हास्य व्यंग्य

खट्टा-मीठा : चमत्कार को नमस्कार

आलू से सोना बनाने की चमत्कारी मशीन का आविष्कार करने वाले महान् वैज्ञानिक पप्पू जी ने इधर एक और चमत्कारी आविष्कार कर डाला है, जिसकी किसी को खबर नहीं है। वह है रातों-रात करोड़ों लोगों के हस्ताक्षर एकत्र कर डालना। उन्होंने इसकी एक विलक्षण तकनीकी का आविष्कार किया है, जिससे यह समय साध्य और उबाऊ […]

हास्य व्यंग्य

मुंगेरी लाल के हसीन सपने

सुबह उठकर चाय पीकर ध्यान का अभ्यास करने के बाद मैं अपनी छत पर शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कुछ एक्सरसाइज, दौड़, लाफिंग एक्सरसाइज, ताली बजाने आदि में एक घंटा व्यस्त रहता हूं. आज भी यह सब कार्य मैंने किए .दोपहर का खाना खाने के बाद ठंड की वजह से फिर छत पर चला […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग

कितने अच्छे शेर कहता है वो, क्या हुआ वो उच्चारण में मात खाता है। ग़ज़ल को गजल कहता है । शागिर्द को शारगिद कहता है, नुक्ता की गलती छोड़ दी जाएं तो उसमे उस्ताद होने के पूरे गुण मौजूद हैं। किसी के शेर को उठाकर बडी सावधानी छांटकर अपना बना लेता है कि अच्छे से अच्छे शायर भी धोखे […]

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चाँदी के चम्मचों के साथ पैदा होना

जबरजस्त, सटकआराम, सत्या अनाश बधाई । जोड़- तोड़ से क्रिकेट तक पहुंचा दाल न गली, इंडियन टीम के लिए उनकी दाल पतली ही रही । वो तो रेल मंत्री पापा के कारण आईपीएल तक पहुँच सका था । पंजाब में छोटका बादल भी चाँदी के छनोटा लेकर पैदा हुए थे, यानी ………… मौसेरे भाई। एक […]

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क्या हो रा’ है  का खटराग !

“क्या हुआ ; क्या हुआ ;  क्या हो रा’ है “- एक साँस में वह तीनों लघु वाक्य बोल गया था! आंखों में घोर कौतूहल ; सब कुछ जान लेने की आतुरता और भीतर ही भीतर एक क्रूर मज़ा, वह मेरे बिल्कुल पास खड़ा था और मेरी ही तरह तीन छत छोड़कर होते हंगामे को […]

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योगानंद का रोजगार कार्यालय

बचपन की कुछ आदतें आजीवन पीछा नहीं छोड़तीं I मुझे बचपन से ही दीवारों पर लिखे विज्ञापन, दुकानों और कार्यालयों के नामपट्ट, बैनर आदि पढ़ने की आदत है I कुछ लोग इसे दीवार साहित्य की संज्ञा देते हैं तो कुछ इसे सड़क साहित्य कहते हैं I साहित्य जब तक सड़क पर नहीं आता तब तक […]

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तेल लगाने की कला

तेल लगाना एक ललित कला है I यदि आलोचकों ने इसे ललित कला में शामिल नहीं किया है तो भी यह ललित कला है I इस आभासी तेल में बहुत फिसलन होती है I इस तेल में बड़े- बड़े लोग खड़े–खड़े फिसलते देखे गए हैं I ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के तेल में पूरियां तलनेवाले अधिकारी […]

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खट्ठा-मीठा : जाने कहाँ गये वे दिन

अहा! वे भी क्या दिन थे! सरकार को हमारी सुरक्षा की इतनी अधिक चिन्ता रहती थी कि हर त्यौहार पर सुरक्षा चेतावनियाँ जारी की जाती थीं। उन चेतावनियों के साये में लोग सावधानी से त्यौहार मनाने की औपचारिकता निभाते थे। उनको हर समय डर लगा रहता था कि कोई रंग में भंग डालने वाला तो […]

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पॉलिटिक्स माने चिनिया बादाम

देश की पॉलिटिक्स होती जा रही है- ‘चिनिया बादाम’ यानी टाइम पास यानी ‘मूंगफली’ यानी फोड़-फाड़ यानी सोट-मोट बराबर ! क्यूँकि सत्ता है सट्टा बहुमत नहीं हो जब, तो जैसे-तैसे बना लो गठबंधन ममता से हठबंधन तो एनसीपी हो या बीजेपी सेम टू सेम ‘मायावती’ बहन, आखिर सब ऐसे ही है यानी येन केन प्रकारेण […]

हास्य व्यंग्य

गम्भीर हास्य

जिस व्यक्ति की पत्नी के ‘जीजाजी’ होते हैं, उस व्यक्ति को दिन में नींद आ जाती होगी, किन्तु रात में तो बिल्कुल नहीं ! ×××× एक टीचर अपनी टीचर पत्नी से इस कदर परेशान है कि ‘पत्नी’ अपने पति को छोड़ जीजा के साथ व्यस्त हैं ! ×××× एक महिला मित्र ने मुझसे परामर्श माँगी- […]