Category : हास्य व्यंग्य

  • बुद्धिजीवी का विमर्श

    बुद्धिजीवी का विमर्श

    लोगों को (मुख्य रूप से बुद्धिजीवियों को) ये कहते हुए अक्सर सुनता हूँ कि वक्त बहुत खराब हो गया है। विमर्श के लिए कोई जगह शेष नहीं बची है। संक्रमण काल है। गुजरे जमाने को तो...


  • सेमीफाइनल के अर्थ

    सेमीफाइनल के अर्थ

    आज भारत का सेमीफाइनल हारना कुछ ऐसी ही अनुभूति पैदा कर रहा है जैसी, इम्तहान में कोई पर्चा खराब हो जाने पर होती है, जैसी, किसी नौकरी के लिये दिये हुए साक्षात्कार में न चुने जाने...

  • इ क्रिकिट   माया ……!

    इ क्रिकिट माया ……!

    आज फिर रतनलालजी परेशान हो गये। बोले, “मुझे भी क्रिकेटर बनना है।” मैने समझाया भाई हम जैसै कामकाजियों के पास इतनी फुर्सत कहाँ कि नून रोटी का चिन्तन छोड़ बल्ला भाँजने चलें। भाई बडी मेहनत है,...



  • हास्य मुक्तक

    हास्य मुक्तक

      अरे जिनकी मुहब्बत में खुदी को हम भुला बैठे। वही हमको पकड़वाने सिपाही को बुला बैठे। तमन्ना थी कि सावन फिल्म इक हमपर भी बन जाये, पुलिस स्टेशन के पचड़े में वो हमको ही झुला...

  • कलयुग में सुदामा

    कलयुग में सुदामा

    कहते हैं कि दो सांडो़ं की लड़ाई में बाड़ी उजड़ जाती है। लेकिन मैंने पहली बार दो नहीं बल्कि तीनों सांढ़ों को एक बिंदू पर एकमत होते देखा है। धर्म कहता है कि कलयुग चल रहा...

  • मफलर वाले बाबा

    मफलर वाले बाबा

    मुंगेरी गंगा किनारे अपनी गाय, भैस चुँगा रहा था, तभी उसका दोस्त कन्हैया बोला- गंगा किनारे अकेले फिरते रहते हो! कोनो भूत चुड़ैल मिल गया तो ?पास ही शमशान है!! अरे हमें तो एक चिड़िया नहीं...

  • आहत बापू के बोल!

    आहत बापू के बोल!

    आज हमारे बीच गाँधी होते तो रंज और मलाल से अपना सिर पकड़ लेते। आज न तो उनके अनशन की पूछ होती और न ही सत्याग्रह चल पाता। घोटालों की बाढ़ में उनके कुछ भी समझ...