नवीनतम लेख/रचना

  • ~कृपा बरसा जाना~

    ~कृपा बरसा जाना~

      धर्म विरुद्ध कभी ना चले हम मैया तू सदा मार्गदर्शन करती रहना मैया हम तो तेरी ही संतान हैं हम पर सदा अपनी नजर बनाये रखना माना मानुष तन में रह खुद पर कभी गर्व...

  • कविता : सीली यादें

    कविता : सीली यादें

    आहा ! प्यार भरी वो बारिश……. सदा याद रहेगी मुझको जी भरकर भींगे थे हम हर लम्हा हर पल जीया था हमने इन्द्रधनुषी सपने जैसा , पर बरसात के मौसम की तरह तुम भी अब गुम हो गए...

  • गिरवी

    गिरवी

    कॉलेज ख़त्म होने का आखिरी दिन, सभी लोग एक दूसरे से विदा ले रहे हैं. गले मिल रहे हैं. अपना फ़ोन नंबर बदल रहे हैं. एक दूसरे को भविष्य में न भूल जाने का प्रण ले...


  • ~मेरे कृष्ण कन्हैया~

    ~मेरे कृष्ण कन्हैया~

    ना कोख में पाला ना ही जन्म दिया , कृष्णा तुने यशोदा को माँ का मान दिया | हर नटखट बाल शरारत को करके, माँ यशोदा को तुने निढाल किया | माँगा चाँद खिलौना, नहीं खाया...

  • इतवार

    इतवार

    आज सुबह सुबह ही याद आ गया बचपन का वो इतवार आराम से उठना अपनी मनमर्जी के साथ उठते ही मां को अपनी पूरी दिनचर्या बताना क्या क्या मुझे खाना है और क्या पहनना आज ना...


  • सूरत या सीरत ……

    सूरत या सीरत ……

    सूरत को निखारने के लिए क्या कुछ नहीं हैं मार्किट में पर सीरत को क्या किसी तरह निखारा जा सकता है कभी भी नहीं कभी नहीं …. नामुमकिन है सूरत तो एक दिन ढल जाएगी पर...

  • दिलों की दूरियाँ

    दिलों की दूरियाँ

      पहले चलती थी पैसेंजर ट्रेन- आवाज आती थी, गाड़ी चलेगी तो पहुंचेगें, फिर आई एक्सप्रेस ट्रेन- यात्री बोले, गाड़ी चली है तो पहुँच ही जाएँगें, फिर आई राजधानी एक्सप्रेस, यात्रीगण बोलें, गाड़ी अभी चले- अभी...


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