नवीनतम लेख/रचना


  • अंतर्चक्षुओँ की भोर

    अंतर्चक्षुओँ की भोर

    हुआ यूँ कि संध्या ढली, पंछियोँ की टोली लौट चली , अंबर भी काला पड़ने लगा, पत्ता पत्ता अंधकार के बाणोँ से लड़ने लगा। पहाड़ अंबर की कालिमा मेँ विलीन हो गये, और दिनभर मुस्कराते फूले...

  • कविता

    कविता

    कहीं है नींद का शहर कहीं उजालों की बारिश है समंदर की गहराइयों से हर दिल की गुजारिश है जमकर बादल बरसते हैं जब मन मयूर सा झूमे है तब कहीं है मदहोशियों का आलम कहीं...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    1 पलट देखो …. नाइन और सिक्स …. जिन्दगी रूपहर्ष विषाद … दो हो एक हो जाए …. बातें चिद्रूपउलट सीखो ….. छत्तीस ,तिरसठ …. आत्मा जो चाहेपिच्छिल मनु …. उल्टा सोच के संगी …. तम...


  • जनेवि में भगवा लहर का शुभारम्भ

    जनेवि में भगवा लहर का शुभारम्भ

    प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में प्रारंभ से अभी तक वामपंथियों का वर्चस्व रहा है. बहुत प्रयासों के बाद भी राष्ट्रवादी अभी तक वहां प्रमुखता प्राप्त नहीं कर सके थे. प्राध्यापकों में वामपंथियों के वर्चस्व के कारण...


  • मेरा पहला प्यार

    मेरा पहला प्यार

    मेरा पहला प्यारवो गुलाबी जाड़ापसरा हुआ धूपमेरे छत परखिली धूप मेँनहाई हुई सीठिठकी थीपहली बारजब नजरेँ मिली थी तुमसेपहली बारतुम्हारा व्हाइट शर्टचाँदनी रात मेँचाँद की तरह खिलता हुआमेरी नजरोँ मेँ समा गया . . .इन वावरी...


  • रमा

    रमा

    ज़िन्दगी क्या चीज है, समझ न आए कभी — हँसी थमी नहीं, रुला देती है. बड़ी जटिल हैं इसकी राहें. आदमी बहुत कोशिश करता है कि अपनी राहों को हमेशा कंटकों से मुक्त रखे. लेकिन सबकुछ...

कविता