नवीनतम लेख/रचना






  • स्त्री

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    हमने तो जिसे भी चाहा, वहाँ सिर्फ़ धोखा ही, मिला ! जिसके लिये हमने ,, अपनी हर खुशी, हर चाहत तक, कुर्वान कर दी ! पर बदले में, सिर्फ़ धोखा, ही मिला ! वो हमे, समझ...


  • मानवता

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    बस पलट गयी करुण क्रंदन से वातावरण गूँज उठा । कुछ लोग आये लगा फरिश्ता हैं किन्तु वो टटोल रहे थे लोगों की जेबें ! समेट रहे थे आभूषण औ कीमती सामान।

  • जीवन की डोर

      पुरवैया हवाओँ के संग संग लहराए मेरे सपने और मेरा अतीत अपनी लाल चुनरिया को मैँने थाम लिया है अपने आगोश मेँ वैसे ही जैसे सपनोँ को जीती हूँ अपने अन्तःकोष मेँ . . ....

राजनीति

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