नवीनतम लेख/रचना

  • हायकू= सावन

    हायकू= सावन

    हायकू= सावन [१] चलत सखी कह गयी सयानी बरसे पानी/ [२] बादरिया भी हरस रही राधा मनमोहन/ [३] तूफ़ानी दिल मचल रहा मन सावन जैसा / [४] सावन झूला झूले सखियाँ सज उड़े आकाश / [५]...

  • सादे से लम्हें..

    सादे से लम्हें..

    फिर वो सादे से लम्हें खोजता हूँ | जिनमें जीवन जीया खुल के वो बाते सोचता हूँ | बदल गया यूं तो वक्त ,खुद को भी बदल रहा हूँ | अपने मे अन्तर पहले से कितना...


  • कोरा कागज

    कोरा कागज

    मेरे दिल के कोरे कागज पर तुम्हारा ही सिग्नेचर है जिसे जब चाहो जैसे चाहो भुना लो क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह. . . सुनो प्यार और पैसा दो अलग अलग चीजेँ हैँ कभी भी...

  • तन्हाई

    तन्हाई

    ट्रक लेकर आसाम से लौटा गुरदित्ता हैरान था | हर बार उसकी बीबी उसको मिलकर हिरनी से उतावली कुलाचे भरउठती थी पर इस बार एक शांत झील सी लग रही हैं |कल रात भी बिस्तर पर...

  • कविता : मन

    कविता : मन

    कतरा-कतरा पिघलने लगा मन अरसे से जमी ख्वाहिशों को मिली जब से कुनकुनी धूप तेरे साए की तनहाइयों की कंक्रीट पर झरने लगे मिलन के मोगरा देख जरा कितना ऊपर उठ गया खुशियों का गुलमोहर बासी...


  • कशिश

    कशिश

    लाख कोशिश की उन्हें, भूल जायें! पर चाहकर भी, उन्हें न भूल पाये… न जाने कैसी,कशिश है उनमें, जितना भूलना चाहा, वो उतने ही याद आये! बडा जिद्दी है ये दिल​, दर्द जुदाई का भी ,...



राजनीति

कविता