हास्य व्यंग्य

पीटी, मेंस, इंटरव्यू

मैंने एक पोस्ट किया….. ‘हम आपके हैं कौन?’ उत्तर में एक भी लाइक नहीं ! हाँ, एक बंधु कुमार गौरव धर्मा का जवाब यह आया, वह पढ़िए- ‘गुरुवर, मेंस पर ध्यान दीजिए और हमारे अपने गांव का नाम रोशन कीजिए । आप लोग से उम्मीद है!’ मेरा काउंटर कमेंट पढ़ने लायक हो अथवा नहीं, किन्तु […]

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सहज-असहज स्थितियाँ एक जैसी !

हिंदी के लिए शुक्ल पक्ष के आसार ! हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यतार्थ मैंने 2008 में ही सर्वोच्च न्यायालय सहित राष्ट्रपति सचिवालय, PMO, लोकसभा सचिवालय, राज्यसभा सचिवालय, गृह और विधि मंत्रालय को सामान्य पत्र, फिर RTI आवेदन भेजा, जिनमें लोकसभा में बहस की प्रति मुझे तब भेजी गई थी ! जो कि हिंदी […]

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ऑनलाइन शिक्षा (एक व्यंग)

कोरोना महामारी के चलते आम जनता के जीवन में तूफ़ान आया हुआ है ताली पीटकर थाली पीटकर और फिर टोटल लॉकडाउन करने की कोशिशों के बाद भी यह (कोरोना) ना पलटा बल्कि देश की जनसंख्या की तरह आगे ही बढ़ता जा रहा है। इधर कोरोना बढ़ा, उधर आर्थिक समस्याएं और दोनों की जंग में लॉकडाउन […]

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व्यंग्य – सुपर स्टार : मौत

पिछले आठ-दस महीनों से यमराज का नृत्य प्रेम अचानक बढ़ गया है। अब वे फुफकारते हुए भैंसे पर बैठकर नंगा नाच नहीं करते। चुपके से आते हैं। नये रूप में। सूक्ष्म नहीं, अतिसूक्ष्म वाहन पर। कुछ दिनों चीन में ड्रैगन, लॉयन,उइगुर,यांगे और मियाओ डांस करने के बाद वे बोर हो गये। फिर अदृश्य होकर इटली, […]

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मिस्टर शिक्षा पदाधिकारी

मिस्टर शिक्षा पदाधिकारी ! आप इतने हुनरमंद नहीं हो पाए हैं, जो तर्क कर सके ! क्योंकि भारत सरकार के पास ऐसे कोई प्रमाण नहीं है, जो 5 सितम्बर को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में स्थापित कर सके ! अगर हम योग्य नहीं है, तो आप भी सरकार के शिक्षा पदाधिकारी के रूप में अयोग्य […]

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अंधेरा कायम !

माँ ने संझा-बत्ती दे दी है, अभी भी बिजली नदारद है ! दिनभर तार बदलने के चक्कर में न हवा मिल रही है, न प्रकाश मिल रही है ! मोटर नही चला, तो पानी नहीं मिल रही है । बारिश के कारण सड़क पर कीचड़ ही कीचड़ । स्ट्रीट-लाइट नहीं जल रही है और लोग […]

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अच्छे दिन कब आएंगे

आजकल भाई लोग अच्छे दिनों की आशा में मरे जा रहे हैं, बेचैन हैं, तड़प रहे हैं, अपनी नींद ख़राब कर रहे हैं लेकिन अच्छे दिन मृगमरीचिका बन गए हैं, आ ही नहीं रहे हैं I अच्छे दिन के लिए लोग खूब पसीना बहा रहे हैं, कठिन संघर्ष कर रहे हैं, कठोर साधना कर रहे […]

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भ्रष्टाचार अमर रहे

आजकल सभी लोग भ्रष्टाचार का उन्मूलन करने के लिए प्राणपण से जुटे हुए हैं I देश की एक सौ तीस करोड़ जनता भ्रष्टाचार का समूल नाश करना चाहती है, लेकिन इसका नाश ही नहीं हो पा रहा है I जिसे देखो वह भ्रष्टाचार के पीछे पड़ा है, उसे मिटाने पर आमादा है I कहता है […]

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मनुष्य का शेर होना

कोई मनुष्य ‘शेर’ कैसे हो सकता है? शेर उसे कहते हैं, जो दूसरे का आहार यानी चारा नहीं छीने, लेकिन उन्होंने छिना ! हर पिछड़ा वर्ग उन्हें प्यार करता था, तबतक ही…. जब वह खुद सीएम रहे ! तब से नहीं, जब खुद नहीं रहे, तो बीवी को सत्ता ! बीवी नहीं, तो बेट्टे को […]

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व्यंग- कोरोना में नेता जी

वो युवा नेताजी कम समय में बड़ा नाम कर चुके थे, आज सुबह अचानक वो मेरे घर पर धमक पड़े। गरीब लेखक के घर काली चाय के सिवाय और क्या मिलता सो मीठी बातो से उनका भव्य स्वागत किया। नेताजी बहुत उदास थे, मेरे पूछने पर नेताजी ने बताया कि “कोरोना महामारी के चलते आजकल उनका मार्केट डाउन […]