नवीनतम लेख/रचना






  • माँ मेरा मन

    माँ मेरा मन

    माँ मेरा मन चाहता है सौन्दर्य सृष्टि का देखना आने दो इस जग में मुझको खुशियाँ दूंगी मैं भी तुझको मत मारना अजन्मे ही मुझे कूड़े की ढेर पर मत फेंकना माँ मेरा मन………………….   बेटा...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    किसी को समर्पित — आप अपने लेखनी को मत छोड़ियेगा। हौसले के उड़ान को नहीं तोड़ियेगा। यह मिला हुआ गुण ईश्वरीय वरदान है , इस दुनिया में लावारिस मत छोड़ियेगा। पढने की बात रही सो पढा...


  • यशोदानंदन-37

    वह शरद-पूर्णिमा की रात थी। बेला, चमेली, गुलाब, रातरानी की सुगंध से समस्त वातावरण मह-मह कर रहा था। चन्द्रदेव ने प्राची के मुखमंडल पर उस रात विशेष रूप से अपने करकमलों से रोरी-केशर मल दी थी।...

कविता