नवीनतम लेख/रचना

  • कविता : याद

    कविता : याद

    याद की शक्ल कभी पहचानी नहीं होती… किस लम्हे में किसकी याद आये इसका भी कोई गणितीय फ़ॉर्मूला नहीं है… तो फिर क्यूँ मैं तुमसे जुड़ी रहना चाहती हूँ … हिचकियों से, शाम के रंग से,...



  • प्रेम, ख़ुशी और स्वार्थ

    प्रेम, ख़ुशी और स्वार्थ

    मैं ठुकरा सकता था तुम्हारा प्रेम ठीक वैसे ही जैसे कभी अर्जुन ने ठुकराया था उर्वशी का प्रेम ओ लड़की। पर तूने प्रेम कहाँ किया था तूने तो बनाया था मुझे आलम्बन अपने स्वार्थ का कहो...



  • एक और जीवन

    एक और जीवन

      तुम्हारे अकेलेपन के आकाश में  अक्षर ,सितारों की तरह जगमगाते होंगे  तुम्हारे अकेलेपन के वन में  शब्द के बीज अंकुरित होकर चन्दन का वृक्ष बन महकते होंगे तुम्हारे अकेलेपन के आँगन में गमलों में सपने...

  • ~~~काँटो  भरी राह ~~~

    ~~~काँटो भरी राह ~~~

    टिहरी में आये जलजले में सब कुछ तबाह हो गया था । कौशल का मनोबल फिर भी ना टुटा था । रह-रह उसके पिता की बात उसके दिमाक में गूंजती थी कि विद्यादान सबसे बड़ा दान...

  • देह की चाहत

    देह की चाहत

    मत करो मुझे समर्पित उन हाथों में जिन हाथों में जाकर बन जाऊँ महज खिलौना मन बहलाने का । मालूम है मुझे अपना दायरा लोक-लाज, मान-मर्यादा संस्कृति और अपना संस्कार । चाहत है मेरी खो जाऊँ...

  • केजरीवाल मॉडल का भविष्य

    केजरीवाल मॉडल का भविष्य

      वेदों में पुरुषार्थ करने का सन्देश है अर्थात परिश्रम करो और जीवन में उन्नति करो। आलसी, मुफ्तखोर, कामचोर को नापसंद किया गया है। केजरीवाल की सोच साम्यवादी सोच से मेल खाती है जिसमें सभी को...

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कविता