नवीनतम लेख/रचना


  • काश ! कोई होता

    काश ! कोई होता

    दबा हुआ है मन में बहुत कुछ बहुत कुछ कहना चाहते हैं ये लब फिर कुछ सोचकर चुप हो जाते हैं कहीं कुछ ,गलत न कह जायें कहीं कोई रिश्ता ,दरक न जाये कहीं लब खुले...

  • “सपना”

    “सपना”

    “सपना” सपनों मे मुझे बादल आ घेरते हैं रेत ..मेरे पांवो मे धंस जाते हैं नदी …मुझमे डूबती चली जाती हैं रास्ते ..मुझ पर से चलने लगते हैं लेकीन मै चाहता हूँ हर रात स्वप्न वही...




  • दीवाली भी तब-तब हो जाएगी

    दीवाली भी तब-तब हो जाएगी

    जब-जब दीप जलेंगे, दीवाली भी तब-तब हो जाएगी। अंधकार की इस दुनिया में, नहीं उम्र होती है ज्यादा और सूर्य की किरणों को ना बाँध सकी कोई मर्यादा आभा के आँचल में छिपकर, तिमिर-निधि सब खो...

  • शुभ-स्वागतम् लक्ष्मी

    शुभ-स्वागतम् लक्ष्मी

    मानव जीवन के चार पुरूषार्थों में से एक है-अर्थ अर्थात् धन अर्थात् लक्ष्मी। पर एक प्रकार का धन और होता है-काला धन। चैंकिए मत! लक्ष्मी काली नहीं होती, धन काला होता है। लक्ष्मीपति काले होते हैं।...



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