नवीनतम लेख/रचना

  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    हो गम की रात, आँखों ही आँखों में गुज़र जाने दो दर्द के दरिया को अपनी हद से गुज़र जाने दो दीया उम्मीद का तुम सदा जलाए रखना बेरहम वक़्त का भयावह तूफान तो थम जाने...


  • आत्मा- एक मिथ्या

    आत्मा- एक मिथ्या

    आत्मा का अस्तित्व हर धर्म में स्वीकार गया है , पत्न्तु जिस तरह से सभी धर्मो में मिथ्या रूप से ईश्वर की कल्पना गढ़ ली थी उसी प्रकार आत्मा की भी। दरसल आत्मा नाम की कोई...

  • बच्चों का मन

    बच्चों का मन

    बहुत ही आसान है बच्चों की मन को समझना पर.. समझना कौन चाहता है? कभी हम अपने तर्कों से उन्हें खामोश कर देते है तो कभी अपने अधिकार से चुप कभी अपना दंभ दिखाते है तो...



  • **भावनाओं का समंदर***

    **भावनाओं का समंदर***

    भावनाओं का एक समंदर,उठता रहता हैअकसर मेरे अंदर!कभी-कभी उद्वेलित हो उठता है,कभी खुशी से,चहक उठता है!बरसाती झरने की तरह ,झरना चाहता है,निर्जन वन मैं,हर तरफ गूँज उठे,जहाँ उसकी ध्वनी!उससे झरते भावों को सुन सके,कोई परिंदा,समझ सके!कभी...




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