नवीनतम लेख/रचना

  • बाल दिवस और चाचा नेहरू

    बाल दिवस और चाचा नेहरू

    (उनकी १२५ वीं जन्मोत्सव पर विशेष) अपने देशवासियों से मुझे इतना प्यार और आदर मिला कि मैं इसका अंश मात्र भी लौटा नहीं सकता और वास्तव में इस अनमोल प्रेम के बदले कुछ लौटाया जा भी...

  • काँच के खिलौने

    काँच के खिलौने

    हम काँच के खिलौने नहीं हैं, जो गिरते ही टूट जायेंगें , जोर से चट्खेगें और टुकड़े टुकड़े बिखर जायेंगें, और फिर कभी जुड़ न पायेंगें …नहीं, हम तो दोस्त हैं मेरे यार, दोस्त.. पहले एक...

  • नेहरुजी को श्रद्धांजलि

    आज (14 नवम्बर को) भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्व. जवाहर लाल नेहरू की १२५वीं जयन्ती है। भारत सरकार अधिकृत रूप से इसे आज मना रही है और नेहरूजी की विरासत पर अपना एकाधिकार माननेवाली सोनिया कांग्रेस...


  • कविता : दहेज़ – १

    कविता : दहेज़ – १

    बहू आज ही ससुराल आयी सास बोली बहू तू पीहर से क्या क्या साथ लाई बहू बोली- मां जी मेरे पिताजी ने अपनी जायदाद बेचकर मेरी शादी रचाई इससे आगे उनकी हैसियत कुछ देने की न...

  • हमरे बिहारी भैया

    हमारे बिहारी भैया बिहार से सीधे बम्बई पोस्टिंग पा गये।अब बम्बई जैसा शहर ,एक ही नजर में उनको तो बम्बई से लेकर चौपाटी तक सब ही घूम गया।मारे खुशी के फूले नहीं समाते ,सो अम्मा से...

  • मौन

    मौन

    पृथ्वी गेंद हैं घूमती हैं पृथ्वी पतंग हैं ,उड़ती हैं पृथ्वी गिरे तो कहाँ गिरे उठे तो कहाँ उठे ग्रह उपग्रह सितारें और अंतरिक्ष के सभी नज़ारें एक दूसरे के हैं सापेक्ष मनुष्य ही करता हैं...




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