नवीनतम लेख/रचना

  • नयी रातें

    नयी रातें

    हो चली अब पुरानी बातें नया जमाना नयी हैं रातें सोचो जरा— उनका क्या होगा? जो करते थे केवल गरीब की बातें, भूखी रखते थे गरीब की आंतें पुँजीवाद की बेबजह बुराई करना लोंगों को रोजगार...

  • हाइकु

    हाइकु

    1 श्रद्धा व आस प्रतिमा बने मूर्ति आन बसे माँ। 2 त्रिदेवी शक्ति विरिंच भी माने माँ जग निहाल। 3 तैर ना सकी बुझी निशा की साँस उषा की झील। 4 पिस ही गई माँ दो...



  • सफेद बाल…

    सफेद बाल…

    आज जब खुद को देखा आईने में तो सकपका सी गई आंखे चौंधिया गई दिल का धङकना जैसे थम सा गया एकटक..पल पल बस खुद को ही निहार रही थी खुद पर विश्वास भी कहाँ हो...

  • शौक

    शौक

    कृष्ण बचपन में पढने के साथ-साथ मूर्तिकला में भी निपुण था | उसके मम्मी-पापा उसके इस शौक को पढाई में बाधा मानते थे | लेकिन जब स्कूल में मूर्तिकला की प्रतियोगिता जो कि जिला स्तर की...

  • पितृपक्ष

    पितृपक्ष

    हुआ खत्म पितृपक्ष अब नवरात्री आई है कर पित्रों की पूजा माता की बारी आई है पितृपक्ष में खिला ब्राह्मणों को सोचते कमाया पुण्य है नवरात्री में सजाकर मंदिर खिलाकर लंगर लोगों को दिखाया अपना धर्म...

  • हमारे थोथे आदर्श

    हमारे थोथे आदर्श

    अधिकतर लोगो की शिकायत रहती है की मैं धर्म या भगवान् को लेके नकारात्मक विचार रखता हूँ, जिन्हें अधिकतर लोग भगवान् मान के उनके आदर्शो गुण गाते हैं उनके बनाये आदर्शो पर चलने की प्रेरणा लेते...



कविता