हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : लोटा – पुराण

हम सभी यह अच्छी तरह से जानते हैं कि लोटा तो लोटा ही है।यदि लोटे को परिभाषित किया जाए तो ‘लोटा वही है जिसे हर दिशा में लोटने की सुविधा प्राप्त हो।’ लोटा अपने रंग, रूप, आकार और प्रकार में अन्य भाण्डों से कुछ इतर और भिन्न ही होता है।परंतु एक समानता सभी लोटों में […]

हास्य व्यंग्य

स्वप्निल इंटरव्यू

इंटरव्यूकर्ता – जी, आप लेखक हो? मैं – जी नहीं, मैं लेखक नहीं हूं। इंटरव्यूकर्ता – लेकिन आप लिखते तो हो! मैं – हां लिखता तो हूं। इंटरव्यूकर्ता – तो आप कैसे लेखक नहीं हुए? मैं – हां मैं वैसे ही लेखक नहीं हुआ। इंटरव्यूकर्ता – वैसे ही कैसे? मैं – ऐसे कि, वैसे मैं […]

हास्य व्यंग्य

सच्चाई तो यही है !

एक ‘लव’ (कुर्मी) है, दूसरा ‘कुश’ (कुशवाहा) ….और बाद बाकी ‘राम’ के बेटे नहीं हैं ! क्यों ? यही न ! ×××× एक महिला ‘माँ’ जैसी पूज्यतम पद पर होने पर भी बेहद स्वार्थी होती हैं, जब उन्हें अपनी गर्भ से उत्पन्न संतान के सिवाय अन्य भाती नहीं ! ×××× गर्भवती महिलाओं के पति-परमेश्वर नौ-दस […]

हास्य व्यंग्य

आजादी की जुगाली

सर्वप्रथम शादी करना शोभा नहीं देती ! उसके बाद एक संतान रहते, उनके समक्ष दूसरे बच्चे के लिए माँ का गर्भ धारण करना भी शोभा नहीं देती ! कई चीजें हैं, जो शोभा नहीं देती ! अपने से कई बरस छोटी युवती को पत्नी बनाना क्या शोभा देती है ! क्या यह हमारी मर्यादा है […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य –  स्वयं से स्वयं की परिचर्चा

खेत में पानी आ चुका था, क्योंकि दूध से सफेद बगुले फर्र-फर्र करके आने लगे थे, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय नेता फक्क सफेद कुर्ता पहनकर चुनावी मैदान में कूद पड़ते हैं । मैं कंधे पर फावड़ा रखे सरपट खेत की मेड पर चला जा रहा था कि पीछे से अचानक आवाज आई । ‘काहे […]

हास्य व्यंग्य

काव्य रसगुल्ले

युवतियाँ प्रेम विवाह या अरेंज मैरिज भी करेंगी, तो चुनकर ही यानी वर डॉक्टर, एमबीए या बी.टेक. हो; चाहे बी.टेक. माने खुजली की दवाई ठहरे ! ×××× होली में दूसरे की पत्नी ही याद क्यों आती है ? अपनी पत्नी तो पूवे-पकवान बनाने में व्यस्त रहती है ! लगा न झटका ? बुरा ना मानो […]

हास्य व्यंग्य

इस बरस कौन रंग चढ़ाऊँ बैरी सजनवा

मुझे मालूम है कि तू बहुत रंग-रंगीला हो चला है।जब से इस मूई राजनीति का तुझे चस्का लगा है तब से तुझे होली के रंग से ज्यादा चुनाव के रंग भाने लगे हैं।मुझे मालूम है कि जब तू हमारे साथ ही था तब रंगों से बहुत दूर भागता था ,तुझे रंग काटने को दौड़ते थे।तब […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – भक्त -पुराण

अभी तक हमने मात्र भगवान, देवी और देवताओं के भक्त ही सुने थे।लेकिन आज भक्त भी विभक्त हो गए हैं।अब तो चोर ,डकैत,गिरहकट, नेता ,दल आदि सभी के भक्त होने लगे हैं, जो अपने उन तथाकथित इष्टों में पूर्ण समर्पण रखते हैं।भक्त का मतलब ही है कि जिसकी भक्ति करो , उसके प्रति अंधा विश्वास […]

हास्य व्यंग्य

महंगाई को बदनाम करना राजद्रोह

गैसू बाबा,गैसू बाबा आज अखबार पढ़े की नहीं ? गजब हो गया ! अब हम लोगों को आगे बढ़ते कोई नहीं देखना चाह रहा। लगता है हमसब बेवजह मारे जाएंगे। जनता एक ओर चिल्ला-चिल्लाकर बिल बिला रही है।दूसरी ओर कर्महीन तिपक्षी जो खुद अपनी संख्या बढ़ा नहीं पा रहे हमारी बढ़त देखकर घड़ियाली आंसू बहा […]

हास्य व्यंग्य

बेचारा आम नागरिक-रामलाल

आवश्यकता, आविष्कार की जननी है, और विलासिता उसकी रखैल। विज्ञान का इतिहास गवाह है साहब कि सारे आविष्कार अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए चाचाओं ने किये लेकिन भतीजों ने उन्हें मनोरंजन के बाज़ार में नचवा दिया। टेलिविज़न का स्क्रीन सनी लियोनी की धार्मिक फिल्मों के काम के लिए किया जा रहा है। आजकल मैट्रिक […]