नवीनतम लेख/रचना






  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 28)

    25. देवगिरी मेें चिंता देवगिरी के महाराज रामदेव व्यग्र भाव से टहल रहे हैं, दोनों हाथ को बाँधकर पीठ पीछे कमर पर बाँधे हैं। युवराज शंकर देव कक्ष में प्रवेश करते हैं, राजा को व्यग्रता से टहलता देखकर...


  • कविता : महज़ एक ख्याल

    कविता : महज़ एक ख्याल

    ये हैं महज़ एक ख्याल पर मैंने रूह से महसूस किया ज़िंदगी खूबसूरत हैं चलो आज कुछ पल ज़िंदगी को मेरी नजर से महसूस करो हाँ ज़िंदगी खूबसूरत हैं पता हैं कैसे … जैसे कि तुम...

  • “दु:ख”

    “दु:ख”

    सुबह में मैं बहुत खुश था लिये मन में सपने सुंदर था अपने घर की ओर जा रहा था खुशियों का लहर मन में था तभी अचानक वो आया था दुखों का लिया पहाड़ था। सबको...

  • वो अजनबी लड़की

    वो अजनबी लड़की

    केशव ने कुर्सी पर बैठे हुए ही सामने लगी दिवार घडी पर नजर डाली तो देख के चौंक गया , एक बजने वाले थे । उसने आस्चर्य मिश्रित आवाज में कहा ” ओये, आज फिर देर...

राजनीति

कविता