नवीनतम लेख/रचना

  • ऐ भाई ! ज़रा देख के…!!

    ऐ भाई ! ज़रा देख के…!!

    भ्राता, भाऊ, बिरादर, पाजी, भैया, दादा, अन्ना, चेट्टन आदि भारतीय भाषाओं में ‘भाई’ शब्द के पर्यायवाची हैं। मेरा इतिहास, भूगोल, समाज शास्त्र और जीवशास्त्र का ज्ञान यह कहता है कि “एक ही दंपति से उत्पन्न से...

  • मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी को खुला पत्र

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी को खुला पत्र

    प्रति, श्री शिवराज सिंह चौहान माननीय मुख्य मंत्री, म. प्र.  शासन, मुख्यमंत्री कार्यालय,मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल विषय : मध्य प्रदेश राजभाषा नीति बनाये जाने हेतु निवेदन आदरणीय मान्यवर, मैंने सबसे पहले यह पत्र आपको ईमेल एवं डाक से 1 नवम्बर 2012 को भेजा...

  • कमीज का कालर

    कमीज का कालर

    ह्म्म्म!! कड़क झक्क सफ़ेद टंच बुशर्ट !! फीलिंग गुड !! चुटकी भर रिवाइव पावडर कुछ बूँद टिनोपाल व नील की डलवा दी थी न ! कल पहन कर जब निकला था था प्रसन्नचित था पहना तने...


  • हाइकु

    हाइकु

    चली मथनी, हो गई एकत्रित, मक्खनी यादे चली मथनी, विष से नीला कंठ, अमृत बाँट चली मथनी, पिला रही गोपियाँ, छाछ कान्हा को चली मथनी, पहुँचाया कंस को, मक्खन कर चिनी दीवार, बं बांटा भगवान को,...

  • दोहा

    दोहा

    मुस्कान के मोती डालो, रहेंगे हंस करीब। प्रभु ने सबको दी है यह, कोई नहीं गरीब।। मुस्कान के मोती डाल,रहेंगे हंस करीब। कुदरत ने दी नेमते,कोई नहीं गरीब।।


  • ग़ज़ल

    ज़िन्दगी में नित नये अब राग गुंजाने लगे नित नये रंगों में नूतन स्वप्न हर्षाने लगे भर दुपहरी कूजती कोयल फुदकती डाल पर ज़िन्दगी को गुलमुहर के फूल अब भाने लगे खिलखिला कर हँस रहे हैं...



राजनीति

कविता