नवीनतम लेख/रचना

  • एक शाम

    एक शाम

    आरती के विषय में सुनकर वह एकदम अवाक रह गया। अभी तीन साल ही हुए थे उसकी शादी को। उसकी ऑंखों के सामने वे सारे द्दश्‍य चलचित्र की भॉति उभरने लगे जो उसने उसके साथ बिताए...


  • मंज़िल

    मंज़िल

    कभी कभी अजीब सा समां लगता है सभी हैं , पर जाने क्यों सूना सूना यह जहां लगता है यूं तो न उम्मीद करते है किसी से वादे ओ वफ़ा की पर खोया खोया सा दिल...

  • ऐ इश्क़ 

    दबाये चिट्ठियाँ किताबों मैं कहीं एकांत तलाशते थे ख़ुमारी ऐसी चढती थी के क़दम लड़खड़ाने लगते थे ऐ इश्क़ कहाँ कोई तूझे अब इतना समझता है वो मुबारक दिन ना जाने कहाँ अब खो से गये...


  • गुड़िया

    गुड़िया

      भारतीय नारी बस इक गुड़िया बेचारी लक्ष्मण रेखाओं में कैद… आज़ादी की इक सांस भी है उस पर भारी नाम देते हैं अन्नपूर्णा का भूखे पेट सोती है बेचारी लडको से बराबर दर्ज़ा कहने को...


  • मुलाकात

    मुलाकात

    जबसे हुई है तुमसे मुलाक़ात अंगड़ाई लेने लगी है मेरी हर रात मुझसे शरारत करने लगी है मेरी हयात भांग सी घुलमिल गयी है तुम्हारी शोखियाँ मेरी धड़कनो के साथ सुरूर सा छाया रहता है मानो...


  • अध्यात्म रोग

    अध्यात्म रोग

    शास्त्रों में तीन प्रकार के दुःख बताए गए हैं- आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक। आधिभौतिक दुःख अत्याचारी मनुष्यों और हिंसक पशुओं आदि से उत्पन्न होते हैं। आधिदैविक दुःख अति वृष्टि, आंधी, भूकम्प आदि प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न...

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