नवीनतम लेख/रचना

  • हाइकु

    हाइकु

    1 ठूँठ का मैत्री वल्लरी का सहारा मर के जीया। 2 शीत में सरि स्नेह छलकाती स्त्री फिरोजा लगे। 3 गरीब खुशियाँ बारम्बार जलाओ बुझे दीप को। 4 क्षुधा साधन ढूंढें गौ संग श्वान मिलते शिशु।...


  • मंझधार

    मंझधार

      बिना शब्दों के तुझे लिखने लगा हूँ क्षितिज से मै तुझे दिखने लगा हूँ शमा बनकर तू जल उठी है मै परवाने सा मिटने लगा हूँ जगमगाती सड़कें रात भर खामोश ही रहे टिमटिमाते तारों...

  • हाइकु ….

    हाइकु ….

    कुछ हाईकु अलग अलग बयानगी लिये …. फैलाए फन डसने को आतुर फरेबी वक्त …………..(1) बुझा चिराग जीवन अभिशाप लाचार बाप …………..(2) मैला आँचल बुझाती उदराग्नि माँ वैश्या नहीं …………(3) छू लेती नभ बेटियाँ दें सम्मान...



  • कविता : हम सब एक हैं

    कविता : हम सब एक हैं

    हम सब एक है एक धरती एक उपवन हम सब उसके बासी है मिली धूप हमें एक बराबर मिटटी के कर्ण के सामान हम रूप रंग हो भले अलग हमारे पर मन से हम एक है...




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