नवीनतम लेख/रचना

  • दर्द

    दर्द

    “बाप दारू पीकर टुन्न हो जाता है, माई लोगो के घरो में चौका बर्तन करके सुबह शाम पेट की अग्नि शांत करने के जुगाड़ में रहती है। पढ़ने की तीव्र इच्छा ना जाने मुझमे क्यूँ पैदा...


  • राहगीर

    राहगीर

    चला जा रहा चला जा रहा,कहाँ जा रहा कहाँ जा रहा,पता नहीं मुझे पता नहीं,कहाँ जा रहा पता नहीं। अपने दिल के अन्दर,लिए सुख दुख का समंदर,लिये दुखो का भण्डार,या फिर लिए सपने सुन्दर,पता नहीं मुझे...

  • बाल श्रम

    बाल श्रम की समस्या को जड़ से मिटाना है, तो बाल श्रम कानूनों का ठीक ढंग से क्रियांवित करना ही पर्याप्त होगा। बाल दिवस पर बच्चों को बेहतर भविष्य देने के सरकारी वादे तभी पूरे हो...

  • बाल श्रम को रोकिये

    बाल श्रम को रोकिये

    बाल श्रम की समस्या को जड़ से मिटाना है, तो बाल श्रम कानूनों का ठीक ढंग से क्रियांवित करना ही पर्याप्त होगा। बाल दिवस पर बच्चों को बेहतर भविष्य देने के सरकारी वादे तभी पूरे हो...

  • देवी वन्दना

    देवी वन्दना

    अरुणोदय की तुम हो दामिनी, हो खण्ड खण्ड प्रभावनी। नभ से धरा तक तुम ही हो, देवी तुम ही जग धारिणी ॥ चंचल चपल कामायनी, प्रदीप्त ज्योत लुभावनी। तम में प्रकाश तुम ही हो , देवी...



  • गजल- ****अच्छा होगा****

    गजल- ****अच्छा होगा****

    फिक्र करें क्यों-कल क्या होगा. सब कुछ उसका चाहा होगा. वो अन्याय नहीं करता है, जो भी होगा,अच्छा होगा. तेरे साथ हँसे-रोये वो, तुझसे कुछ तो रिश्ता होगा. वो हर बात सुनेगा लेकिन, सच्चे दिल से...


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