नवीनतम लेख/रचना

  • कविता : असहमति के सोलह साल

    कविता : असहमति के सोलह साल

    विवाह के सोलह साल बादसोचती है श्यामलीकभी सहमती नहीं ली गई उसकीदेह उसकी थी देहपति दूसरा…सहमति नहीं ली गई उसकीजब पहली बार किन्ही निगाहों नेबाहर से भीतर तक नाप डाला उसेउसकी देह के बारे में जितना जानते...

  • कविता : कविता चाँद पर

    कविता : कविता चाँद पर

    हवाओं से रगड़ खा खा करछिल गए कन्धेहथेलियों पर बादल टिका कभी नहीं टिकाआँखे धूल सने आसमान परजहाँ ना कोई नक्षत्र ना आकाशगंगा…अमावस की रात मेंअपना ही हाथ सूझे ना सूझे…पर कविता अगर चाँद पर लिखनी...

  • कविता : नेकी कर कुएं में डाल

    कविता : नेकी कर कुएं में डाल

    कुआं है , पानी हैगहरा , बहुत गहरा गहराई कुएं की नहीं , पानी की हैयह पहली बात है…पत्थर फेंकते हुए लोगनहीं जानते पानी टूटता नहीं , पानी नहीं जानतापत्थर का भययह दूसरी बात….तीसरी बात यह किजब तक...

  • कविता : जो टूट गया

    कविता : जो टूट गया

    सधे हाथों से थाप थाप कर देता है आकारगढ़ता हैं घड़ा गढ़ता हैं तो पकाता हैंपकाता है तो सजाता हैसज जाता है जो… वह काम आता है…हर थाप के साथ खतरा उठाते हएथपते हुए , गढ़ते हुए रचते हुए ,...

  • उत्तराखंड का शोक !

    कोई नालायक और अकर्मण्य सरकार होने पर आम जनता को क्या-क्या भुगतना पड़ता है, यह उत्तराखंड की कांग्रेस सरकारों (विजय बहुगुणा और हरीश रावत दोनों) को देखकर बखूबी समझा जा सकता है. पिछले वर्ष केदार घाटी...




  • पिया का प्यार

    पिया का प्यार

    अपने अपने पिया का प्यार पाने के लिए, सुहागन ने स्वयं को दुल्हन सा सजाया है, बालों में लगा कर भीनी भीनी खुशबू का गजरा, चमकती लाल बिंदिया से क्या माथा चमकाया है, कानो में झुमके...


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