सामाजिक

क्या समस्या का समाधान आरक्षण है?

मनुष्य के जीवन को पूर्णरूपेण सुख- सम्पन्नतामय बनाने के लिए आर्थिकीय दृष्टि सदैव पर्याप्त नहीं हुआ करती है। कदाचित् इसका यह तात्पर्य लेशमात्र भी नहीं है कि अर्थ का सुख-शान्ति-समृध्दि में कोई स्थान नहीं। संसार भर में बड़े-से-बड़े वेदज्ञों, नीतिशास्त्रवेत्ताओं, विज्ञानविशारदों, सगीतज्ञों आदि मनीषियों को यदि भोजन न मिले तो उनकी सारी विद्याएॅं एक कोने […]

मुक्तक/दोहा

हाइकु-दोहे

(1) प्यासी धरती/ खग दुखित रोते/ बढ़ती भूख। मिटते प्राणी/ है चकित नाहर/ घटा रसूख॥ (2) गिरे सितारे/ घट गई रौनक/ नभ बेहाल। छाते बादल/ सुधाकर शंकित/ तम की चाल॥ (3) घिरा अँधेरा/ डर नहीं मनुज/ जला ले दीप। छले न जाना/ ध्यान से पग धर/ लक्ष्य समीप॥ (4) सावन आया/ खिल उठी बगिया/ मस्त […]

आत्मकथा

आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 48)

संघ कार्य मैं चाहे देश के किसी भी भाग में रहूँ, संघ के कार्यकर्ताओं के सम्पर्क में सबसे पहले आ जाता हूँ। लखनऊ तो मेरा पुराना कार्यक्षेत्र रहा है, इसलिए अनेक स्वयंसेवक बंधु मेरे पूर्व परिचित हैं। विश्व संवाद केन्द्र, जहाँ मैं ठहरा था, लखनऊ में संघ के चार प्रमुख केन्द्रों में से एक है। […]

सामाजिक

गणेश चतुर्थी

भाद्रपद शुक्ल की चतुर्थी ही गणेश चतुर्थी कहलाती है। बुद्धि और सिद्धि के दाता श्री गणेशजी महाराज पधारो। श्री गणेशजी विघ्न विनाशक हैं। इन्हें देवसमाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। भगवान श्री गणेश रिद्धि-सिद्धि के दाता देवताओं के भी देव हैं। प्रथम पूज्य गणेश मनुष्य तो क्या देवताओं के भी कार्य सिद्ध करने के लिए आदि, अनंत, अखंड, अद्वैत, अभेद, […]

लघुकथा

लघुकथा : परिश्रम का फल

छोटेलाल अपने गाॅव में गरीबों में गिने जाने वाले एक सीधे इंसान थे।उनकी पत्नी मुन्नी देवी तथा एक सात साल का लड़का उनके परिवार में थे। छोटेलाल बहुत ईमानदार थे इसलिए सभी गाॅववालें इनसे खुश रहते है और ये गरीबों के नेता भी थे अगर किसी को कोई भी परेशानी होती तो ये उसे अपनी परेशानी […]

इतिहास

महर्षि दयानन्द की प्रमाणित जन्म तिथि

ओ३म् महर्षि दयानन्द ने पहले पूना प्रवचन और बाद में थ्योसोफिकल सोसायटी के लिए अपना संक्षिप्त आत्मकथन लिखते हुए, इन दो अवसरों पर न तो अपने जन्म स्थान को ही पूरी तरह से सूचित किया और न हि जन्म के मास व तिथि का उल्लेख किया। अतः उनके सुविज्ञ अनुयायियों पर यह दायित्व आ गया […]

कविता

प्रेम पर लिखना आसान नहीं

प्रेम पर लिखना आसान नहीं मन को कुरेदना होताहै वही लिखना है जो सोचते हो पर शब्द नहीं मिलते है लिखी बातों में सिर्फ़ ज़िक्र किया जाता है प्रेम में लिखा क्या जायें जब नाम प्रेमी का लिखो फ़िर इश्क हो जाता है उसी इश्क से जिस पर लिखने का मन होताहै फ़िर वही ख़्यालो […]

गीत/नवगीत

हां यही जिन्दगी है…

थोडे से हैं आंसू, थोडी सी हंसी है हां यही जिन्दगी है। तुम जो मुस्कुरादो, थोडा खिलखिलादो बस यही हर खुशी है॥ थोडे से हैं आंसूं…. डूबा जो सूरज चांद उगेगा, धूप गई तो होगी चांदनी। तू मेरे दिल में बस रहना, बनके मेरे दिल की रागनी॥ आयेगें तूफां तो, सहेगे उन्हें भी जिन्दगी नेमत […]

कविता

न कहता है,इन चरणों को नित्य पखारूं…

निराकार बेडोल, यूं ही मिट्टी का ढेला। फिरता यूं ही मूढ, जगत में रेला रेला॥ गर देकर के ज्ञान, ना तुमने तारा होता। कच्चे घट जैसा, ना मुझे संवारा होता॥ मेरे नयनो को ना सत्य, जो आप दिखाते। जाने किन छलचंदों में, ये नेह समाते॥ कर्म ज्योति का दीप जगाकर, मन में गुरुवर। बता दिया […]

स्वास्थ्य

भोजन करने के नियम

भोजन करने से पहले और बाद में याद रखने योग्य आवश्यक नियम जब हम भोजन करते हैं तो हमें भोजन से पूर्व और भोजन के बाद बहुत-सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। इससे हम अपने स्वास्थ्य को ठीक रख सकते हैं। भोजन करने से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें निम्नानुसार हैं- * प्रातः बिना स्नान किए […]