नवीनतम लेख/रचना


  • खामोश आंखें

    खामोश आंखें

    जाने किस तलाश मे थी, वो खामोश आंखें सोच रही थी अपने अतीत के बारे मे, या सहमी थी भविष्य की सोचकर। ठहरी सी लगती थी किसी विनाश लीला के बाद के मंजर की तरहा। लिये...

  • अमन चाँदपुरी के पचास दोहे

    अमन चाँदपुरी के पचास दोहे

    हे! विधना तूने किया, ये कैसा इंसाफ। निर्दोषों को है सजा, पापी होते माफ।1। कैसे देखें बेटियाँ, बाहर का परिवेश। घर में रहते हुए भी, हुआ पराया देश।2। दोहे संत कबीर के, तन-मन लेय उतार। मानस...

  • तुझे क्या कहुं

    तुझे क्या कहुं

    यूं धर्मो के नाम पर, गर हम बंटे ना होते ये मंदिर,ये मस्जिद के झगडे ना होते। बेगुनाहों का खून ,यूं गलियों मे ना बहता बेवाएं यूं ना तडपती, मासूम यूं अनाथ ना होते॥ तेरी फितरत...



  • कुछ शब्द

    कुछ शब्द

    कल घर से निकली ही थी कुछ शब्द मिल गए रास्ते में बदहवास से बेचैन से कभी यहाँ कभी वहा अरे ! क्या हुआ ? बाहर क्यों घूम रहे कोई तुम्हे चुरा ले गया तो पहले...

  • भारती पवित्र क्षेत्र…

    भारती पवित्र क्षेत्र…

    पंच कर रहे प्रपंच, जनता त्राहि त्राहि करे। भारती का दर्द भला, कौन हरे कौन हरे।। धर्म कर रहा विलाप, क्रुद्ध जन प्रचंड है। आस्था पुनीत कलश,हुआ खंड खंड है॥ दुष्टता दहक रही है, चंड घात...

  • बुलन्द अशआर

    बुलन्द अशआर

    ज़िंदगी से मौत बोली, ख़ाक हस्ती एक दिन जिस्म को रह जायँगी, रूहें तरसती एक दिन मौत ही इक चीज़ है, कॉमन सभी में दोस्तो देखिये क्या सरबलन्दी और पस्ती एक दिन रोज़ बनता और बिगड़ता...

  • नाज़

    नाज़

    नाज तो सदा ही रहा अपने देश के जवानों पर जो मर मिटते है हर घङी करते फक्र बलिदानों पर आज नमन मेरा उनके घर और परिवार को जो भेजते सीमा पर अपने जिगर के टुकङे...

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