नवीनतम लेख/रचना

  • तेरे पास तो….

    तेरे पास तो….

      तेरे पास तो मुहब्बत बेपनाह है मेरे लिए तेरा सुन्दर चेहरा जैसे माह है मेरे लिए इश्क़ कुर्बत नहीं है वह एहतिराम इबादत है फासिले में रहूँ तुझे छूना गुनाह है मेरे लिए कभी कोहरे...

  • नेता जी

    नेता जी

    नेता जी ! देश का दिल आज भी है गरीब दूर दराज से आते यहाँ हैं गरीब गरीब-गरीब करके बन गये तुम अमीर कर देना अब गरीब जनता का भला बिजली-पानी, रोजी-रोटी मुफ्त में देंगे नेता...

  • कविता : नहीं चाहिये भीख…

    कविता : नहीं चाहिये भीख…

    मेरे देश में आते हैं विश्व की सबसे बडी पहचान मुझे पहनना चाहिये अच्छे ही परिधान क्यों में दिखूँ अमेरिका के सामने गरीब बराबरी का सौदा करना हो जब नहीं चाहिये भीख…… सबने मिलकर आआपा को...

  • लड़की

    लड़की

    ट्रेन बस में आधा टिकट लगे इसलिए दस साल की फेसबुक पर एकाउंट खुल जाए इसलिए तेरह साल की शादी होकर मां बाप को छुटकारा मिल जाए इसलिए अठारह साल की इतनी बड़ी हो गई घर...


  • घर घर घूम रहा हूँ

    घर घर घूम रहा हूँ

    घर घर घूम रहा हूँ मुठ्ठी भर याद मिले जो कहीं हर क्षण कण में है राग हमारा हर पल बीता है यहीं कहीं ।। निठुर बना है वक्त अभी हंसा किया करता था जो साथ...



  • उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 29)

    26. बगलाना मेें उत्सुकता बगलाना के छोटे से महल का एक कक्ष, आमने-सामने आसन पर राजा कर्ण और राजकुमारी देवलदेवी बैठे हैं। राजा सामने रखे मद्य के गिलास को उठाकर ओष्ठ से लगाते हैं राजकुमारी उठकर राजा के...


कविता