नवीनतम लेख/रचना

  • बेवफा लहरें

    बेवफा लहरें

    समुद्र की लहरें कभी खामोश नहीं रहतीं, समुद्र की लहरें कभी वफ़ा नहीं करतीं, उनकी फितरत है लौट जाना, साहिल को भिगोकर, लहरों पे कभी यकीन न करना रेत पर पाँव जमा कर रखना, वरना, बेवफा...


  • जीवात्मा और इसका पुर्नजन्म

    ओ३म् हम इस विस्तृत संसार के एक सदस्य है। चेतन प्राणी है। हमारा एक शरीर है जिसमें पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच कर्मेन्द्रियां, मन, बुद्धि, चित्त एवं अहंकार आदि अवयव हैं। शरीर से हम सुख व दुख का...

  • ग़ज़ल (अजब गजब सँसार )

    ग़ज़ल (अजब गजब सँसार )

    रिश्तें नातें प्यार बफ़ा से सबको अब इन्कार हुआ बंगला ,गाड़ी ,बैंक तिजोरी इनसे सबको प्यार हुआ जिनकी ज़िम्मेदारी घर की वह सात समुन्द्र पार हुआ इक घर में दस दस घर देखें अज़ब गज़ब सँसार...

  • अनमोल यादें

    अनमोल यादें

    सांझ की सरगोशी में लिपटे हुए ये अनमोल यादें ,,,,,, आज भी सुरक्षित हैं किसी बेशकीमती नगीने की तरह ……….. अक्सर जब बारिश की बूंदों संग लहराती है मदमस्त पवन दिल के हर कोने में बज...

  • हम हैं, नकलचियों का देश !

    हम हैं, नकलचियों का देश !

    दुनिया के विश्वविद्यालयों की श्रेष्ठता का मूल्यांकन करनेवाले एक विश्व-केंद्र का ताजा मूल्यांकन भारत को चैंकानेवाला है। उसके अनुसार दुनिया के पहले 340 श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में भारत का एक विश्वविद्यालय भी नहीं है। 341 वें नंबर...

  • मैं हूँ पेड़

    मैं हूँ पेड़

      मैं हूँ पेड़ जब मैं छोटा था अभिलाषी था पावन भूमि का अच्छे इंसान का मानव के जैसे जीवन का बन और बिहंगम का जब थोडा बड़ा हुआ भयभीत रहने लगा पशुओं से , पशु...

  • दशावतारों की वैज्ञानि‍कता

    दशावतारों की वैज्ञानि‍कता

    हमारे 18 पुराणों में दशावतारों की कथा आती है। लेकि‍न पढे-लि‍खे लोग इसे काल्‍पनि‍क मानते हैं। इसमें उनकी कोई गलती नहीं हैं, क्‍योकि‍ जो लोग इन दस अवतारों महि‍मा मंडन करते है, तब यह नहीं बताते...


  • “खर-पतवार”

    “खर-पतवार”

    रोज-रोज ना होय रे मुरख, तेरा मन मुझसे मनुहार मेरे अंदर भी एक आदम, खुद झिझके ना करे गुहार बहुत मनाया नहीं पिघलता, पत्थर सा दिल है मानों दिख जाता गर बाहर होता, चीखें धांय करे...

राजनीति

कविता