नवीनतम लेख/रचना




  • वक्त की बिसात ….

    वक्त की बिसात ….

    वक्त ने बिछायी है कुछ ऐसी बिसात , अपने ही तो कर रहे हैं अपनों पर वार !! भावनाओं का रहा नहीं अब कोई मोल , पैसा हावी हो रहा रिश्ते हुये अब बेमोल !! वफाओं...


  • हिंदुस्तान लिखता हूँ…!

    हिंदुस्तान लिखता हूँ…!

    ना मुस्लिम ना हिंदु, इंसान लिखता हूँ, सदा कलम से अपनी हिंदुस्तान लिखता हूँ…! जात-पात क्या है, राग-द्वेष क्या है, दुनियादारी से उठकर ईमान लिखता हूँ, सदा कलम से अपनी हिंदुस्तान लिखता हूँ…! क्या दुश्मन-क्या घाती,...


  • यशोदानंदन-४३

    नन्द बाबा ने ब्रह्मास्त्र चला ही दिया। सारे संसार को समझाना आसान था लेकिन मैया को? बाप रे बाप! वे तो अपनी सहमति कदापि नहीं देंगी। श्रीकृष्ण को बाबा ने धर्मसंकट में डाल ही दिया। परन्तु...



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