कॉलोनी का ही नही पूरे देश का हिट गीत है “हमारा पप्पू भी पास हो […]