Category : हास्य व्यंग्य

  • सोने से घड़ाई महँगी

    सोने से घड़ाई महँगी

    यह तो जग जाहिर है कि जितनी राशि ऋण वसूली करके सरकारी खजाने में नहीं आती है उससे कई अधिक राशि उसे वसूलने में खर्च हो जाती हैं. किसानों को प्याज के कारण जो आँसू आए...

  • ये बचाने वाले लोग !

    ये बचाने वाले लोग !

    …कुछ लोग “बचाओ-बचाओ” के शोर के साथ मेरी ओर बढ़े आ रहे थे…उत्सुकतावश मैं अपने आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ देखने लगता हूँ ..!! लेकिन संकटापन्न की कोई स्थिति दिखाई नहीं देती …फिर भी किसी को बचाने के आपद्...



  • “पगली” कहीं की..

    “पगली” कहीं की..

    अक्सर कुछ शब्द उन्हीं शब्दों से जुड़ी बात और उन्हीं बातो से जुड़े लोग मात्र हँसी के पात्र बनकर रह जाते है उनको लगता वो सर्वोपरि है । अभी हाल ही कि बात लीजिये एक सहाब...


  • गुड-गवर्नेंस वाली स्कीम

    गुड-गवर्नेंस वाली स्कीम

    पहले राजा लोग आलरेडी ईश्वर के अंश होते थे, इसलिए इनका किया-धरा आटोमेटिक “राजधर्म” हो जाता था..! कारिंदों के साथ हाथी-घोड़े पर सवार राजा रिरियाती रियाया के बीच “राजधर्म” का प्रतीक था..! लेकिन आजकल की लोकतांत्रिक...

  • भूख का इतिहास-भूगोल

    भूख का इतिहास-भूगोल

    क्या पता जब न्यूज चैनल नहीं थे तब हमारे सेलिब्रिटीज जेल जाते थे या नहीं… लेकिन हाल – फिलहाल उनसे जुड़ी तमाम अपडेट सूचनाएं लगातार मिलती रहती है। जब भी कोई सेलेब्रिटीज जेल जाता है तो मेरी...

  • छोटूलाल की जीवन लीला

    छोटूलाल की जीवन लीला

    कभी – कभी ईश्वर से भी भयंकर भूल हो जाती है I ईश्वरीय लापरवाही के कारण भगवान के कारखाने में कुछ डिफेक्टिव माल तैयार हो जाते हैं और ईश्वर के कारखाने में तैनात विपणन अधिकारी जांच...

  • माफी के मजे

    माफी के मजे

    क्या पता महाभारत काल में धृतराष्ट्र पुत्र दुर्योधन को अंधे का पुत्र अंधा… जैसा संबोधन कहने के बाद उत्पन्न कटुता को दूर करने के लिए द्रौपदी के पास सॉरी कहने का कोई विकल्प था या नहीं  या...