हास्य व्यंग्य

आओ शोध करें

मुझे एक ऐसे रिसर्च स्कोलर की आवश्यकता है, जो मेरे साहित्य पर गहराई से शोध करके अपने लिए पी. एच. डी. प्राप्त करना चाहता हो। विश्वास रखिये मैं शोधकर्ता का खून नहीं पिऊँगा, अपितु उसे रोज चाय और बिस्कुट खिलाऊँगा। जहाँ तक गाइड का प्रश्न है वह भी मैं सुलभ करवा दूँगा। गाइड तो बस […]

हास्य व्यंग्य

प्रगतिशीलता की दशा और दिशा

देश विकास कर रहा है। विगत साठ-पैंसठ वर्षों से देश ने विकास करते हुए, प्रगति के अनेक आयामों को छुआ है। देश की जनसंख्या का विकास हुआ। सबने कहा जनसंख्या-विस्फोट हुआ। भई! मैं तो चकरा जाता हँ! विस्फोट होने पर जनसंख्या बढ़ती है, या जनसंख्या बढ़ने पर विस्फोट होता है? हाँ, पिछले दिनों जयपुर, अहमदाबाद, […]

हास्य व्यंग्य

फुटाला के तीर

चलिए, आज आपके सामान्य ज्ञान की जाँच करते हैं। यह बताइए- फुटाला तालाब किसे कहते हैं? -तालाब को। गलत जवाब!! फुटाला तालाब शहर का सबसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है। और इस तरह के स्थल हर छोटे-बडे़ शहर में होते हैं। यहाँ धर्म और संस्कृति के नये-नये कैक्टस पनपते हैं। वास्तव में फुटाला तालाब, उस […]

हास्य व्यंग्य

कबीर के साथ एक सुबह!!

  हमारे पुराण कहते हैं कि काशी गये बिना मुक्ति नहीं मिलती। किसे पता कि मरने के बाद बेटा अस्थियाँ गंगा में प्रवाहित करता है या समय और धन के अभाव में बगल में बहनेवाली नाग नदी को ही मेरी मुक्ति का रास्ता बना देता है। नया ज़माना जो है। फिर भी लोग अंतिम सांस […]

हास्य व्यंग्य

राष्ट्रीय मौसम

कई बार मैं बड़ी दुविधा में पड़ जाता हूँ कि पढ़ाते समय बच्चों को अपने देश में मौसमों की कितनी संख्या बताऊँ? बचपन से अब एक सामान्य भारतीय की तरह मेरा ज्ञान कहता है कि इस देश में तीन मुख्य ऋतुएँ- ग्रीष्म, शीत और वर्षा तथा छः उपऋतुएँ-वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर होती […]

राजनीति हास्य व्यंग्य

केजरीवाल जी, नो उल्लू बनाविंग…

कालीबाड़ी में हुए मोहल्ला सभा में केजरीवाल ने स्वीकार किया की उन्हें लगा की वो सरकार पूर्ण बहुत से बना लेंगे इसलिए इस्तीफा दिया. केजरीवाल राजनीति को अपने “लगने”और “न लगने” के चश्मे से ही तय करते है. उन्हें “लगता है” की गडकरी भ्रष्ट है, उन्हें  “लगता है की” संविधान भ्रष्ट है, उन्हें लगता है […]

हास्य व्यंग्य

ईमानदारों का ध्रुवीकरण कब होगा जी ?

वैसे तो इस लेख के शीर्षक से समझने वाले सब समझ जायेंगे ! इसीलिए इसमे आगे कुछ लिखने की गुंजाइश है भी या नहीं इस सोच में मैं भी था !! लेकिन फिर याद आया की शीर्षक के अंत में लगे “जी” से खुद के साथ साथ  खुद के उठाये मुद्दों और “राज” की “नैतिक” […]

ब्लॉग/परिचर्चा हास्य व्यंग्य

स्वर्ग में धरना

स्वर्ग के विश्वसनीय एकाउंटेन्ट चित्रगुप्त व्हाट्स एप पर इंद्र से कुछ निर्देश ले रहे थे, तभी मैं नारायण-नारायण करते हुए प्रकट हुआ. “कैसे आना हुआ मुनिवर? इस बार के पृथ्वी लोक का टूर कैसा रहा? क्या क्या किया? कहाँ कहाँ घूमे? अब आगे का क्या प्लान है और ये आपके सर पे टोपी कैसी है? […]