नवीनतम लेख/रचना

  • मजदूर  और मोबाइल

    मजदूर और मोबाइल

    मजदूर मजदूर अनपढ़ है, मजबूर है, इसीलिए तो तर्क वितर्क उससे दूर है, वह विश्लेषण और व्याख्या का काहिल नहीं है, पर इतना भी जाहिल नहीं है, कभी सट्टा कभी जुआ कभी लाटरी , कैसे भी...

  • कवि और कविता संवाद

    कवि और कविता संवाद

    एक दिन कविता अचानक कवि से बोली, तुम्हारी नीरसता भरी बातें मेरे शब्दों का श्रृंगार बिगाड़ देती हैं कवि ने विस्मयता से कहा, नीरस क्या लगता है तुम्हे? कविता बोली, तुम हमेशा मुझे बलिदान की देवी...

  • मन का द्वन्द….

    मन का द्वन्द….

    टूट जाता है बाँध सब्र और संयम का जब महसूस होता है तुम्हारा तो कोई भी नहीं लगने लगता है निष्फल जीवन क्यूँ और किसके लिए इतनी भागदौड़ फिर लेते हैं जन्म ख्याल उचित, अनुचित सब...


  • पनाह

    पनाह

      बड़ी देर से भटक रहा था पनाह की खातिर ; कि तुम मिली !सोचता हूँ कि ; तुम्हारी आंखो में अपने आंसू डाल दूं… तुम्हारी गोद में अपना थका हुआ जिस्म डाल दूं…. तुम्हारी रूह...

  • कल्याण करें

    कल्याण करें

    आओ मिलकर सम्मान करें। मात्रृभुमि कल्याण करें। वृक्षों को ना काटे हम। फूलों को ना तोड़े हम। दूषित, पानी को ना करें हम। बर्बाद, पानी को ना करें हम। आओ मिलकर सम्मान करें। जल है अमूल्य...


  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 19)

    16. परंपरा का निर्वाह बौद्धधर्म के अनुयायी मंगोल तेमूचिन (जिसे संसार चंगेज खाँ के नाम से जानता है।) के समय से भारत पर हमला कर रहे थे। मंगोलों का ऐसा ही एक हमला सुल्तान जलालुद्दीन ख़िलजी के समय...



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