नवीनतम लेख/रचना


  • क्षणिका

    क्षणिका

      गम की आंधिया उजाड़ ना दे चमन तेरा ढाल बन के सदैव तुम खड़ी रहना… प्यार से सींचना शाखाएं अपनी समय के थपेड़ो में मुरझाने मत देना …..सविता मिश्रा


  • चिड़िया

    चिड़िया

      लिये चोंच में तिनका चिड़िया देखती इधर उधर खोजती घने छांव वाला एक शजर पेट में दाना नहीं भूख से व्याकुल चिड़िया ढुंढ्ती आंगन वाला घर कड़ी धुप में भरती ऊंची लम्बी उड़ान प्यासी चिड़िया...



  • एक अनार सौ बीमार

    एक अनार सौ बीमार

    कुछ लोगों को हमेशा शिकायत करते रहने की आदत बन चुकी है। उसी आदत के कारण वह सभी जगह मीडिया पर अपने उतावलेपन और ‘राजनैतिक सूझ–बूझ’ का परिचय भी देते रहते हैं। हर बात में सरकार...

  • कविता : बेटी

    कविता : बेटी

    (यह कविता मैंने उस क्षण की कल्पना करके लिखी है जब मेरी बेटी बड़ी हो जायगी और मुझे उसकी इन् दिनों की याद आयगी तो मैं क्या क्या कल्पना करूँगा. यह मात्र एक कल्पना है और...

  • आलसी कोहरा

    कुछ इस तरह बैठा है, आलसी कोहरा, पैर पसारे, शाख पर! हैराँ परेशाँ सा है सूरज, नहीं समझ पा रहा, क्या करे वो! होंगे मेरे. इंतजार में. बूढ़े,बच्चे,जवान सारे! ठिठुरते होंगे, कड़कड़ाते जाड़े से! आजाद होना है मुझे, बादलों की...


कविता