नवीनतम लेख/रचना



  • कुछ नहीं

    कुछ नहीं

    वह है छोटा,महान पर कितना ।निखट्टू,सभी मानते हैं।मामूली सभी के नजर में।महत्त्व ,कोई नहीं जानता।उसका दर्द,कोई नहीं जानता।सबको सुख,देता है दर्द सहते हुअे।कटता है खुद,दिखावट,देता है अच्छी सबको।वह है सिर्फ और सिर्फ,एक पेन्सिल।कटता रहता है हर...


  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी १६)

    13. राजसी लूट अल्लाह-हो-अकबर का नारा बुलंद करती मुस्लिम सेना तूफान की तरह महल में घुसी। सोलह वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों की तुरंत हत्या कर दी जाती। सोलह वर्ष से कम आयु के सारे लड़के कैद...



  • कांता

    कांता

    कांता कोठी के लॉन में बैठी थी , दोनों बेटे दस वर्ष का सोहन और आठ वर्ष का सोम घास पर बैठे सकूल का होम वर्क कर रहे थे . कांता कोई नावल पड़ रही थी...

  • एक दीवाने की मौत

    एक दीवाने की मौत

    पूरा गांव उन्हें दीवाना, वहशी और पागल कहता था। पर न जाने क्यों मेरा मन कहता था युसूफ चच्चा ऐसे नहीं हैं। उनकी उन दो हरकतों जिनकी वजह से गांव वालो ने उन्हें पीटा था उसके...

  • मकर संक्रान्ति पर्व और हम

    मकर संक्रान्ति पर्व और हम

    मकर संक्रान्ति पर्व सूर्य के मकर राशि में संक्रान्त वा प्रवेश करने का दिवस है। इस दिन को उत्साह में भरकर मनाने के लिए इसे मकर संक्रान्ति, लोहड़ी व पोंगल आदि नाम दिए गये हैं। मकर संक्रान्ति...

राजनीति

कविता