नवीनतम लेख/रचना



  • किराये का खोल

    किराये का खोल

    बात उन दिनों की है.. ………….जब मेरे पति अकसर काम के सिलसिले में बाहर रहते थे.बेटे को स्कूल के लिये बस स्टाप पे छोड़ना ……….और लाना मेरी ही जिम्मेदारी थी…..घर से स्टाप पहुँचने मैं……. करीब २० मिनिट का वक्त...

  • मिन्नतें

    मिन्नतें

    रात भर बुलाते रहे हम, पर नींद हमारी आँखों से, नाराज सी रही! की कोशिश बहुत, मिन्नतें भी की, पर आने को पल भर भी, न तैयार हुई! रात भर बुना किये, ख्बाबों मैं उन्हें, उनके...





  • मुस्कुराना

    मुस्कुराना

    ह्मे लोगो ने मुस्कुराते देखा अंधेरो मे दीप जगमगाते देखा उन्होने इसे ढोंग समझा पर मुस्कुराना हमारी फ़ितरत मे है दर्द भी हो सीने में तब भी मुस्कुराना हमारी आदत मे है इस आदत से लोग...

  • गज़ल

    गज़ल

    आँखों में उनके दीदार की हसरत लिए हुए राहों में पलकें बिछाये जानें कब से बैठे हैं बह न जाये आँसूओं संग कहीं तस्वीर उनकी आँखों में सैलाब छुपाये जाने कब से बैठे हैं लौट न...

कविता