नवीनतम लेख/रचना

  • गीत

    गीत

    इक तीर  जिगर के  पार  गया, दिल जीत गया, दिल हार गया, हर काम  से मन नाचार  गया। इक तीर जिगर के पार गया…..   इक इश्क की बाज़ी  हार आए, इज़हार   गया,   इंकार...


  • प्रार्थना

    प्रार्थना

    कहीं एक मासूम सा अरमान टूटा होगा फिर मिट्टी का कच्चा मकान टूटा होगा अमीरों के लिए बेशक खबर हो जलजला गरीब के सर पे तो आसमान टूटा होगा || प्रभु से अपने लिए कुछ न...


  • ग़ज़ल

    उसका चेहरा है क्यूँ उतरा जनाब मत पूछो। लगा है हुश्न पर पहरा जनाब मत पूछो ।। मुद्दई और गवाहों की जरुरत क्या थी । फिर वो पेशी से है मुकरा जनाब मत पूछो।। हम इंकलाब...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हमसे पूछा न गया उनसे बताया न गया प्यार मन में ही रहा, होठों पे लाया न गया लट एक झटके से पलकों पे गिराली लेकिन आँख का मोती मगर हमसे छिपाया न गया चाँदनी रात...


  • अंतिम गिरह

    मेरा सौन्दर्य तुमसे अछूता रहा आज तक न जान पाई सूने माथे में मैं मासूम दिखती हूँ या सिंदूरी मांग मुझमे रक्तिम आभा भरता है—- सुहाग चिन्ह जरूरी थे सुहागन दिखने के लिए मैं कहती हूँ...


  • चाहा था मैंने पलकों पर

    चाहा था मैंने पलकों पर

    चाहा था मैने पलकों में सपनों का महल बनाना तुम जो ठहरे छलिया , छल कर किया नया बहाना   पहना कर पायल की बेड़ी कंगन की हथकड़ियाँ सिंदूरी सस्कृति से लिखकर उम्र  कैद मुझे कर...

राजनीति

कविता