हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : समय की यात्रा आदमी का भ्रम 

महाभारत सीरियल जब आरंभ होने को होता तब एक प्रभावी ध्वनि ध्वनित होती ” मैं समय हूँ ,, अर्थात एक अदृश्य सत्ता जिसे हम भगवान कहते हैं अपने को समय रूप में भी संसार को बतलाना चाहती हैं । ये सब रही अध्यात्म की बातें जिसे श्रेष्ठ बुद्धि संपन्न व्यक्ति ही समझ सकता है सामान्य […]

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व्यंग्य : नाजायज़ औलाद

इन दिनों मुझे हर व्यक्ति में कोरोना दिखता है। लगता है कोरोना ब्रह्म है जिसका वास हर जीव में है। चीनी कोरोनामय सब जग जानी। इसके सम्मान मे लोग गले नहीं मिलते। हाथ नहीं मिलाते। करत प्रनाम जोरि जुग पानी। अजीब रहस्यवाद है भाई। न ब्रह्म जीव से मिलने को व्याकुल है ना जीव ब्रह्म […]

हास्य व्यंग्य

लेखक-संपादक-संवाद

आदरणीय संपादक महोदय, सुप्रभातम ! आशा है, आप स्वस्थ व सानंद रहकर लॉकडाउन का अनुपालन कर रहे होंगे ! मैंने इधर पत्रिका में प्रकाशन हेतु कई रचनाएँ प्रेषित की है, किन्तु एक भी प्रकाशित न होना विस्मित करता है ! यह सुयोग्य नहीं है क्या ? आपके एतदर्थ उत्तर भी अप्राप्त है । मैं संपादकत्व […]

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व्यंग्य : दादा ने दारू पीकर निभाया अपना राष्ट्र धर्म

डिनर करने के बाद हम प्रतिदिन की तरह बॉलकनी में बैठे बैठे मोबाइल पर फेसबुक नोटिफिकेशन देख रहे थे तभी नीचे एक  बाइक  के रुकने की आवाज आई। गली की स्ट्रीट लाइट पिछले लगभग चालीस दिनों से खराब होने के कारण कौन आया है? यह पहचानने  में कठिनाई हो रही थी । नीचे से आवाज […]

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व्यंग्य – भेद बढ़ाते मंदिर-मस्जिद, प्रीत बढ़ाती मधुशाला

आज मुझे उन लोगों पर तरस आ रहा है जो मेरे मद्यपान से रुष्ठ रहते थे। मूर्ख कहीं के। वे राष्ट्र के प्रति मेरी सत्यनिष्ठा और भक्ति को नहीं समझ सके। उन्हें अब समझ में आ रहा होगा कि एक सैनिक युद्ध में सीने पर गोली झेलकर जो अपना कर्तव्य निभाता था, वही योगदान मेरी […]

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करोना  करोना 

मेरे मित्र भाई भरोसे लाल के पास उन केएक मित्र का फोन आया। कुशलक्षेम के उपरांत स्वाभाविक था वर्तमान क्रोना की बीमारी पर बात हुई। यह भारत में बीमारी का शुरआती समय था। लोगों में अधिक चढ़ा नहीं थी। बस अभी भारत के बाहर ही कुछ केस आये थे तो घरवालों के कानों में नया […]

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जान है तो जहान है

वर्तमान फेसबुक,वाट्सअप,इंस्ट्राग्राम ने टीवी,वीडियो गेम्स, रेडियो आदि को लॉकडाउन में चाहने लगे।कहने का मतलब है की दिन औऱ रात इसमे ही लगे रहते है।यदि घर पर मेहमान आते और वो आपसे कुछ कह रहे।मगर लोगो का ध्यान बस फेसबुक, वाट्सअप पर जवाब देने में और उनकी समझाइश में ही बीत जाता।मेहमान भी रूखेपन से व्यवहार […]

हास्य व्यंग्य

आलेख ….हालात ए हाजरा कहो या मंजरकशी…….

यहां लॉक डॉन क्या लगा पूरा लोक ही सन्नाटों से भर आया है । लोक की सारी भागदौड़ सिमट सी गई है सब कुछ रुका रुका थमा थमा ।आदमी घरों के अंदर इस तरह कैद है मानो पिंजरे में पंछी । और परिंदे फिर पेड़ों पर चहचहाने लगे हैं। कुछ जानवर तो जंगल छोड़कर बस्तियों […]

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रामखिलावन की बैचेनी और मिल गया समाधान

आज वे मन ही मन बहुत कुढ़क रहे थे।मन ही मन उन्हें गालियाँ भी दे रहे थे।वे बुदबुदा भी रहे थे कि-” आज तो तुम बहुत खुश होंगे।तुम्हारे मन की जो हो गई है।मुझे दड़बे दाखिल होना पड़ा है।अभी कहीं मंचों पर नहीं हूँ,शोक सभाओं में नहीं हूँ,समाचारों में नहीं हूँ तो तुम्हारी बल्ले-बल्ले हो […]

हास्य व्यंग्य

कुछ नेकी कर,नेकी की दीवार पर ही सही….

इधर सिंगापुर ने लॉकडाऊन एक जून तक बढ़ा दिया और उधर डब्ल्यू एच ओ ने भी डरा दिया है कि आगामी माह में इनसे भी बुरे दिन देखने को मिलेंगे।यह सब देखकर मैं डरा,सहमा और सिमटा हुआ बैठा था।अब टीवी भी देखूं तो कितना और कुंभकर्णी लेट लगाऊं तो कितनी!घरवाली के साथ किचन में यह-वह […]