Category : हास्य व्यंग्य

  • गोवध निषेध का निदान

    गोवध निषेध का निदान

    गोवध समस्या को लेकर बहुत वाद-विवाद हो चुका है और होता रहेगा। कारण स्पष्ट है। जहाँ समाज का एक धड़ा यह मान कर चलता है कि गोमांस उसके जन्नत के टिकट की एक अहम ज़रूरियात है और...

  • लघु व्यंग्य : तलाश

    लघु व्यंग्य : तलाश

     गोवंश उदास हो तलाश कर रहा है असहिष्णुता का ढिंढोरा पीटनेवाले उन महानुभावों को जो पिछले दिनों कुछ अधिक ही सक्रिय रहे। वे खूब चीखे, चिल्लाए और विधवा विलाप कर अपनी छातियाँ पीटते हुए असहिष्णुता मन्त्र का...

  • पप्पू और पांच सौ का नोट

    पप्पू और पांच सौ का नोट

    पप्पू को कई महीनों बाद पांच सौ के नोट के दर्शन हुए. उसकी खुशी का ठिकाना न रहा. बड़े जतन से उसे अपने पर्स में रखकर वह बड़ा-सा झोला लेकर शॉपिंग के लिए निकला. वह पास...


  • हास्यव्यंग्य  : दूसरा चेतक

    हास्यव्यंग्य : दूसरा चेतक

    आज से तकरीबन ५०० वर्षो पहले ,एक घोड़े की मौत पर जितना दुख भारत के लोगो ने जताया था , उससे ज्यादा दुख आज एक घोड़े की टांग टूटने पर जताया जा रहा है। वो घटना ऐतिहासिक...

  • हास्य-व्यंग्य : संघमुक्त भारत

    हास्य-व्यंग्य : संघमुक्त भारत

    आजकल मै लगभग खाली हूँ. मेरे खाली दिमाग में एक बिल्कुल नया अद्भुत आयडिया आया है. सोचता हूँ नीतिश जी का चेला बन जाऊँ. मुझे लगता है मैं उन्हें पटाने मे कामयाब हो जाऊँगा. एक बार...


  • भारत धार्मिक हो गया!!

    भारत धार्मिक हो गया!!

    प्राथमिक कक्षाओं से अब तक यही पढ़ता-पढ़ाया आया हूँ और जैसे कि सारा संसार जानता है-‘भारत अनेक धर्मों का एक धर्मनिरपेक्ष देश है।’ यह वाक्य पूरे विद्यार्थी जीवन में मेरे कानों में अमृत घोलता रहा है।...

  • व्यंग्य : बाबा के चरण

    व्यंग्य : बाबा के चरण

    “दद्दू गजब हो गया।” घीसू भागता हुआ आया। दद्दू ने घबराते हुए पूछा, “क्या हुआ बेटा?” “दद्दू बाबा के चरणों में जगह-जगह छेद हो गए हैं।” घीसू ने दुखी हो बताया। दद्दू भी दुखी हो गए,...

  • मुकरी

    मुकरी

        सब दिन पीछे पीछे डोले कभि कुछ मांगे कभि कुछ बोले डांटूं तो रो जावे नाहक ए सखी साजन? ना सखी बालक।   तन से मेरे चुनर उङावे मेरे बालों को सहलावे इसका छूना...