नवीनतम लेख/रचना


  • प्यार का बंधन

    प्यार का बंधन

      अर्पण आज तुमको हैं जीवन भर की सब खुशियाँ पल भर भी न तुम हमसे जीवन में जुदा होना रहना तुम सदा मेरे दिल में दिल में ही खुदा बनकर ना हमसे दूर जाना तुम...

  • बेटी

    बेटी

    फूल थी तेरी बगिया की माँ फिर क्यों रीति है ये कह रोंप दिया दूसरी क्यारी । रोती है तू भी कर याद चुपके चुपके और में भी हो दूर तुझ से तन्हा तन्हा।। क्यों बेटी...

  • चंद हाइकु कविताएँ

    चंद हाइकु कविताएँ

    1 फूटने लगा ललछौंहा उजास पूरबी छोर । 2 प्यासा पादप ताके अंतिम क्षण बरसो मेघ । 3 खिला सुमन प्रेमी सूरज संग /गाल चूमती हवा चूमे किरण / हँसे किरण । 4 मसल नैन सुबह...

  • यशोदानंदन-49

    श्रीकृष्ण अपने सभी बन्धु-बान्धवों और अनुचरों के साथ मथुरा आए थे। अपने साथ प्रचूर मात्रा में खाद्य-सामग्री भी लाना नहीं भूले थे। शिविर में पहुंचते ही अनुचर सेवा में तत्पर हो गए। उन्होंने दोनों भ्राताओं के...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    क़ैदी हूँ  क़फ़स  का  मैं  भरपूर  बहारों  में मुँह खोल नहीं सकता, कहता हूँ  इशारों में ग़ैरों ने मुहब्बत की, अपनों ने किया धोखा होती है  मेरी गिनती  तक़दीर के  मारों में इस रहगुज़र से जाना...

  • स्मृति के पंख – 3

    यात्रा बहुत अच्छी रही। अब हम घर वापिस पहुँच गए। कुछ दिन दुकान को बनाने संवारने में लगे। फिर से मदरसा, खेल-कूद, हंसना और हंसाना। भ्राताजी का रिश्ता भी गढ़ी कपूरा में धवन खानदान में हुआ।...

  • कामरेड की पहचान

    कामरेड की पहचान

    जिस मज़बूती से नकार देते हो, तुम ईश्वर का अस्तित्व नहीं नकार पाते अल्लाह को कामरेड ! यह पहला बिंदु है तुम्हारी पहचान का। — सुधीर मौर्य


कविता