Category : हास्य व्यंग्य

  • मुस्कुराने का कोई मोल नहीं

    मुस्कुराने का कोई मोल नहीं

    यह तो आप भी जानते हैं, कि मुस्कुराने का कोई मोल नहीं लगता. हमारा भी कहना-मानना है- मुस्कुराओ कि मुस्कुराने पर कोई मोल नहीं लगता, गुनगुनाओ कि गुनगुनाने का कोई टोल नहीं लगता हंसने-हंसाने को ही...


  • रूपए का गिरना

    रूपए का गिरना

    पेट्रोल पंप की ओर कार मोड़ते ही मुझे घिसई दिखाई पड़ गया। देखते ही मैंने उसे जोर से पुकारा, “का हो घिसई का हालचाल बा?” हालचाल पूँछने से खुश हुआ घिसई मेरे पास आकर बोला, “सब...





  • व्यंग्य- वर्तमान में कृष्ण

    व्यंग्य- वर्तमान में कृष्ण

    हर साल हमारे देश में करोड़ों कृष्ण पैदा लेते रहे हैं। कोई नई बात नहीं है। शास्त्रीय गणना के अनुसार, कंस कारागार में जन्मे द्वापर के कृष्ण से ही गणना करें, तो लगभग साढ़े पाँच हजार...

  • व्यंग्य – मुक्ति-पर्व

    व्यंग्य – मुक्ति-पर्व

    देश इस समय मुक्ति-पर्व मना रहा है। “कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” कहकर जो दिव्यात्मा संसार से कूच कर गई, एक तरफ उनकी अस्थियों को लोटों में कैद कर नदियों में प्रवाहित कर मुक्त किया जा...