नवीनतम लेख/रचना



  • ”कविता लिखो”

    ”कविता लिखो”

    एक भावना दिल की मचल कर लगे कहने मुझ पर कविता लिखो…. कुछ ख्वाब अधूरे से टूट कर लगे कहने मुझ पर कविता लिखो…. एक तमन्ना अनसुलझी सी कहती है बार-बार … यूँ तमन्नाओं की आरजू...


  • उम्मीद

    उम्मीद

    दिल को अब भी है उनसे उम्मीद-ए-वफ़ा बहुत जो भूल गये वादा-ए-वफ़ा को निभाते रहना कभी दुनिया को पता ना चले हमारी रुसवाई का तुम दिखावे के लिए ही हाथ मिलाते रहना कितने तूफ़ानों से गुज़री...

  • “महफूज़ “

    “महफूज़ “

      आओ बेतकल्लुफ़ हो जाए न कोई बंदिश हो न ही कोई तखल्लुफ़ हो पाए उतार कर देहरूपी परहन छोड़कर मन के अलंकृत प्रलोभन रूह की पवित्र नदी में गहरे तक डूब जाए प्रेम पथ में...


  • लछमी

    लछमी

    लछमी अपने घर में बैठी सोच रही थी क़ि आखिर माँ ने उस का नाम लछमी किया सोच कर रख दिया था। सारी उमर विधवा की तरह और गरीबी में गुज़ार दी , उस की बेटी...

  • पुनर्जन्म

    पुनर्जन्म

    आज सुकन्या जल्दी जल्दी घर से निकलने की तैयारी में थी ,कुछ बङबङाती जा रही थी ,तबतक माँ की आवाज आ पहुँची………. सुकू !! अरे मेरे लिए एक कप चाय बना दे ? ये माँ भी!!!!...

  • “एक छाँव”

    “एक छाँव”

    साये की तरह मैं तुम्हारा पीछा कर रहा हूँ हो गए हैं बहुत दिवस व्यतीत हो चुके न जाने कितने बरस पर तुम नदी कि तरह भागती ही जा रही हों चंचल हैं तुम्हारे मन का...

कविता