नवीनतम लेख/रचना

  • लघुकथा : मदर्स डे

    लघुकथा : मदर्स डे

    कई दिनों बाद आज पड़ोस में रहने वाली काकी के  घर उनका हाल-चाल पूछने  गयी तो उनका मुरझाया चेहरा देखकर हैरान रह गयी। लग रहा था जैसे वे कई दिनों से बीमार हों, फिर भी कमीज...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मेरी साँसों में तुम बसी हो क्या पूजता हूँ जिसे वही हो क्या थक गया, ढूंढता रहा तुमको नम हुई आँख की नमी हो क्या धूप सी तुम खिली रही मन में इश्क में मोम सी...

  • बाबा और फ़कीर

    बाबा और फ़कीर

    शहर से दूर एक निर्जन और वीरान जगह पर एक मंदिर और एक मजार थी, जिस रास्ते पर यह मजार और मंदिर था उस के आस पास बहुत घना जंगल था जिस कारण लोग बाग़ बहुत...


  • गुलमोहर के खिले हुए फूल…

    गुलमोहर के खिले हुए फूल…

      गुलमोहर के खिले हुए फूल मुरझाने से पहले तुम्हें देखना चाहते है गिरती हुई पंखुरियाँ तुम्हारे बालों में उलझन चाहती हैं शाखों की आड़ी तिरछी परछाईयाँ मिलकर हूबहू तुम्हारी तस्वीर बनाना चाहती हैं जड़ें तुम्हे...


  • बेटी हूँ मैं…

    बेटी हूँ मैं…

      बेटी हूँ मैं धरती का सौंदर्य और हरित प्रकृति हूँ मैं दहेज के दानवों से लेकिन , आज विचलित हूँ मैं …….. सम्पूर्ण संस्कृति और नवसृजक सभ्यता और सृष्टि का विस्तार हूँ मैं… दहेज के...

  • क्या ईश्वर है?

    क्या ईश्वर है?

    क्या ईश्वर है, है या नहीं? इस युक्ति व तर्क से देखते हैं कि यथार्थ स्थिति क्या है? इससे पूर्व कि ईश्वर की चर्चा करें हम पहले मनुष्य जीवन की चर्चा करते हैं। लोग हमसे पूछते...

  • यशोदानंदन-५१

    “हे नन्दलाल! हे श्रीकृष्ण-बलराम! तुम दोनों आदरणीय वीर हो। हमें महाराज द्वारा ज्ञात हुआ है कि तुम दोनों मल्ल-उद्ध में निपुण हो। तुम्हारा कौशल देखने के लिए ही तुम्हें यहां आमंत्रित किया गया है। नीति वचन...

कविता