नवीनतम लेख/रचना

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कौन मेरे टूटते ख्वाबों की भरपाई करे । दोस्तों के बीच दुश्मन की शनासाई करे । कल भी मुझपे तंज करती थीं शहर की रौनकें । आज भी ये काम मेरे दिल की तनहाई करे ।...

  • एक प्रेम कविता

    एक प्रेम कविता

    देखते ही तुझको दिल में मेरे, उड़ने लगे फव्वारे! मची पक्षियों की चहल-पहल, वो भँवरो के गुनकारे। शबाबी बाग में जाकर भी, साँस नहीं ले पाता हूँ! क्यूंकि, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।। राज़ करती हो...

  • एक मुक्तक

    एक मुक्तक

    झुकी नज़रों को तेरी, इकरार समझा था , खामोश लबों को मैं, इसरार समझा था, नहीं जानता था सबब इसके पीछे क्या था, तेरे मुड़कर चले जाने को, प्यार समझा था । डॉ अ कीर्तिवर्धन 8265821800

  • दोहे

    दोहे

    १. सटे-सटे से घर यहाँ, कटे-कटे से लोग। त्रासदी ये शहरों की, लोग रहे हैं भोग॥ २. धरा-गगन-पानी-हवा, ईश्‍वर के उपहार। साँस-साँस में वो बसा, मत छीनो अधिकार॥ ३. ख्वाबों की ताबीर ये, छोटा-सा संसार। महके...

  • पर्यटकों के साथ लूट

    पर्यटकों के साथ लूट

    महाबलेश्वर महाराष्ट्र के सतारा जिले के अंतर्गत आने वाला एक मशहूर पर्यटन स्थल जहां न सिर्फ़ दूर दराज के लोग छुट्टियां का आनंद मनाने यहां आते हैं बल्कि आस पास के कई शहरों के लोग यहां...

  • परछाईं 

    परछाईं 

    बस अभी अभी तो आई थी माँ की परछाईं थी । आभा भरी मैं प्रेम की अनुराग बन सहज सा आँखों में सपने थे कलियों सी मुस्काई थी बस अभी अभी तो आई थी माँ की...

  • रिश्ता

    रिश्ता

      तुझे देखा नही ,पर तुझे चाह लिया तुझे ढूँढा नही , पर तुझे पा लिया .. सच !!! कैसे कैसे जादू होतें है ज़िन्दगी के बाजारों में …. रिश्ता अभी अभी मिले है , पर...




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