नवीनतम लेख/रचना

  • प्रार्थना

    प्रार्थना

    कहीं एक मासूम सा अरमान टूटा होगा फिर मिट्टी का कच्चा मकान टूटा होगा अमीरों के लिए बेशक खबर हो जलजला गरीब के सर पे तो आसमान टूटा होगा || प्रभु से अपने लिए कुछ न...


  • ग़ज़ल

    उसका चेहरा है क्यूँ उतरा जनाब मत पूछो। लगा है हुश्न पर पहरा जनाब मत पूछो ।। मुद्दई और गवाहों की जरुरत क्या थी । फिर वो पेशी से है मुकरा जनाब मत पूछो।। हम इंकलाब...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हमसे पूछा न गया उनसे बताया न गया प्यार मन में ही रहा, होठों पे लाया न गया लट एक झटके से पलकों पे गिराली लेकिन आँख का मोती मगर हमसे छिपाया न गया चाँदनी रात...


  • अंतिम गिरह

    मेरा सौन्दर्य तुमसे अछूता रहा आज तक न जान पाई सूने माथे में मैं मासूम दिखती हूँ या सिंदूरी मांग मुझमे रक्तिम आभा भरता है—- सुहाग चिन्ह जरूरी थे सुहागन दिखने के लिए मैं कहती हूँ...


  • चाहा था मैंने पलकों पर

    चाहा था मैंने पलकों पर

    चाहा था मैने पलकों में सपनों का महल बनाना तुम जो ठहरे छलिया , छल कर किया नया बहाना   पहना कर पायल की बेड़ी कंगन की हथकड़ियाँ सिंदूरी सस्कृति से लिखकर उम्र  कैद मुझे कर...

  • कविता : चाय

    कविता : चाय

    कितने कप ठंडी हो गई चाय बीबी के हाथों की फेसबुक  में लीन होकर । कितनी बार गर्म किया , बीबी ने अपना दिमाग, नहीं चाय । कितनी बार सोचे, छोड़ देंगे बीबी को नहीं, फेसबुक...

  • अनमोल रत्न

    अनमोल रत्न

    कोयल जब कुंहके बगिया में बुलाते उसे बड़े प्यार से, सुनकर कौए की बोली हम भगाते हैं दुत्कार के। दोनों का रुप काला ही है फिर क्यों है ऐसा अंतर, सबके बस में कर दे ये...

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